कुमार विश्वास के साथ खेल कहां हुआ
केजरीवाल और कुमार विश्वास की दोस्ती एक दिन में नहीं टूटी. एक-एक करके ईंटें सरकीं.
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3 जनवरी को आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्यसभा के अपने पत्ते खोले. एकाएक कुमार विश्वास और केजरीवाल की दोस्ती दीमक खाई लकड़ी जैसी नजर आने लगी. भरभराकर ढहकर धड़ाम. साफ हो गया कि पार्टी में विश्वास का कोई काम नहीं. ऐसे मौकों पर अक्सर कहावतें सूझती हैं. जैसे ये वाली- ताबूत में आखिरी कील. ये राज्यसभा की राह विश्वास और केजरीवाल के बीच धंसी वो ही आखिरी कील थी.
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