क्या ये टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे बेहतरीन रन आउट है?
ज़िम्बाब्वे इस रन आउट के दम पर श्री लंका से मैच जीत सकता है.
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फोटो - thelallantop
ज़िम्बाब्वे ने आखिरी बार विदेशी ज़मीन पर जब कोई टेस्ट मैच जीता था तब धोनी ने अपना पहला मैच नहीं खेला था, विराट कोहली स्कूल में पढ़ते थे, वसीम अकरम और वक़ार यूनिस पाकिस्तान के लिए बॉलिंग की ओपेनिंग करते थे, सचिन ने वन-डे में बस 10,000 रन ही बनाये थे, टी-20 क्रिकेट पैदा भी नहीं हुआ था और टोनी ग्रेग और रिची बेनॉड की आवाज़ सुनने को मिल जाया करती थी. आज ज़िम्बाब्वे की टीम श्री लंका के खिलाफ़ टेस्ट मैच खेल रही है. ज़िम्बाब्वे की टीम 262 रन से आगे है और अभी मैच के 2 दिन बाकी हैं. रिकॉर्ड्स कहते हैं कि 175 के ऊपर का स्कोर चेज़ करते हुए श्री लंका ने मात्र 3 बार ही कोई टेस्ट मैच जीता है जबकि ज़िम्बाब्वे ने 2000 के बाद से 200 रन से ऊपर का टार्गेट देकर कोई भी टेस्ट मैच हारा नहीं है. इसलिए सभी संकेत ज़िम्बाब्वे की जीत की ओर हैं. ऐसा नहीं है कि ज़िम्बाब्वे ने स्ट्रगल नहीं किया है. तीसरे दिन 59 पर 5 विकेट खोने के बाद दिन खतम किया 252 पर 6 विकेट के साथ. सिकंदर रज़ा की पीटर मूर और मैल्कम वॉलर के साथ बड़ी पार्टनरशिप्स ने ज़िम्बाब्वे के लिए बढ़िया ज़मीन तैयार कर दी है. इसके अलावा एक मौका जो इस मैच की हाइलाइट रहा है, वो है परेरा का रन आउट. परेरा 33 रन बनाकर रन आउट हुए. उन्हें मस्कंदा और वॉलर ने मिलकर रन आउट किया. इस रन आउट को 'टैग-टीम रन आउट' नाम दिया जा रहा है. क्रिस पोफू की बैक ऑफ़ द लेंथ गेंद को गुनारात्ने ने बैकवर्ड पॉइंट की ओर टैप किया और रन लेने के लिए दौड़ पड़े. गेंद मस्कंदा से दूर थीं जिसने पूरी लम्बाई की डाइव मारकर गेंद को रोका और गिरने के क्रम में ही वॉलर को गेंद फेंक दी. वॉलर ने गेंद तुरंत ही कीपर चकाब्वा को फेंक दी जिसने परेरा के क्रीज़ में घुसने से पहले ही गिल्लियां उड़ा दीं. ज़िम्बाब्वे की फील्डिंग को हल्के में लेने का ख़ामियाज़ा श्री लंका को भुगतना पड़ा. उनकी एक बढ़ती हुई पार्टनरशिप वहीं ख़त्म हो गई.
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