क्या CCTV Camera को इस तरह लगाया जा सकता है कि वो किसी की निजता में दखल दे. क्या सीसीटीवी को इस तरह इंस्टाल किया जा सकता है कि वो पड़ोसी के घर में ताक-झांक करने लगे. सैद्धांतिक तौर पर नहीं और अब तो कानून की नजर में भी नहीं. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा है कि कोई भी व्यक्ति इस तरह से निजी सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा सकता जिससे उसके पड़ोसी की निजता में दखल पड़े. लेकिन इस आदेश में कई और बातें भी हैं, जिन्हें जान लेना जरूरी है.
पड़ोसी आपके घर की तरफ लगा सकता है CCTV कैमरा? जानें कानूनी नियम और अधिकार
अगर आपके पड़ोसी ने इस तरह से CCTV कैमरा लगाया है जिससे आपके घर के आने-जाने के रास्ते दिखते हैं, और इससे घर आने-जाने वाले लोगों की निजता (प्राइवेसी) में दखल पड़ता है. तो क्या यह उनकी निजता का उल्लंघन है. जानिए कोर्ट ने क्या कहा.

न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने कहा कि पड़ोसी के रिहायशी परिसर की इस तरह की निगरानी करना निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा. दरअसल हाई कोर्ट योगेंद्र मौर्य द्वारा दायर एक रिट याचिका पर सुनवाई कर रहा था. मौर्य का आरोप था कि उनके पड़ोसी ने इस तरह से CCTV कैमरा लगाया है जिससे उनके घर के आने-जाने के रास्ते दिखते हैं, और इससे घर आने-जाने वाले लोगों की निजता (प्राइवेसी) में दखल पड़ता है. उन्होंने तर्क दिया कि यह उनकी निजता का उल्लंघन है.
योगेंद्र मौर्य की याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने कहा,
"कोई भी निजी सीसीटीवी कैमरा इस तरह से नहीं लगाया जा सकता कि उससे किसी पड़ोसी की निजता में दखल पड़े."
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक अदालत से CCTV कैमरा हटाने के लिए कोई निर्देश जारी नहीं किया गया. इसके बजाय, याचिकाकर्ता को राहत के लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट के समक्ष उचित आवेदन दायर करने का निर्देश देते हुए रिट याचिका को बंद कर दिया गया. पीठ ने आगे निर्देश दिया कि यदि सीसीटीवी कैमरे हटाने के लिए ऐसा कोई आवेदन दायर किया जाता है, तो जिला मजिस्ट्रेट उस पर विचार करेंगे और एक महीने के भीतर निर्णय लेंगे.
सुप्रीम कोर्ट ने भी माना थाकुछ इसी तरह के एक और केस में कोलकाता उच्च न्यायालय के साझा घर के अंदर सीसीटीवी निगरानी के फैसले को बरकरार रखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने निजता के अधिकार की पुष्टि की थी. हालांकि ये मामला साझा घर में बिना सहमति के कैमरे लगाने का था. कलकत्ता उच्च न्यायालय ने फरवरी में फैसला सुनाया था कि सह-निवासियों की सहमति के बिना साझा पैतृक घर के आवासीय हिस्से के भीतर सीसीटीवी कैमरे लगाना और उनका संचालन करना भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत निजता के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है. 9 मई 2025 को न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और न्यायमूर्ति मनमोहन की सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका (SLP) को खारिज कर दिया और निजता के अधिकार की पुष्टि की थी.
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कैमरे हटाने के लिए नहीं कहा है. माने CCTV कैमरे लगाने पर कोई पूर्ण प्रतिबंध नहीं है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या उन्हें इस तरह लगाया जा सकता है जिससे किसी दूसरे घर पर नज़र रखी जा सके. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों का कहना है कि सुरक्षा अपनी जगह है, लेकिन कैमरे का रुख पड़ोसी के दरवाजे या घर की तरफ होना सुरक्षा नहीं, बल्कि 'निगरानी' (Surveillance) बन जाता है. ऐसे में पीड़ित व्यक्ति इसके खिलाफ जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत दर्ज करा सकता है या सिविल अदालत में इंजक्शन (रोक आदेश) के लिए अर्जी दे सकता है.
कैमरा लगाकर अगर किसी महिला की निगरानी की जा रही है या उसका पीछा किया जा रहा है, तो भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) अधिनियम, 2005 के प्रावधान भी लागू हो सकते हैं. इसके बाद विशिष्ट राहत अधिनियम (Specific Relief Act) के तहत अदालत से कैमरे को हटाने या उसका रुख बदलने का आदेश मांगा जा सकता है.
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कानूनों का मिला-जुला दायराभारत में निजी होमओनर्स के सीसीटीवी इस्तेमाल को लेकर कोई एक केंद्रीय कानून नहीं है. इसके बजाय कई कानून जैसे संविधान का अनुच्छेद 21, विशिष्ट राहत अधिनियम, सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC), IT एक्ट (धारा 66E), और भारतीय न्याय संहिता (धारा 77 व 79) एक साथ मिलकर काम करते हैं. डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 व्यक्तिगत या घरेलू उपयोग के लिए लगाए गए कैमरों को छूट देता है. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCT) दिल्ली में दिल्ली सीसीटीवी नियम, 2018 के तहत सार्वजनिक स्थानों पर कैमरे लगाने वाले मालिकों को कैमरों की संख्या, स्थान, उद्देश्य और डेटा स्टोरेज की जानकारी संबंधित अधिकारियों को देनी होती है.
कहने का मतलब कैमरा लगाने से कोई दिक्कत नहीं, लेकिन जो उससे आपके ऊपर निगरानी रखी जा रही या फिर आपकी निजता में ताक-झांक होने लगे और सामने वाला आपके कहने से नहीं माने तो आप जिला मजिस्ट्रेट के पास शिकायत कर सकते हैं.
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