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सोलर पैनल से बिजली का बिल और बढ़ गया, बंदे को कोर्ट जाकर ही आफत से मिला छुटकारा

शख्स ने छत पर सोलर सिस्टम लगवाया. उन्हें भरोसा दिलाया गया कि इससे महीने का बिजली बिल काफी कम हो जाएगा. लेकिन हुआ इसका उलटा. जानिए पूरा मामला.

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सोलर पैनल लगाया मगर बिजली बिल कम नहीं हुआ

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  • आंध्र प्रदेश के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को उपभोक्ता को 25,265 रुपये मुआवजा और फीस लौटाने का आदेश दिया क्योंकि सोलर पैनल से बिजली बिल कम नहीं हुआ।
  • सौर पैनल सिस्टम के खराब प्रदर्शन और नेट मीटरिंग शुल्क अधिक लेने के कारण उपभोक्ता ने शिकायत दर्ज कराई, जिससे विवाद कार्यालय में मामला पहुंचा।
  • इस फैसले से उपभोक्ताओं को कंपनियों की अनियमितताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने का रास्ता मिला है और कंपनियों को बेहतर सेवा देना अनिवार्य होगा।

सोलर पैनल फायदे की चीज है. बिजली बिल कम हो जाता है. लगातार सप्लाई मिलती है. सोलर पैनल लगाने के लिए कम ब्याज पर लोन मिलता है. सब्सिडी भी मिलती है. जो अगर आपके पास बिजली बच जाए तो आप उसे सरकार को बेच सकते हैं. माने फायदों की लिस्ट लंबी है. लेकिन अगर ऐसा नहीं हो तो. शायद आपको लगे कि पक्का सूरज अंकल रूठ गए होंगे या फिर बरखा रानी जमकर बरस रही होंगी. नहीं ये दिक्कत नहीं है बल्कि यहां मामला सर्विस से जुड़ा है जहां सोलर पैनल लगाने के बाद भी बिजली बिल (Solar panel failed to cut electricity bill)कम नहीं हुआ.

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इसलिए आंध्र प्रदेश में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) ने एक रिन्‍यूएबल एनर्जी कंपनी को उपभोक्‍ता को 25,265 रुपये देने का निर्देश दिया है. उपभोक्‍ता की शिकायत थी कि सोलर पैनल लगाने के बावजूद बिजली का बिल कम नहीं हुआ.

सोलर ने दिया 'बिजली' का झटका

श्री इज्जादा विवेकानंद (Sri Ijjada Vivekananda) नाम के उपभोक्ता ने अपने छत पर सोलर सिस्टम लगवाया. उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि इससे महीने का बिजली बिल काफी कम हो जाएगा. हुआ इसका उलटा. आरोप है कि सिस्टम ने वादे के मुकाबले बहुत कम बिजली पैदा की. इससे घर के मालिक का बिजली का खर्च कम होने के बजाय बढ़ गया. शिकायतकर्ता ने यह भी तर्क दिया कि कंपनी ने नेट मीटर लगाने के लिए बहुत ज्‍यादा पैसे लिए थे.

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बिल के झटके से परेशान विवेकानंद ने आंध्र प्रदेश के विजयनगरम में जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (DCDRC) में केस कर दिया. शिकायतकर्ता ने सिस्टम के खराब परफॉर्मेंस और नेट मीटरिंग के लिए ज्‍यादा पैसे वसूलने का आरोप लगाया. आयोग ने पाया कि छत पर लगे सोलर सिस्टम ने इंस्टॉलेशन के समय दिए गए वादे के मुताबिक बिजली पैदा नहीं की. इससे उपभोक्ता को बिजली बिल पर होने वाली बचत का लाभ नहीं मिला.

आयोग का फैसला

सबूतों की समीक्षा के बाद आयोग ने आंशिक रूप से उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया. पैनल लगाने वाली रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को नेट मीटर लगाने के शुल्क के तौर पर लिए गए 1,765 रुपये वापस करने का निर्देश दिया. इसके अलावा, आयोग ने कंपनी को खराब सर्विस और उपभोक्ता को हुई मानसिक परेशानी के लिए मुआवजे के तौर पर 20,000 रुपये और कानूनी खर्च के लिए 3,500 रुपये देने का आदेश दिया. कुल मिलाकर 25,265 रुपये की रकम देने का आदेश दिया गया. मामले की सुनवाई प्रेसिडेंट रचिरजू वेंकटा नागासुंदर और सदस्य बंटुपल्ली श्रीदेवी और अशोक कुमार शर्मा की बेंच ने की. 

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आपको हमने ये केस इसलिए बताया ताकि अगर आपके साथ भी कोई कंपनी वादाखिलाफी करे तो केस ठोकने में देरी मत करना. 

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