AC कौन सा लेना है, कब लेना है, कैसे चलाना है, इसके ऊपर तो खूब बतिया लिया. इसलिए आज बात करेंगे कूलर की. बड़े शहरों में भले एयर कंडीशनर कॉमन हो गया हो मगर देश की एक बड़ी आबादी अभी भी गर्मी में राहत के लिए कूलर की तरफ मुंह करके सोती है. वैसे पैर करके भी सो सकती है, मगर उसमें चादर उड़ने लगती है. लंतरानी से इतर हम बात करेंगे कि आपको कौन सा कूलर लेना चाहिए. पर्सनल कूलर (personal cooler) या डेजर्ट कूलर (desert cooler). कूलर लेने के बाद क्या करना चाहिए, जैसे पानी कौन सा डालना है.
AC तो बिल बढ़ाएगा, सही कूलर और ये बातें पता होंगी तो ठंडी हवा और बचत दोनों मिलेंगी
अगर आप अपने घर में आरामदायक और ठंडी हवा का माहौल बनाना चाहते हैं, तो एयर कूलर से अच्छा कुछ नहीं. किफायती है और बिजली भी कम खाता है. लेकिन जो आप इस बात पर कन्फ्यूज (How to choose an air cooler for home) हैं कि आपको छोटू वाला पर्सनल कूलर लेना चाहिए या फिर बड़ा वाला डेजर्ट कूलर तो ये आर्टिकल आपके लिए है.


पर्सनल कूलर माने छोटे साइज वाले वो कूलर जो एक छोटे से एरिया में हवा फेंकते हैं. ऐसे कूलर में बड़े से एग्जॉस्ट फैन और दमदार पानी की मोटर की जगह छोटा फैन और छोटू सी मोटर लगी होती है. ऐसा कूलर उनके काम का है जो एक जगह बैठकर काम करते हैं. जैसे कोई छोटा सा ऑफिस या कमरा. ये सिर्फ सामने-सामने से हवा देगा. पूरा कमरा ठंडा नहीं करेगा.
अगर जो आप किसी ऐसी जगह पर हैं जहां गर्म हवा चारों तरफ से आ रही, जैसे टॉप फ्लोर पर तो ये कूलर उतना कूल नहीं करेगा. हां, जो आप ग्राउन्ड फ्लोर या किसी बंद कमरे में हैं तो आपका काम बन जाएगा. गणित के हिसाब से 150 स्क्वायर का कमरा पर्सनल कूलर के लिए ठीक है.
डेजर्ट कूलर को देश में नागपुर कूलर के नाम से भी जाना जाता है. नागपुर इसलिए क्योंकि वहां गर्मी एकदम डेजर्ट जैसी ही पड़ती है. बड़े से लोहे के बॉक्स वाला ये कूलर बड़े से एग्जॉस्ट वाले पंखे, बड़ी पानी की टंकी और बड़ी मोटर के साथ आता है. ये वाले भाईसाहब कमरे से लेकर बड़ा हॉल और शोरूम भी ठंडा कर सकते हैं.
डेजर्ट कूलर को चाहें तो कमरे में लगाइए या फिर खिड़की पर लगा दीजिए. इसमें लगा एग्जॉस्ट फैन बाहर से हवा खींचता है जो जालियों में बह रहे पानी से होकर ठंडी हवा में तब्दील हो जाती है. डेजर्ट कूलर परिवार के लिए, ऑफिस के लिए एकदम मुफीद है. वैसे डेजर्ट कूलर प्लास्टिक के भी आते हैं, मगर जो असल में ठंडी हवा चाहिए तो मेटल वाला ही इस्तेमाल कीजिए.
पानी और जाली की जुगलबंदीकूलर आपके पास कोई सा भी हो, उसमें पानी का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. हार्ड वॉटर या ज्यादा कैल्शियम वाल पानी मोटर को जल्दी ब्लॉक करता है और जालियों पर सफेद कलर वाली कड़क परत भी चढ़ा देता है. इसलिए कूलर लेने से पहले अपने इलाके का TDS चेक कर लीजिए. ई-कॉमर्स पर TDS मीटर सस्ते में मिल जाता है. अगर पानी बहुत हार्ड है तो नॉर्मल की जगह हनीकोम्ब वाली जाली लगाइए. हर पखवाड़े टंकी का पानी चेंज कीजिए और जालियों को साफ कीजिए वरना ठंडी हवा कम ही मिलेगी. वैसे सफाई का एक और फायदा है, कूलर से बदबू नहीं आती है.
कूलर में पानी भरते समय प्लग ध्यान से निकाल दीजिए. सफाई के समय भी प्लग निकालकर काम करना है. इलेक्ट्रिशियन बुलाकर ये भी चेक कर लीजिए कि घर बिजली बोर्ड में अर्थिंग आ रही या नहीं. अगर नहीं तो उसकी व्यवस्था जरूर कीजिए. सबसे आखिर में एक और बात. बारिश में सफाई हर हफ्ते कीजिए और उसके बाद टंकी खाली करके, जालियां सुखाकर ही कार्यक्रम बंद कीजिए. ठंडी हवा के चक्कर में डेंगू जी को नहीं बुलाना है.
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