ये बात ऐसे ही नहीं कही जाती कि गांव के प्रधान का चुनाव जीतना प्रधानमंत्री बनने जितना ही मुश्किल काम है. राजस्थान के कोटपूतली जिले के एक गांव ने तो यही साबित किया है. गुगलकोटा नाम के गांव में सरपंच का चुनाव हो रहा था. जीतने वाला 45 वोट से जीता. हारने वाले ने कहा कि गलत गिनती हुई है. आपत्ति के बाद फिर से गणना हुई. जीता हुआ प्रत्याशी फिर भी जीत गया. हारने वाले का मन नहीं माना. इसलिए तीसरी बार गिनती कराई गई. लेकिन नतीजा नहीं बदला. सिर्फ 45 वोटों के अंतर से जीत-हार तय हुई और फिर शुरू हो गया बवाल. हालात ऐसे खराब हुए कि पुलिस को पूरी फोर्स बुलानी पड़ गई.
सरपंच चुनाव में 3 बार वोट काउंट हुए, फिर भी 45 वोटों से हारे, चौथी बार सीधा पत्थर बरसे
राजस्थान के कोटपूतली-बहरोड़ जिले के गुगलकोटा गांव में सरपंच चुनाव का नतीजा तीन बार मतगणना के बाद भी नहीं बदला. चंदन मीणा ने महज 45 वोटों से जीत दर्ज की, लेकिन विपक्षी उम्मीदवार के समर्थकों ने कथित तौर पर पथराव कर दिया, जिसके बाद पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा.

राजस्थान में अलवर और जयपुर जिले से अलग होकर साल 2023 में एक नया जिला बना था. नाम हुआ कोटपूतली-बहरोड़. इस जिले में एक गांव गुगलकोटा है, जहां हाल ही में सरपंच का चुनाव हुआ. नतीजे आए तो दो प्रतिद्वंद्वियों में कांटे की टक्कर दिखी. जीत-हार का अंतर सिर्फ 45 वोटों का था. चंदन मीणा नाम के उम्मीदवार ने इस अंतर से सरपंच का चुनाव जीत लिया था. लेकिन नतीजा घोषित होते ही मौके पर विवाद हो गया. वोटों की गिनती होने के बाद चंदन मीणा के विपक्षी उम्मीदवार ने रिजल्ट पर आपत्ति जताई.
उनकी आपत्ति को संज्ञान में लेते हुए संबंधित अधिकारियों ने फिर से वोटों की गिनती की. नतीजे में कोई बदलाव नहीं हुआ. लेकिन विपक्ष आश्वस्त नहीं था. लिहाजा, तीसरी बार वोटों की गिनती की गई. तीनों बार की गणना में चंदन मीणा 45 वोटों से चुनाव जीत रहे थे. ऐसे में निर्वाचन प्रक्रिया के तहत चंदन मीणा को विजयी घोषित कर दिया गया.
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तीन बार मतगणना के बावजूद विपक्षी उम्मीदवार का असंतोष कम नहीं हुआ. इंडिया टुडे से जुड़े हिमांशु शर्मा की रिपोर्ट के मुताबिक, इसके बाद विपक्ष के लोगों की ओर से कथित तौर पर पथराव किया गया. इससे मौके पर हालात तनावपूर्ण हो गए. सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची. उसने लोगों को समझा-बुझाकर माहौल शांत कराने की कोशिश की. तीन बार वोटों की गिनती होने और उसके बाद भी बवाल होने की वजह से गुगलकोटा का सरपंच चुनाव में इलाके में चर्चा का विषय बन गया है.
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