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1 लाख का फोन 2 हफ्ते में खराब, अब सैमसंग, फ्लिपकार्ट, सर्विस सेंटर और सेलर सब देंगे मुआवजा

श्रीकांत थेक्कन ने 27 जनवरी 2024 को फ्लिपकार्ट से 1 लाख रुपये में Samsung Galaxy S23 Ultra 5G खरीदा. ये डिवाइस दो दिन बाद, 29 जनवरी को डिलीवर हुआ. इसमें लगभग तुरंत ही दिक्कतें आने लगीं. फोन ज़्यादा गर्म होने लगा और कैमरे की क्वालिटी भी वैसी नहीं थी जैसा सैमसंग ने दावा किया था.

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1 लाख का फोन दो हफ्ते में खराब

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  • Samsung Galaxy S23 Ultra 5G खरीदने के दो सप्ताह बाद फोन में ओवरहीटिंग और कैमरा खराबी की शिकायत आ गई, जिसके बाद उपभोक्ता ने सर्विस सेंटर और फ्लिपकार्ट से समाधान की कोशिश की।
  • फोन के खराब होने के बाद ग्राहक ने कई बार सर्विस सेंटर, फ्लिपकार्ट और कंपनी से संपर्क किया, लेकिन कोई समाधान नहीं मिलने पर उसने उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई।
  • कोर्ट ने चारों पक्षों को एक महीने में फोन मुफ्त मरम्मत करने या पैसे वापस करने, साथ ही मुआवज़ा और कानूनी खर्च देने का आदेश दिया।

Samsung Galaxy S23 Ultra 5G को एंड्रॉयड में स्मार्टफोन कहना उसकी बेइज्जती करने जैसा होगा. डिवाइस नहीं, बीस्ट है. सिर्फ एक कमजोर कड़ी है, इसकी बैटरी. बाकी सब शानदार जबरदस्त जिन्दाबाद. हर लिहाज से पैसा वसूल. हम और आप तो ऐसा कह सकते हैं मगर केरलम के श्रीकांत थेक्कन कहेंगे- सभी के लिए ऐसा नहीं होता. कभी-कभी एक लाख खर्च करके, लिया गया डिवाइस भी दर्द बन जाता है. दो हफ्ते में गर्म (1 lakh Samsung galaxy s23 ultra starts overheating within 2 week) होने लगता है. कंपनी नहीं सुनती और दर्द जब बढ़ जाता है फिर कंज्यूमर कमीशन ही सहारा बनता है. पेश है उपभोक्ता फोरम से एक और कंपनी पर जुर्माने की कहानी.

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1 लाख का फोन और दो हफ्ते

केरलम के कन्नूर जिले के कन्निरोड के रहने वाले श्रीकांत थेक्कन ने 27 जनवरी 2024 को फ्लिपकार्ट से 1 लाख रुपये में Samsung Galaxy S23 Ultra 5G खरीदा. ये डिवाइस दो दिन बाद, 29 जनवरी को डिलीवर हुआ. इसमें लगभग तुरंत ही दिक्कतें आने लगीं. फोन ज़्यादा गर्म होने लगा और कैमरे की क्वालिटी वैसी नहीं थी जैसा सैमसंग ने दावा किया था. इकोनॉमिक टाइम्स की खबर के मुताबिक डिलीवरी के सिर्फ 14 दिन बाद, 12 फरवरी 2024 तक, श्रीकांत कन्नूर में सैमसंग के अधिकृत सर्विस सेंटर 'ब्राइट केयर' पहुंच चुके थे.

सर्विस सेंटर का ड्रामा

सर्विस सेंटर ने फोन की जांच की, उनसे कहा कि फ़ोन का गर्म होना सामान्य है, सॉफ़्टवेयर अपडेट किया और फ़ोन वापस कर दिया. उन्होंने डिवाइस को बदला नहीं, क्योंकि उनका कहना था कि मैन्युफ़ैक्चरर की मंज़ूरी के बिना ऐसा करने का उन्हें अधिकार नहीं है. इसके बाद श्रीकांत ने फ्लिपकार्ट से संपर्क किया और वहां शिकायत दर्ज कराई. उससे भी कोई नतीजा नहीं निकला. दोनों तरफ से कोई समाधान न मिलने पर, उन्होंने फोन खरीदने के तीन महीने बाद, अप्रैल 2024 में कन्नूर ज़िला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराई. कोर्ट ने क्या किया वो जानने से पहले जरा तीनों पार्टियों की अजीब दलीलें पढ़ लीजिए.

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फ्लिपकार्ट की दलील 

फ्लिपकार्ट ने कहा कि वह सिर्फ़ एक मध्यस्थ प्लेटफॉर्म है और खरीदार के साथ उसका कोई सीधा संबंध नहीं है. कंपनी ने बताया कि असली सेलर CIGFIL लिमिटेड नाम की एक थर्ड-पार्टी कंपनी थी, और मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कोई भी खराबी ग्राहक और मैन्युफैक्चरर के बीच का मामला है.

सर्विस सेंटर की दलील

सैमसंग के अधिकृत सर्विस सेंटर, 'ब्राइट केयर' ने कहा कि वे सिर्फ़ 'डेड ऑन अराइवल' (DOA) सर्टिफ़िकेट ही जारी कर सकते हैं और असली रिप्लेसमेंट या रिपेयर का काम सेलर को ही करना होगा. उन्होंने यह भी कहा कि फोन का ज़्यादा गर्म होना (ओवरहीटिंग) नॉर्मल ही था.

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सैमसंग का अपना राग

सैमसंग इंडिया ने इस मामले पर बिल्कुल अलग रुख अपनाया. कंपनी का दावा था कि शिकायतकर्ता ने सेकंड-हैंड फ़ोन खरीदा था और वारंटी कार्ड देखे बिना वे किसी भी समस्या का समाधान नहीं कर सकते. उन्होंने यह भी तर्क दिया कि शिकायत में कमी थी क्योंकि असली विक्रेता को मामले में पक्षकार नहीं बनाया गया था. इसके बाद श्रीकांत ने सेलर, CIGFIL लिमिटेड को चौथी विरोधी पार्टी के तौर पर शामिल किया. CIGFIL ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वह सिर्फ़ दूसरों के बनाए प्रोडक्ट्स को दोबारा बेचने वाली कंपनी (रीसेलर) है. प्रोडक्ट की डिलीवरी होते ही उसकी भूमिका खत्म हो जाती है और प्रोडक्ट में कोई भी खराबी होने पर उसकी ज़िम्मेदारी मैन्युफैक्चरर की होती है, न कि उनकी.

कोर्ट ने चारों को सही कर दिया

कमीशन ने पाया कि किसी भी विरोधी पक्ष ने अपने दावों के समर्थन में कोई मौखिक या दस्तावेज़ी सबूत पेश नहीं किया. फिर चाहे वह दावा यह हो कि फोन  सेकंड हैंड था, खराबी वारंटी अवधि के बाद आई थी, या उनमें से कोई व्यक्तिगत रूप से ज़िम्मेदारी से मुक्त था. सभी चार पार्टियों को संयुक्त रूप से और अलग-अलग यह निर्देश दिया गया कि वे या तो कोर्ट ऑर्डर की तारीख से एक महीने के भीतर Samsung Galaxy S23 Ultra को मुफ्त में ठीक करें, या फिर शिकायतकर्ता को खरीद की पूरी कीमत यानी 1 लाख रुपये वापस करें. इसके अलावा, उन्हें आदेश मिलने के 30 दिनों के भीतर मानसिक परेशानी के लिए मुआवज़े के तौर पर 20,000 रुपये और कानूनी कार्यवाही के खर्च के लिए 7,000 रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया गया.

देख रहो हो विनोद, कैसे एक बार प्रोडक्ट बेच देने के बाद साब सब अपना पल्ला झाड़ लेते हैं. अच्छा है कोर्ट हाथ थामे रहता है. 

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