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5G की जगह 4G स्मार्टफोन की अचानक बंपर डिमांड होने लगी, कंपनियों ने भी बदले प्लान

स्मार्टफोन शिपमेंट में 4G smartphones की हिस्सेदारी पिछली तिमाही में दोगुनी हो गई है. कम कीमत वाले फोन की ओर झुकाव के कारण 4G फ़ोन की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है. इसमें Vivo, Oppo, Itel और Infinix जैसे चीनी ब्रांड्स के साथ-साथ Motorola और Samsung भी शामिल हैं. जानिए ये नजारा बदल कैसे गया.

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4G स्मार्टफोन की बंपर डिमांड

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  • 2026 की दूसरी तिमाही में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट में वृद्धि हुई है, जो 5.8% से बढ़कर 11.1% हो गई है, जिससे 4G की हिस्सेदारी में दोगुनी तेजी देखी गई है।
  • 5G स्मार्टफोन की बढ़ती लागत, महंगे कंपोनेंट्स और भारतीय रुपये की गिरावट ने 15,000 रुपये से कम कीमत वाले 5G फोन की बिक्री में गिरावट को बढ़ावा दिया है।
  • ब्रांड्स ने 5G फोन की कमी के कारण पुराने घटकों के साथ 4G स्मार्टफोन की पेशकश बढ़ाई है, जिससे बजट सेगमेंट में 4G की बिक्री में इजाफा देखने को मिलता है।

साल 2026 के अगस्त महीने में 4G स्मार्टफोन के बारे में जो बताने जा रहा हूं उसकी कल्पना किसी ने नहीं की होगी. कुछ सालों पहले जब देश में 5G सर्विस लॉन्च हुई तो सभी ने यही सोचा था कि धीरे-धीरे 4G स्मार्टफोन खत्म हो जाएंगे. बजट में भी 5G फोन मिलेगा. ऐसा हुआ भी. 10 हजार से कम में भी 5G फोन मिलने लगे थे. 4G फोन को भाव मिलना काफी कम हो गया था. लेकिन सिर्फ तीन महीने में तस्वीर बदल गई है. Q2 2026 में स्मार्टफोन शिपमेंट में 4G का हिस्सा पिछली तिमाही के 5.8 प्रतिशत से बढ़कर 11.1 प्रतिशत हो गया है.

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4G की बंपर डिमांड

मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक IDC के डेटा से पता चलता है कि स्मार्टफोन शिपमेंट में 4G की हिस्सेदारी पिछली तिमाही में दोगुनी हो गई है. कम कीमत वाले फोन की ओर झुकाव के कारण 4G फ़ोन की बिक्री में जबरदस्त उछाल आया है. इसमें Vivo, Oppo, Itel और Infinix जैसे चीनी ब्रांड्स के साथ-साथ Motorola और Samsung भी शामिल हैं. काउंटरपॉइंट की रिसर्च के मुताबिक 4G शिपमेंट में 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जिससे Q2 में बिकने वाले स्मार्टफोन में इनकी हिस्सेदारी 12 फीसदी हो गई है, जबकि Q4 2025 में यह 7 फीसदी थी. काउंटरपॉइंट के रिसर्च डायरेक्टर तरुण पाठक को उम्मीद है कि 2026 में 4G स्मार्टफोन मार्केट में सालाना 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी, जबकि ओवरऑल मार्केट में गिरावट देखी जा रही है.

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5G मुश्किल हो गया है

रैम की बढ़ती लागत, कंपोनेंट्स की महंगाई और रुपये की गिरती कीमत ने 15,000 रुपये से कम कीमत वाले 5G डिवाइस का काम मुश्किल कर दिया है. 15,000 से कम कीमत वाले मास-मार्केट सेगमेंट में 45 प्रतिशत की गिरावट आई है, इसलिए ब्रांड्स ज़्यादा 4G विकल्प लॉन्च कर रहे हैं.

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4G में भी कटौती

स्मार्टफोन मेकर्स वापस से 4G डिवाइस का रुख कर तो रहे हैं, मगर यहां भी मामला पहले जैसा नहीं है. ब्रांड्स लागत कम रखने के लिए LCD डिस्प्ले और LPDDR4x मेमोरी जैसे पुरानी पीढ़ी के कंपोनेंट्स का इस्तेमाल करते हुए 4G पोर्टफ़ोलियो को वापस ला रहे हैं. माने स्पेसिफिकेशन में कटौती करनी पड़ रही है.

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20 हजार के बजट में 5G फोन अब बेहद कम मिल रहे हैं. जो मिल भी रहे उनके अंदर रैम को घटाकर 4GB किया जा रहा है. रैम पर रुंदा तब मारा जा रहा है जब इंडस्ट्री का स्टैंडर्ड 6GB हुए पांच साल हो गए हैं. एआई के लिए बढ़ती रैम की डिमांड ने सबसे ज्यादा खेल स्मार्टफोन का खराब किया है. सस्ते 5G का समय गया शायद.

ये उस देश के संदर्भ में है जहां 5G डेटा दुनिया में सबसे सस्ता है. लेकिन 5G डिवाइस नहीं.  

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