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होर्मुज नाकाबंदी से ईरान को रोज 45 हजार करोड़ का नुकसान? अमेरिका तो यही दावा कर रहा

ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर होने के बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. इस जंग में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है.

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पेंटागन की रिपोर्ट में दावा किया गया कि होर्मुज पर नाकाबंदी की वजह से ईरान को करोड़ों का नुकसान हो रहा. (फोटो-इंडिया टुडे)

ईरान-अमेरिका जंग की वजह से अमेरिका स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर लगातार नाकाबंदी कर रहा है. अमेरिका का दावा है कि इस नाकाबंदी की वजह से ईरान को रोज 4.8 बिलियन डॉलर का नुकसान हो रहा है. यानी भारतीय रुपयों में देखें तो ईरान को तकरीबन 45 हजार 557 करोड़ रुपये का घाटा रोज हो रहा है. यह दावा Axios की एक रिपोर्ट में किया गया है. बता दें कि ईरान-अमेरिका के बीच सीजफायर होने के बाद भी दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. 

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जंग में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को एक हथियार की तरह इस्तेमाल किया है. दोनों ही देश होर्मुज पर पूरी तरह से कंट्रोल का दावा कर रहे हैं. UNN ने पेंटागन के हवाले से बताया कि 13 अप्रैल को ऑपरेशन शुरू होने के बाद से US सेना ने तेल और अन्य प्रतिबंधित सामान ले जा रहे 40 से ज्यादा जहाजों का रास्ता बदल दिया है. US रक्षा विभाग का कहना है कि इस नाकाबंदी का मकसद तेहरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना है. साथ ही इस क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने के लिए उसे मिलने वाली फंडिंग की क्षमता को भी कम से कम यानी सीमित करना है.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन के प्रवक्ता सीन पार्नेल ने इस मामले इस गंभीर मामले पर प्रेस सचिव जोएल वाल्डेज के बयानों का हवाला दिया. उन्होंने कहा कि यह नाकाबंदी ‘पूरी ताकत से काम कर रही है’ और ईरान के फंडिंग नेटवर्क पर ‘गहरा असर’ भी डाल रही है.

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कयास लगाए जा रहा हैं कि आर्थिक दबाव बढ़ने की वजह से ईरान के नेतृत्व के भीतर भी फूट पड़ रही है. जानकारों का मानना है कि कुछ गुट अमेरिकी कार्रवाइयों के जवाब में तनाव बढ़ाने के पक्ष में हैं. जबकि, कुछ लोग इसे कम करने के पक्ष में हैं. साथ ही बातचीत के टेबल पर आने पर जोर दे रहे हैं. रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में विदेशी मुद्रा की कमी हो गई है. साथ ही जरूरी सामानों की राशनिंग भी की जा रही है. अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बहुत ही सख्त लहजे में बड़ा दावा कर दिया है. उन्होंने कहा कि होर्मुज पर पूरी तरह से वाशिंगटन का कंट्रोल है.

बेसेंट ने यह भी संकेत दिया कि होर्मुज पर अमेरिकी नेवी का कंट्रोल तब तक रहेगा, जब-तक की इस समुद्री मार्ग पर हालात पहले जैसे सामान्य नहीं हो जाते. वहीं, अमेरिका के ऐसे दावों पर ईरान की ओर से भी तीखी प्रतिक्रिया सामने आई. 

अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने सांसदों से कहा कि ईरान के साथ सीधी दुश्मनी खत्म हो गई. बावजूद इसके अमेरिका होर्मुज क्षेत्र में अपनी सैन्य स्थिति को और मजबूत करना जारी रखे है. दूसरी ओर तेहरान ने भी अमेरिका के साथ  बातचीत टेबल पर आने की अपनी तत्परता दिखाई है लेकिन शर्तों के साथ. ईरान ने इस बात पर खास जोर दिया है कि वह दबाव में आकर थोपी गई शर्तों को किसी भी हाल में स्वीकार नहीं करेगा.

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