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इंजीनियर ने बनाईं 126 फर्जी धार्मिक वेबसाइट, फिर 22 हजार लोगों से करोड़ों रुपये ठगे

पुलिस ने इस रैकेट के मास्टरमाइंड विकी गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है. बताया गया कि विकी इंजीनियर है और दिल्ली से अपना ठगी का ग्रुप चलाता है. इस ग्रुप ने धार्मिक स्थलों के नाम पर 126 फर्जी वेबसाइट बनाकर श्रद्धालुओं को लूटा. आरोपियों ने अब तक 21,985 लोगों के साथ करोड़ों की ठगी की है.

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पुलिस ने इस रैकेट के मास्टरमाइंड को पकड़ लिया है. (फोटो-इंडिया टुडे)

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  • गुजरात पुलिस ने साइबर सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस ने 126 फर्जी धार्मिक वेबसाइटें बनाने वाले एक ऑनलाइन फ्रॉड ग्रुप का भंडाफोड़ कर दो मुख्य आरोपी, जिनमें मास्टरमाइंड विकी गुप्ता भी है, गिरफ्तार किया है।
  • यह फ्रॉड ग्रुप 11 राज्यों में फैला था और AI निर्माण की तस्वीरों के माध्यम से श्रद्धालुओं को धोखा देकर एडवांस पेमेंट लेकर लगभग 22,000 लोगों को ठगा गया, जिसमें गुजरात में 40 प्रमुख धार्मिक स्थलों के नाम शामिल हैं।
  • पुलिस ने अब तक 70 शिकायतें दर्ज की हैं और जाँच का दायरा बढ़ाकर नेटवर्क के वित्तीय स्रोतों और फर्जी वेबसाइट के डोमेन नाम बदलने की तकनीक की तहकीकात कर रही है।

गुजरात पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड से जुड़े ग्रुप का भंडाफोड़ किया है. पुलिस की साइबर सेंटर ऑफ़ एक्सीलेंस टीम के मुताबिक, इस ग्रुप ने कुल 126 फर्जी धार्मिक वेबसाइट बनाई थीं, जिनमें फर्जी होटल, धर्मशाला, आश्रम दिखाए गए और लगभग 22 हज़ार लोगों को लूटा गया. पुलिस के मुताबिक, ये फ्रॉड लगभग 11 राज्यों में फैला था, जिसमें दो लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. इनमें से एक मुख्य आरोपी है.  

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इंडिया टुडे से जुड़े बृजेश दोषी की रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने उन श्रद्धालुओं को निशाना बनाया जो पूजा और VIP दर्शन के लिए ऑनलाइन बुकिंग का रुख करते हैं. बताया गया कि AI की मदद से बनाई गईं तस्वीरें श्रद्धालुओं को दिखाई गईं और उनसे एडवांस पेमेंट कराया गया. अकेले गुजरात में करीब 40 धार्मिक स्थलों के नाम पर लोगों को ठगा गया है. 

AI इमेजेस से भर दिया पोर्टल

पुलिस ने इस रैकेट के मास्टरमाइंड विकी गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है. बताया गया कि विकी इंजीनियर है और दिल्ली से अपना ठगी का ग्रुप चलाता है. इसके अलावा राजस्थान के रहने वाले शैलेश सैनी को भी गिरफ्तार किया गया है. शैलेश टेक्निकल और फाइनेंस से जुड़ा काम संभालता है. रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक 21,985 लोगों के साथ करोड़ों की ठगी की गई है. 

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जांचकर्ताओं ने बताया कि आरोपियों ने होटलों, धर्मशालाओं और आश्रमों की AI इमेजे बनाकर फर्जी पोर्टल पर डाल दीं. ये तस्वीरें वास्तविक तस्वीरों के बेहद करीब थीं. जब कोई श्रद्धालु ऑनलाइन बुकिंग के लिए सर्च करता तो ये वेबसाइट सामने आती. यूजर इसपर जाकर अपनी एडवांस बुकिंग करता. ये मामला तब सामने आया जब एक श्रद्धालु ने ऑनलाइन पेमेंट किया, लेकिन जब वो धार्मिक स्थल पर पहुंचा तो उसे पता चला कि स्कैम हुआ है.

पुलिस के मुताबिक, आरोपी हर बार डोमेन का नाम बदल देते थे जिससे साइबर एजेंसियों की निगरानी में न आएं.

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गुजरात में 40 फर्जी पोर्टल बनाए

रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात में प्रमुख धार्मिक स्थलों के नाम पर 40 पोर्टल बनाए गए थे. फर्जी वेबसाइटों में सालंगपुर कष्टभंजन देव, प्रभास पाटन, द्वारका जगत मंदिर, पालिताना जैन मंदिर, जूनागढ़ में गिरनार/अंबाजी, गांधीनगर के अक्षरधाम मंदिर और सोमनाथ जैसे स्थलों को निशाना बनाया गया.

आरोप ये भी है कि गिरोह ने तिरुपति देवस्थानम, तिरुमाला, कटरा, शिरडी, जगन्नाथ पुरी, वृंदावन, ऋषिकेश और हरिद्वार जैसे प्रमुख धार्मिक स्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं को निशाना बनाने के लिए फर्जी वेबसाइट बनाईं.

गुजरात पुलिस के साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के पुलिस अधीक्षक डॉ. राजदीप सिंह झा ने बताया कि इस मामले में अब तक 70 शिकायतें दर्ज की गई हैं. जांच का दायरा गुजरात के बाहर भी बढ़ाया गया है और अब ये पता लगाया जा रहा है कि इस नेटवर्क को चलाने के लिए पैसे कहां से आ रहे थे.

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