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सिग्नल और वॉट्सऐप की लड़ाई में इस इंडियन मैसेजिंग ऐप की दुकान बंद हो गई

हाइक स्टिकरचैट ऐप अब नहीं चलेगा

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Hike StickerChat जो कभी Hike Messenger के नाम से जाना जाता था, अब बंद हो गया है. हाइक अपने स्टिकर्स की वजह से यूथ में काफी पॉपुलर हुआ था.
WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी आने के बाद से नाराज़ यूजर Signal और Telegram पर दौड़ चले. वॉट्सऐप की डेटा कलेक्शन प्रैक्टिस और सिग्नल-टेलीग्राम की पॉलिसी को लेकर बहसें होने लगीं. क्या आपको वॉट्सऐप चलाते रहना चाहिए या फ़िर सिग्नल-टेलीग्राम पर शिफ़्ट हो जाना चाहिए? मगर इस सारी बहस के बीच में एक इंडियन मैसेजिंग ऐप ने अपनी दुकान बंद करके बोरिया बिस्तर समेट लिया. Hike StickerChat जो कभी Hike Messenger के नाम से जाना जाता था, अब नहीं रहा.
जनवरी की शुरुआत में ही हाइक मैसेंजर के फाउन्डर और CEO कैविन भारती मित्तल ने इसके बंद होने का ऐलान ट्विटर पर कर दिया था. हाइक का मैसेजिंग ऐप अब न गूगल प्ले स्टोर पर है और न ही ऐपल ऐप स्टोर पर. हाइक की कहानी हाइक मैसेंजर को कैविन भारती मित्तल ने दिसंबर 2012 में लॉन्च किया था. कैविन भारती एंटरप्राइज़ेस के फाउन्डर और चेयरपर्सन सुनील भारती मित्तल के बेटे हैं. हाइक प्राइवेट लिमिटेड भी भारती एंटरप्राइज़ेस के अंदर ही काम करता है. एयरटेल नेटवर्क भी इसी एंटरप्राइज़ का हिस्सा है.

हाइक अपने स्टिकर्स की वजह से इंडिया के यूथ के बीच काफी पॉपुलर हुआ था. 2015 में फ़्री कॉलिंग का फीचर वॉट्सऐप से पहले हाइक ने चालू किया था. इस बीच अपनी सर्विस को बेहतर बनाने के लिए इसने कई स्टार्टअप खरीदे. पेमेंट सर्विस चालू करने के मामले में भी हाइक वॉट्सऐप से आगे निकल गया. मगर जहां बाकी मैसेजिंग ऐप्स ने सिग्नल प्रोटोकॉल इस्तेमाल करके अपनी चैट को एंड-टु-एंड इन्क्रिप्ट कर लिया, हाइक इस मामले में पीछे छूट गया.
हाइक ने अपने ऐक्टिव यूजर्स के बारे में कम ही जानकारी दी है इसलिए ये पता लगाना थोड़ा मुश्किल है कि हाइक मैसेंजर का पतन कब और कैसे शुरू हुआ. बहरहाल अप्रैल 2019 में हाइक मैसेंजर हाइक स्टिकरचैट बन गया. यहां स्नैपचैट की ही तरह रिकमेंडेशन में स्टिकर दिखाई पड़ते थे. HikeMoji की मदद से यूजर अपने अवतार पर बेस्ड कस्टम स्टिकर बना सकते थे. हाइक शुरुआत से ही अपने स्टिकर्स की वजह से पॉपुलर रहा था इसलिए ये फीचर इसके DNA से जुड़ा हुआ मालूम पड़ा.
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हाइक लैन्ड अब एक अलग से ऐप बन गया है.

मैसेजिंग ऐप्स के गेम में वॉट्सऐप और टेलीग्राम से पीछे छूट जाने के बाद हाइक ने एक अलग अप्रोच अपनाई. सोशल कनेक्टिविटी. हाइक का मानना था कि मैसेज करने वाला सिस्टम बहुत पुराना है 2G एरा वाला. अब हमें आगे बढ़ना है इसलिए मैसेज की जगह सोशल कनेक्टिविटी की जरूरत है.
हाइक ने अपने ऐप को नया डिजाइन दिया और हाइक लैन्ड बनाया. ये ऐसी जगह थी जहां आप और आपके दोस्त वर्चुअल तरीके से मौजूद रहते थे. अब आप बात कर सकते हैं, साथ में लूडो खेल सकते हैं या फ़िर साथ में ही मिलकर यूट्यूब वग़ैरह देख सकते हैं.
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HikeMoji रश और वाइब दोनों ऐप पर काम करेगी.
अब हाइक का क्या होगा? हाइक का सिर्फ़ स्टिकरचैट ऐप बंद हुआ है. हाइक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी अभी भी चल रही है. कैविन भारती मित्तल ने हाइक स्टिकरचैट के बंद होने के साथ ही दो नए ऐप लॉन्च भी किए हैं. एक है Vibe by Hike और दूसरा है Rush by Hike. Vibe असल में HikeLand ही है जो अब एक स्टैन्डअलोन ऐप बनेगा. मगर ये इन्वाइट-ओनली सिस्टम पर चलेगा. ऐप के रजिस्ट्रेशन चालू हो गए हैं, जो vibe.fun पर जाकर किए जा सकते हैं. Rush एक गेमिंग सर्विस है, जहां लोग आपस में लूडो और कैरम जैसे गेम खेल सकते हैं. Rush ऐप iOS पर मौजूद है और जल्द ही एंड्रॉयड पर भी आने वाला है. हाइक की पिछली अप्रोच के मुकाबले ये वाला आइडिया ज्यादा सही लग रहा है. दोनों ऐप का काम अलग-अलग होने की वजह से यूजर कन्फ्यूजन से बचेंगे, और जिसको जिस चीज़ का काम होगा, वही ऐप इस्तेमाल करेगा.
इन दोनों ही ऐप पर HikeMoji का सपोर्ट रहेगा यानी कि आपके बनाए हुए अवतार कहीं नहीं जाएंगे. इसके अलावा हाइक का Stickers by Hike ऐप स्टोर पर मौजूद है. इसकी मदद से हाइक यूजर अपने स्टिकर को वॉट्सऐप और टेलीग्राम में इस्तेमाल कर पाएंगे. हाइक कंपनी में किसका पैसा लगा है? हाइक प्राइवेट लिमिटेड की फन्डिंग में इंडिया, जापान, अमेरिका, ताइवान और चाइना का पैसा लगा हुआ है.
*हाइक दिसंबर 2012 में बना. *अप्रैल 2013 में पहले राउन्ड की फन्डिंग में BSB (भारती सॉफ्टबैंक) से 7 मिलियन डॉलर लिए. उस वक़्त डॉलर 54 रुपए का था. इसे रुपए में बदलें तो ये लगभग 38 करोड़ रुपए बने. BSB ग्रुप सुनील मित्तल के भारती एंटरप्राइज़ेस और जापान के सॉफ्टबैंक ग्रुप का जॉइन्ट-वेन्चर है। *इसके अगले साल यानी मार्च 2014 में हाइक ने फ़िर से BSB से 14 मिलियन डॉलर की फन्डिंग ली. *अगस्त 2014 में अमेरिकी कंपनी टाइगर ग्लोबल से 65 मिलियन डॉलर जुटाए. *अगस्त 2016 में हाइक ने 175 मिलियन डॉलर की रकम ंचाइनीज कंपनी टेनसेन्ट और ताइवान की फॉक्सकॉन से ली.
ताइवान और चाइना वाली फन्डिंग के बाद हाइक कंपनी का वैल्यूऐशन 1.4 अरब डॉलर पहुंच गया. अपने चालू होने के 4 साल के अंदर ही हाइक यूनिकॉर्न स्टेटस पा गया. ऐसा करने वाला ये पहला इंडियन स्टार्टअप बन गया.
अब हाइक स्टिकरचैट बंद हो गया है, मगर कंपनी ने नई पारी भी शुरू की है. इसके नए ऐप को यूजर कितना पसंद करते हैं ये तो आने वाले टाइम में ही पता चल पाएगा.

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