9 जनवरी 2007 को सैन फ्रांसिस्को के 'मैकवर्ल्ड' (Macworld) में जब स्टीव जॉब्स ने पहला आईफोन दुनिया को दिखाया था. उस समय वो टेक की दुनिया का बहुत बड़ा इवेंट था. बिना सोशल मीडिया के भी आईफोन ने लॉन्च से पहले जलवा बना लिया था. कुछ ऐसा ही करने की कोशिश Temple के Founder & CEO दीपेंदर गोयल भी कर रहे हैं. आपने बिल्कुल सही समझा है. हम बात कर रहे हैं Temple डिवाइस की जिसे आपने क्रिकेटर शुभमन गिल (Shubman Gill) और इंडियन बैडमिंटन स्टार PV Sindhu की कनपटी पर लगाए देखा होगा. गोयल तो इसे पिछले कई महीने से चिपकाए घूम रहे.
यह Temple है क्या, जिसे माथे पर चिपकाए दिखे शुभमन गिल, वाकई करता है माइंड रीडिंग?
Temple नाम का यह डिवाइस Gravity Aging Hypothesis (GAH) कॉन्सेप्ट का हिस्सा है. पिछले कुछ दिनों से यह डिवाइस लगातार चर्चा में भी है. टीम इंडिया के कप्तान शुभमन गिल को भी Temple के साथ देखा गया है.

अब सवाल हमारे माथे में भी आ रहा है. आखिर ये Temple है क्या? क्या ये कोई फिटनेस ट्रेकर है, वेलनेस डिवाइस है या फिर कोई मेडिकल डिवाइस है? कनपटी पर चिपकता कैसे है. करता क्या है और डॉक्टर इसको लेकर चिंतित क्यों हैं. सारे जवाब यहां तलाशने की कोशिश करते हैं.
Temple डिवाइस की शुरुआत कैसे हुई?इसी साल जनवरी के महीने में दीपिंदर गोयल राज शमनी के पॉडकास्ट में नजर आए थे. राज शमनी के पॉडकास्ट में गोयल ने अपनी आंख के पास एक सिल्वर कलर का डिवाइस चिपकाया हुआ था. इसका नाम है Temple. तभी दुनिया को पता चला कि ये एक हेल्थ-टेक डिवाइस है. स्मार्टवॉच और स्मार्टरिंग का एडवांस वर्जन कह सकते हैं. Temple नाम का यह डिवाइस दिमाग में जाने वाले खून की सप्लाई को लगातार मॉनिटर कर सकता है. आसान भाषा में कहें तो एक छोटू सा MRI डिवाइस है, जो दिमाग की हरकतों को लगातार मॉनिटर कर सकता है.
Temple नाम का यह डिवाइस Gravity Aging Hypothesis (GAH) कॉन्सेप्ट का हिस्सा है. इसका मकसद इंसान की उम्र के बढ़ने, उसके दीर्घायु होने और हमेशा स्वस्थ रहने पर है. (GAH) के मुताबिक, इंसान की उम्र बढ़ने के पीछे ग्रेविटी का हाथ होता है. समय के साथ गुरुत्वाकर्षण मस्तिष्क में ब्लड फ्लो और दिमाग के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है.

जनवरी से आ गया नवंबर और अब Temple के प्री-ऑर्डर स्टार्ट हो चुके हैं. कंपनी का दावा है कि 85,000 रुपये कीमत वाले इस डिवाइस की बुकिंग स्टार्ट होते ही उनकी वेबसाइट क्रैश हो गई. जैसे हमने बताया, पहले इसे brain-health डिवाइस कहा जा रहा था. लेकि,न अब खुद गोयल ने साफ कर दिया है कि ये एक फिटनेस ट्रेकर और वेलनेस डिवाइस है. कोई मेडिकल डिवाइस नहीं. माने आप एक किस्म की एडवांस स्मार्टवॉच या बैंड जो ऐप्पल, Garmin, Oura और WHOOP जैसी कंपनियां पहले से बना रही हैं. बाकी कंपनियों भी ऐसे प्रोडक्ट बनाती हैं लेकिन जब फिटनेस ट्रेकिंग के टॉप स्केल की बात आएगी तो ऐप्पल वॉच अल्ट्रा, Garmin और WHOOP और Oura रिंग का नाम आएगा.

गोयल के मुताबिक, इस डिवाइस को एथलीट्स को ध्यान में रखकर बनाया गया है. माने हाई परफ़ोर्मेंस मॉनिटर करने के लिए. टेम्पल को कनपटी से चिपकाने के लिए ऐसे एडहेसिव का इस्तेमाल होता है जो पानी और पसीने से खराब नहीं होता. यह स्किन पर भी असर नहीं डालता. कनपटी में चिपकाने का भी कारण उन्होंने बताया है. गोयल ने बताया, ‘आपकी कनपटी एक मुख्य धमनी के ठीक ऊपर होती है. यह त्वचा का वह इकलौता हिस्सा है जहां तेज़ शारीरिक गतिविधि के दौरान भी रक्त प्रवाह कम नहीं होता.’ गोयल ने यह भी बताया कि शरीर के चार अलग-अलग हिस्सों पर एक ही सेंसर का परीक्षण किया. इन चारों में से, कनपटी पर सबसे सटीक परिणाम मिले.
साफ-साफ तो नहीं पता क्योंकि डिवाइस अभी महज कुछ ही यूजर्स के पास है. जो भी पता चला है वो गोयल ने या फिर इसके यूजर्स ने बताया है. माने अभी तक सब कुछ दावे की शक्ल में है. जैसे एक पोस्ट में उन्होंने बताया कि हार्ट रेट मॉनिटर करने में उनका डिवाइस ऐप्पल वॉच, फिटबिट, ओरा रिंग जैसे पांच डिवाइस से बेहतर है. दीपिंदर गोयल पहले ही क्लियर कर चुके हैं कि TEMPLE में फोटप्लेथिस्मोग्राफी (PPG) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया है. यह असल में एक ऑप्टिकल सेंसिंग टेक्नोलॉजी है और इसका इस्तेमाल Apple Watch के अंदर किया जाता है.

गोयल के मुताबिक, मस्तिष्क में रक्त प्रवाह को मापना और उसे बनाए रखना, हमारे समय के स्वास्थ्य और लंबी उम्र से जुड़े सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक हो सकता है. उन्हने एक पोस्ट में बताया था कि आपका दिमाग आपके रक्त प्रवाह का 20% हिस्सा इस्तेमाल करता है. यह आपके हार्मोन, नींद, रोग प्रतिरोधक क्षमता और शरीर की मरम्मत (रिपेयर) को नियंत्रित करता है. उम्र बढ़ने के साथ यह रक्त प्रवाह हर साल कम होता जाता है. आपने कभी इसे मापा भी नहीं है. यहां तक कि अस्पताल भी इसका केवल एक पल का ही स्नैपशॉट (तस्वीर) ले सकते हैं.

पोस्ट में 'ब्रेन फ्लो' (Brain Flow) के पीछे काम करने वाले टेम्पल वैज्ञानिकों का भी जिक्र किया था जिसमें डॉ. दिव्या गुलाटी (IISc), डॉ. संचित गुप्ता (IISc), डॉ. युक्ति चोपड़ा (SISSA Trieste) और नीतीश कुमार (IIT बॉम्बे) शामिल हैं. माने डिवाइस का फोकस 'ब्रेन फ्लो' मॉनिटर करना है. इसको पहन रही PV Sindhu ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा,
मैं खुद इसका इस्तेमाल कर रही हूं, और सच कहूँ तो यह वाकई एक गेम-चेंजर है!
मैं दीपी (गोयल) और उनकी टीम के साथ मिलकर काम कर रही हूं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि हम कैसे सबसे काम के मेट्रिक्स (आंकड़े) निकाल सकते हैं. सिंधु ने कहा कि सिर्फ मेरे लिए, बल्कि सभी एथलीट्स के लिए यह काम का है. जितना ज़्यादा मैं इसका इस्तेमाल करती हूं, उतना ही ज़्यादा मुझे उनके बनाए जा रहे इस टूल पर भरोसा होता जाता है. सच में, यह कमाल की बात है कि इतनी छोटी सी चीज़ इतनी असरदार हो सकती है!

Unacademy and Airlearn वाले गौरव मुंजाल ने भी इससे जुड़े अनुभव साझा किए हैं.
डॉक्टरों की चिंता क्या है?जब दुनिया ने TEMPLE के पहली बार दर्शन किए तभी से कई डॉक्टर इसके बारे में बोल चुके हैं. AIIMS के Dr. Datta ने अपनी एक्स पोस्ट में लिखा था कि ऐसे किसी डिवाइस और रिसर्च का कोई वैज्ञानिक आधार नहीं है. ऐसे डिवाइस सिर्फ अरबपतियों के काम आते हैं. सोशल मीडिया पर अच्छी खासी फैन फॉलोइनग रखने वाले TheLiverDoc इस डिवाइस को लेकर काफी मुखर हैं. उनका कहना है कि गोयल ने बिना किसी टेस्ट या प्रूफ के ऑर्डर लेना स्टार्ट कर दिए हैं जो गुमराह करने वाला है. हालांकि, गोयल ने अन्य वियरेबल डिवाइसों का हवाला देते हुए दावा किया है कि उन्होंने सभी प्रक्रिया फॉलो की है. 'वूप' (Whoop), 'ऐप्पल' (Apple), 'फिटबिट' (Fitbit) जैसी कंपनियों की तरह, बाजार में आने से पहले सारी रिसर्च की गई है.

TheLiverDoc के मुताबिक ये सरासर झूठ है क्योंकि ऐप्पल वॉच सीरीज़ 11 और फिटबिट सेंस के पास लॉन्च से पहले के सबसे मजबूत क्लिनिकल सबूत थे. ECG टूल को बाज़ार में लाने से पहले, ऐप्पल और फिटबिट ने FDA की मंज़ूरी पाने के लिए कई जगहों पर क्लिनिकल ट्रायल पूरे किए. फिटबिट सेंस 2 और एप्पल वॉच सीरीज़ 11 (42mm) को भी लॉन्च से पहले 400,000 लोगों पर की गई हार्ट स्टडीज़ के आधार पर तैयार किया गया था. फिटबिट सेंस 2, फिटबिट सेंस ब्लैक और फिटबिट सेंस लूनर व्हाइट/सॉफ्ट गोल्ड में FDA-मंज़ूरी प्राप्त ECG के साथ-साथ पसीने से जुड़े cEDA सेंसिंग की सुविधा भी शामिल है. इसी तरह, सैमसंग गैलेक्सी वॉच 8 क्लासिक और सैमसंग गैलेक्सी वॉच 9 ने भी रिलीज़ से पहले FDA के स्लीप एपनिया ट्रायल पास किए.
गोयल का जवाबदीपेंदर गोयल ने कल यानी 5 नवंबर को एक लंबा पोस्ट लिखकर इसका जवाब दिया है. उन्होंने लिखा,
अगर 'टेम्पल' कोई घोटाला होता या हमारी कही गई बातों में से कुछ भी सच न होता, तो लोग 'टेम्पल' का इस्तेमाल शुरू करने के कुछ ही दिनों में यह जान जाते. हमारे यहां 14 दिन की 'बिना किसी सवाल-जवाब के' रिटर्न पॉलिसी है (जो भारत में ऐप्पल भी नहीं देता). अगर प्रोडक्ट काम नहीं करता, तो वह शुरुआत में ही फेल हो जाएगा. कंपनी अपने R&D (रिसर्च और डेवलपमेंट) खर्च का दसवां हिस्सा भी वसूल नहीं कर पाएगी और बंद हो जाएगी.
हमने 'टेम्पल' बनाने में पहले ही 30 मिलियन डॉलर खर्च कर दिए हैं, जिसमें से 20 मिलियन डॉलर मेरे अपने पैसे हैं. कुछ हज़ार डिवाइस बेचने से इस निवेश का एक बहुत छोटा हिस्सा ही वापस मिल पाता है. ऐसा कोई घोटाला नहीं होता जिससे कुछ भी हासिल न हो. कोई भी व्यक्ति ऐसा घोटाला नहीं करेगा. चलिए जब डिवाइस ज्यादा यूजर्स के पास आएगा तो सब पता चल ही जाएगा.
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