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Chrome Browser में खतरनाक ऐड्स से बचाएगा Google IP Protection, लेकिन एक ट्विस्ट है

टेक दिग्गज Google डिवाइसेज के डिजिटल पते (IP Adress) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए और यूजर्स की ऐक्टिविटी ट्रेकिंग को बैलेंस करने के लिए जल्द ही नया टूल "IP Protection" लॉन्च करेगा.

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गूगल का नया फीचर लेकिन ट्विस्ट के साथ ( तस्वीर: indian templates)

Google अपने Chrome Browser में बहुत जल्दी "IP Protection" फीचर रोलआउट करने वाला है जिसके बाद यूजर्स की प्राइवेसी बहुत मजबूत हो जाएगी. इतना पढ़कर आप शायद कहोगे, भाई वाह गूगल मौज आ गई. आखिरकार तीन साल पहले किया वादा तुम अब पूरा करने वाले हो. ‘ना रहेगा बांस ना बजेगी बांसुरी’ की तरह ना रहेगा आईपी एड्रेस और ना दिखेंगे फालतू के विज्ञापन. लेकिन यहां आते हैं हम, मतलब The Lallantop. कहने का मतलब खबर इतनी होती तो फिर क्या बात होती. गूगल ने वादा निभाया तो मगर आधा. पूरी कहानी बताते हैं.

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टेक दिग्गज गूगल डिवाइसेज के डिजिटल पते (IP Adress) के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए और यूजर्स की ऐक्टिविटी ट्रैकिंग को बैलेंस करने के लिए जल्द ही नया टूल लॉन्च करेगा, लेकिन उसमें थोड़ा ट्विस्ट है जिसके बारे में भी जानना जरूरी है.. 

क्या करना था, क्या करेगा, कैसे करेगा से पहले जरा आईपी एड्रेस समझते हैं.

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आईपी एड्रेस मतलब किसी भी डिवाइस की पहचान. एकदम घर या ऑफिस के पते के माफिक. बस यहां फ्लैट नंबर कि जगह 192.02. जैसे नंबर होते हैं. इसका इस्तेमाल दुनिया-जहान की वेबसाइट्स और ऐप्स हमारी इंटरनेट ऐक्टिविटी को मॉनिटर करने के लिए करती हैं. हमारे डेटा को समझकर हमारी एक प्रोफ़ाइल तैयार होती है और उसके बाद स्क्रीन पर आते हैं विज्ञापन. जैसे आपने एक बार कुछ सर्च कर लिया तो उसके बाद उससे जुड़े तमाम प्रोडक्टस ‘रायते की मिर्च’ की तरह स्क्रीन पर उतराने लगते हैं. वैसे आईपी एड्रेस को सरकारी एजेंसी भी मॉनिटर करती हैं, अगर जरूरत पड़े तो. मसलन किसी अपराध के सिलसिले में. 

ये तो हमने आईपी एड्रेस का पता कर लिया, अब जरा गूगल का पता करते हैं जिसनें हमें ट्रैकिंग का पूरा पता नहीं दिया.

दरअसल आईपी एड्रेस ट्रैकिंग के लिए जितना जरूरी है उतना ही खतरनाक भी है. विशेषकर साइबर अपराधों में. कई बार हैकर किसी और वेबसाइट में सेंध लगाते -लगाते आपके और हमारे डिवाइस में भी घुस जाते हैं. गूगल ने तीन साल पहले इसको रोकने की बात कही थी. तब इस प्रोजेक्ट का नाम था "Gnatcatcher". तब लगा कि गूगल सारी थर्ड पार्टी वेबसाइट्स और ऐप्स के लिए ट्रैकिंग बंद कर देगा.

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थर्ड पार्टी इसलिए क्योंकि गूगल तो हमें ट्रैक कर ही रहा है. अब भले बहाना कोई सा भी हो. खैर अब जाकर गूगल बाबा ऐसा करने वाले हैं, मगर थोड़ा ट्विस्ट है. "Gnatcatcher का नाम हो गया IP Protection. फीचर काम करेगा, लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि आपका पता अब थर्ड पार्टी को मिलेगा ही नहीं. मिलेगा मगर proxy सर्वर के जरिए. आसान भाषा में कहें तो गूगल हमारे और थर्ड पार्टी के बीच अपना मानुस बिठाएगा. एकदम स्कूल और कॉलेज वाले प्रॉक्सी की तरह जो आपकी अनुपस्थिति में हाजिरी लगाता है.

अब ऐसा करने से भले विज्ञापन से पूरी तरह छुटकारा नहीं मिले, मगर थोड़ी शांति तो जरूर मिलेगी. दूसरा संतोष इस बात का कि ट्रैकिंग के बीच गूगल बाबा का फ़िल्टर है. मतलब अगर कोई खतरनाक वेबसाइट हमें धरने का मौका तलाश रही होगी तो गूगल बीच में आ जाएगा. वैसे एक बात और भी है. अगर गूगल पूरी तरह से ट्रैकिंग बंद कर देगा तो कमाएगा कहां से. बाकी आप समझ ही गए होंगे. रही बात फीचर की तो आने दीजिए. उसका पता-ठिकाना हम आपको बता ही देंगे. 

वीडियो: गूगल मैप्स ने ऐसा क्या किया कि सबकी पर्सनल जानकारी बड़े ख़तरे में आ गई?

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