
सचिन तेंदुलकर पर्थ की पिच को एवरेज बताने पर नाराज.
वजह है आईसीसी का एक फैसला. फैसला पर्थ स्टेडियम की पिच को ‘औसत’ रेटिंग देने का. ये वही मैदान है जहां भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच दूसरा टेस्ट मैच खेला गया था. मैच रैफरी रंजन मदुगले ने मैच के बाद इस पर्थ की पिच को औसत माने एवरेज करार दिया था. जो टेस्ट मैदानों की पिच और आउटफील्ड के लिए सबसे खराब रेटिंग है. इसे आसान भाषा में समझिए कि किसी को एग्जाम में 100 में 33 नंबर मिले हों. जस्ट पास. तो पर्थ को बस यही 33 नंबर वाली कैटिगरी में डाला गया है.
और ये फैसला सचिन को बिल्कुल पसंद नहीं आया है. उन्होंने इस फैसले की आलोचना एक ट्वीट में की. लिखा -
पिच की अहम भूमिका होती है... खासकर टेस्ट क्रिकेट में. टेस्ट क्रिकेट को फिर से स्थापित करने और इसे रोचक बनाने के लिए हमें चाहिए कि पर्थ जैसी और पिच बनाई जाएं, जिसमें बल्लेबाज और गेंदबाज दोनों के खेल कौशल की परीक्षा हो सके. उस पिच (पर्थ) को औसत कहने का कोई अर्थ नहीं.सचिन की बात देखा जाए तो एकदम ठीक है. वो टेस्ट मैच ही क्या जिसमें दोनों टीमें 800-800 रन बनाकर, बॉलरों के छक्के छुड़ाकर मैच ड्रॉ करवा दें. टेस्ट मैच तो पर्थ जैसा ही होना चाहिए. जहां बैट्समैन में दम हो तो वो विराट कोहली की तरह सेंचुरी मारे. बॉलरों में दम हो तो वो शमी जैसे एक इनिंग में 6 विकेट ले. आखिरी इनिंग तक लगे कि बाबा कोई भी जीत सकता है. हर सेशन के बाद मैच का रुख बदलता नजर आए. जो पर्थ टेस्ट में भरपूर नजर आया. भारत को जब दूसरी इनिंग में 287 रनों का टार्गेट मिला तो किसी ने नहीं माना था कि भारत हारेगा. खैर भारत हारा.
पर हार-जीत तो लगी रहेगी. पर इस बात से कोई इनकार नहीं कर सकता कि मैच था मजेदार. 40 के 40 विकेट गिरे. दोनों टीमों की पूरी चल्ला आई. कोई बैट्समैन नाराज नहीं हुआ होगा कि उसकी बैटिंग नहीं आई. और हमारी आपकी सांसें अटकी रहीं. तगड़ा वाला कॉम्पिटिशन. कुछ ऐसे ही कॉम्पिटिशन की बात सचिन तेंडुलकर भी कर रहे हैं. इसी वजह से वो पर्थ को खराब पिच कहे जाने पर नाराज हैं. किसी को भी होना चाहिए.
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व टेस्ट क्रिकेटर मिशेल जॉनसन और इंग्लैंड के पूर्व कप्तान माइकल वॉन भी आईसीसी की इस हरकत से नाराज हैं. उन्होंने भी आईसीसी की आलोचना की है. जॉनसन ने ट्विटर पर लिखा -
पिच में कोई खराबी नहीं थी. बल्ले और गेंद के बीच जंग देखकर अच्छा लगा. आम तौर पर बेजान सपाट पिचें देखने को मिलती हैं. मैं जानना चाहता हूं कि अच्छी पिच क्या होती है. उम्मीद है कि एमसीजी पर भी टेस्ट रोमांचक होगा.इसके अलावा वॉन ने ट्वीट कर बोला था कि -
और फिर वे हैरान होते हैं कि टेस्ट क्रिकेट खराब दौर से क्यों जूझ रहा है. यह बेहतरीन पिच थी जिस पर सभी को मदद मिली. इस तरह की और पिचें होनी चाहिए.इतनी पिच और रेटिंग की बात कर रहे हैं तो थोड़ा नियम कानून भी जान लीजिए -
आईसीसी हर मैच. माने चाहे टी20 हो, वनडे हो या टेस्ट. मैच खत्म होने के बाद उस मैदान की पिच का मुआयना करवाती है. ताकि उसे रेटिंग दी जा सके कि पिच कैसी थी. रेटिंग की 6 कैटिगरी हैं.
1. वैरी गुड 2. गुड 3. एवरेज 4. बिलो एवरेज 5. पुअर 6. अनफिटइन कैटिगरीज में वैरीगुड और गुड तो क्लास में आगे बैठने वाले पढ़ाकू बच्चों की तरह हैं. जिनके 90 पर्सेंट से नीचे नंबर ही नहीं आता. और एवरेज तो जैसा पहले ही बताया. खींच के पास होने वाले स्टूडेंट. फिर आते हैं स्कूल के वो लड़के जिनके लिए स्कूल की क्लास टाइमपास का जरिया है. बिलो एवरेज, पुअर और अनफिट. ये रेटिंग देने का काम करते हैं मैच के रेफरी. जैसे पर्थ टेस्ट में ये काम किया रंजन मदुगले ने. ये रेटिंग फिर जिस बोर्ड का मैदान होता है, उसे फीडबैक के तौर पर दिया जाता है. ताकि वो आने वाले मैचों में अपनी पिच और आउटफील्ड में जरूरी बदलाव कर सकें. फिर अगर किसी पिच को पुअर या अनफिट की रेटिंग मिल जाए तो संबंधित बोर्ड को इसका जवाब भी देना पड़ता है. ठीक वैसे ही जैसे फेल होने पर आपके टीचर पैरंट्स को बुलावा भेज देते हैं. इसके अलावा इसमें जुर्माने का भी प्रावधान हैं.
पर्थ क्रिकेट स्टेडियम
तो ये हो गया सारा गुणा गणित पिच और उसकी रेटिंग का. देखने वाला होगा कि पर्थ की पिच की एवरेज रेटिंग के बाद जो विवाद खड़ा हुआ है. उसका अंजाम क्या होता है. क्या आईसीसी इन बड़े-बड़े क्रिकेटर्स की आलोचना का संज्ञान लेती है या नहीं.
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