आपका CIBIL स्कोर अच्छा है. इसकी वजह से आपको लाखों का लोन मिल गया. आपने निर्धारित अवधि तक नियमित रूप से EMI का भुगतान करके लोन चुका भी दिया. इसके बावजूद बैंक ने आपको नो ड्यूज सर्टिफिकेट जारी नहीं किया. और न ही आपका CIBIL रिकॉर्ड (Full loan repaid, but CIBIL not updated) अपडेट किया. आपने कई ईमेल भेजे लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. ना चाहते हुए भी आपका क्रेडिट रिकॉर्ड प्रभावित हुआ. फिर आपने वही किया जो करना चाहिए. आपने उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया. अब आयोग ने बैंक का रिकॉर्ड अच्छे से 'दुरुस्त' कर दिया. पेश है कंज्यूमर फोरम से न्याय की एक और कहानी.
बैंक ने लोन चुकाने के बाद भी NOC नहीं दिया, ग्राहक ने उंगली टेढ़ी कर सारा हिसाब सीधा कर दिया
ग्राहक ने सितंबर और अक्टूबर 2023 के बीच कई ईमेल भेजकर 'नो-ड्यूज़ सर्टिफिकेट' की मांग (Full loan repaid, but CIBIL not updated) की और बताया कि इस देरी से उसके CIBIL स्कोर पर असर पड़ रहा है. लेकिन, लोन देने वाले Axis Bank ने उसकी मांगों का कोई जवाब नहीं दिया.


हरियाणा के करनाल जिले के इस व्यक्ति ने गाड़ी खरीदने के लिए 12.90 लाख रुपये का लोन लिया था. दावा किया कि उसने 3 साल तक लगातार 41,625 रुपये की मासिक किस्तें चुकाईं. इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक, पेमेंट शेड्यूल के अनुसार ये रकम उनके खाते से ऑटो-डेबिट हो जाती थी. कोविड-19 के दौरान लिए गए मोरेटोरियम के कारण ऋण अवधि बढ़ी और किस्तों की संख्या 36 से बढ़कर 42 हो गई. ग्राहक ने इसके हिसाब से अपने अकाउंट में पैसा रखा, लेकिन लास्ट किस्त की रकम अचानक 41,625 रुपये से बढ़ाकर 58,497 रुपये कर दी गई थी. इतना ही नहीं, 1 मार्च 2023 को उसके HDFC बैंक खाते में 1 लाख रुपये होने के बावजूद रकम ऑटो-डेबिट नहीं हुई.
ग्राहक ने 17 मार्च, 2023 को Axis बैंक को पत्र लिखकर 31 मार्च, 2023 को खत्म हो रहे फाइनेंशियल ईयर से पहले 'नो-ड्यूज़ सर्टिफिकेट' (बकाया न होने का प्रमाण-पत्र) मांगा. उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक ने न तो आखिरी EMI काटी और न ही सर्टिफिकेट जारी किया. हालांकि, उस व्यक्ति ने बाद में 2 सितंबर, 2023 को चेक के ज़रिए 42वीं और आखिरी किस्त का भुगतान किया, जिसे 4 सितंबर, 2023 को बैंक द्वारा भुना लिया गया.
इसके बाद, सितंबर और अक्टूबर 2023 के बीच उसने कई ईमेल भेजकर 'नो-ड्यूज़ सर्टिफिकेट' की मांग की और बताया कि इस देरी से उसके CIBIL स्कोर पर असर पड़ रहा है. लेकिन, लोन देने वाले बैंक ने उसकी मांगों का कोई जवाब नहीं दिया.
बैंक का अनुचित व्यापारिक व्यवहारपरेशान ग्राहक ने करनाल जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत की. मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष जसवंत सिंह और सदस्य नीरू अग्रवाल और सर्वजीत कौर ने की. आयोग ने पाया कि ग्राहक द्वारा संपूर्ण ऋण का भुगतान किया जा चुका था और इस तथ्य से बैंक ने भी साफ इनकार नहीं किया. लेकिन Axis बैंक ने आयोग के समक्ष तर्क दिया कि ग्राहक ने कोविड अवधि में पांच महीने का मोरेटोरियम लिया था, जिसके कारण ऋण अवधि बढ़ी और अतिरिक्त देनदारी बनी.
आयोग ने यह पाया कि अंतिम किस्त के समय ग्राहक के खाते में पर्याप्त राशि उपलब्ध थी, लेकिन बैंक ने समय पर किस्त नहीं काटी. ऐसे में ऋण समाप्त होने के बावजूद NOC जारी न करना और CIBIL रिकॉर्ड अपडेट न करना बैंक की सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापारिक व्यवहार है. इससे ग्राहक की फाइनेंशियल प्रोफ़ाइल खराब हुई है.
ये भी पढ़ें:- बालिका वधू की एक्ट्रेस ने सलून में पड़ी इस चीज से बनाया 180 करोड़ का ब्रांड
CIBIL नहीं सुधारा, बैंक पर लगा जुर्मानाआयोग ने अपने फैसले में बैंक को CIBIL रिकॉर्ड ठीक करने, NOC जारी करने और मुआवज़े व कानूनी खर्च के तौर पर 20,000 रुपये देने का निर्देश दिया है. आप भी इस बात का ध्यान रखिए. लोन लेकर समय से चुकाने से काम पूरा नहीं होता. बैंक से एनओसी लीजिए और CIBIL में भी चेक कीजिए कि लोन क्लोज हुआ या नहीं.
वीडियो: टल सकता है पेट्रोल में 25% Ethanol मिलाने का फैसला, E20 पेट्रोल ने बवाल काम कर दिया?









