साल 2010, भारत के खेल इतिहास में बेहद खास जगह रखता है. भारत ने इस साल कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की. नई दिल्ली में इंटरनेशनल खिलाड़ियों का जमावड़ा लगा. दुनिया भर की नजरें 15 दिन तक भारत पर टिकी रही. भारतीय खिलाड़ियों ने भी घरेलू समर्थन का पूरा फायदा उठाया, नतीजा यह रहा कि भारत ने अपने इतिहास का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया. मेडल्स का शतक लगा दिया. इसके बाद भी हर कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय खिलाड़ी इसी तरह उम्दा प्रदर्शन करते रहे और यह टूर्नामेंट देश के लिए 'मेडल फेस्ट' बन गया.
कॉमनवेल्थ गेम्स में इस बार क्यों कम हो जाएंगे भारत के मेडल्स? ये है असली वजह
भारतीय एथलीट कॉमनवेल्थ गेम्स में भर-भर के मेडल लाते हैं. इस साल यह गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त के बीच ग्लासगो में आयोजित होंगे. भारत के 126 खिलाड़ियों का दल हिस्सा लेने ग्लासगो जा रहा है. लेकिन, इस बार भारत के खाते में मेडल हर बार से कम होंगे.


चार साल में एक बार आयोजित होने वाले खेलों में भारतीय एथलीट भर-भर के मेडल लाते हैं. यह साल भी कॉमनवेल्थ गेम्स का साल है. इस बार यह गेम्स 23 जुलाई से 2 अगस्त के बीच ग्लासगो में आयोजित होंगे. भारत के 126 खिलाड़ियों का दल हिस्सा लेने ग्लासगो जा रहा है. लेकिन, इस बार भारत के खाते में मेडल हर बार से कम होंगे. और यह गेम्स शुरू होने से बहुत पहले ही तय हो गया था. हम आपको इसका कारण बताते हैं.
क्यों कम होंगे मेडल?भारत के मेडल कम होने का कारण है, कॉमनवेल्थ गेम्स में खेलों का कम होना. आमतौर पर कॉमनवेल्थ गेम्स में लगभग 20 खेलों के इवेंट्स होते हैं. लेकिन इस बार यह संख्या घटकर 10 हो गई है. जिन खेलों को हटाया गया है, उसमें ज्यादातर वही खेल हैं जिसमें भारतीय खिलाड़ी शानदार प्रदर्शन करते आ रहे हैं.
ग्लासगो के इवेंट्स
ग्लासगो गेम्स के प्रोग्राम में एथलेटिक्स, स्विमिंग, ट्रैक साइक्लिंग, वेटलिफ्टिंग, 3x3 बास्केटबॉल, लॉन बॉल्स, नेटबॉल, आर्टिस्टिक जिम्नास्टिक्स, जूडो और बॉक्सिंग को शामिल गया है. भारत के लिहाज से बात करें तो वेटलिफ्टिंग, एथलेटिक्स और बॉक्सिंग वह खेल हैं, जिसमें ज्यादा मेडल की उम्मीद कर सकते हैं. बाकी खेलों में भारत का रिकॉर्ड बहुत शानदार नहीं है.
भारत को हुआ कितना नुकसानअब आपको बताते हैं कि किन खेलों को इस बार हटाया गया है. कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में रेसलिंग, बैडमिंटन, हॉकी, स्क्वाश, क्रिकेट, टेबल टेनिस, बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन को हटाया गया है. बर्मिंघम में हुए पिछले कॉमनवेल्थ गेम्स में भारत ने बीच वॉलीबॉल और रग्बी सेवन को छोड़कर बाकी सभी खेलों में हिस्सा लिया और मेडल भी जीते. भारत के लिए यह खेल कितने अहम हैं, इसका अंदाजा इस बात से लगा लीजिए कि बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए जो 210 खिलाड़ी गए थे, उसमें से 98 खिलाड़ी इन खेलों से जुड़े थे. यानी बर्मिंघम के दल के 47 प्रतिशत एथलीट इस बार कॉमनवेल्थ गेम्स में होंगे ही नहीं.
अब इन खेलों के मेडल टैली पर असर को लेकर बात करते हैं. भारत ने कुल मिलाकर 61 मेडल्स जीते थे. इसमें से 30 मेडल्स उन खेलों में आए थे, जिन्हें इस बार हटा दिया गया है. इसमें बैडमिंटन में 2, क्रिकेट में 1, स्क्वाश में 2, टेबल टेनिस में 7 और रेसलिंग में 12 मेडल मिले थे. यानी इन 30 इवेंट्स में भारत मेडल की दावेदारी भी पेश नहीं कर पाएगा.
इस बार किन खेलों से उम्मीदअब उन खेलों की बात करें लेते हैं जो कि इस बार गेम्स का हिस्सा हैं. भारत को 2022 के बर्मिंघम गेम्स में बॉक्सिंग में सात, जुडो में 3, वेटलिफ्टिंग में 10, एथलेटिक्स में 8, लॉन बॉल में दो और पैरा पावरलिफ्टिंग में एक मेडल मिला था. कुल मिलाकर 31 मेडल. इस बार भी मेडल संख्या के इसी के आसपास रहने की उम्मीद है.
बात सिर्फ मेडल्स की ही नहीं है. फैंस के लिए बुरी खबर यह है कि इन इवेंट्स के बाहर होने से कई बड़े नाम भी टूर्नामेंट से बाहर रहेंगे. बैडमिंटन में पीवी सिंधु, लक्ष्य सेन, सात्विक चिराग जैसे स्टार हर कॉमनवेल्थ गेम्स के हाईलाइट्स होते थे. वहीं रेसलिंग में तो स्टार बनते ही कॉमनवेल्थ गेम्स से हैं. ओलंपिक मेडलिस्ट अमन सेहरावत, रवि दहिया, वर्ल्ड चैंपियनशिप मेडलिस्ट अंतिम पंघाल को देखने के लिए फैंस को एशियन गेम्स का इंतजार करना होगा.
बीते कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला क्रिकेट ने एक दर्शक वर्ग को अपनी ओर खींचा था और भारत का लगभग एक मेडल पक्का माना जा रहा था. इस बार टेबल टेनिस के दिग्गज खिलाड़ी भी कॉमनवेल्थ में नहीं दिखेंगे. वहीं ओलंपिक मेडलिस्ट पुरुष हॉकी टीम के लिए लिहाज से भी यह टूर्नामेंट हमेशा काफी अहम रहा है. यानी बड़े नामों और इन इवेंट्स का हटना व्यूअरशिप पर भी असर डालेगा.
खिलाड़ियों को कई नुकसानकॉमनवेल्थ गेम्स खिलाड़ियों के लिए सिर्फ मेडल के लिहाज से अहम नहीं है. इन मेडल्स के साथ खिलाडि़यों को अपने राज्य की तरफ से प्राइज मनी, सरकारी नौकरी, और उसमें प्रमोशन जैसे कई फायदे मिलते हैं. इस पैसे उन्हें अपना करियर और आगे की जिंदगी क आसान करने में मदद मिलती थी. कई ऐसे खेल हैं जिसमें एशियन गेम्स में प्रतियोगिता का स्तर काफी ऊंचा होता है, जैसे रेसलिंग, बैडमिंटन, टेबल टेनिस, ऐसे खिलाड़ियों के लिए सरकारी नौकरी और आर्थिक मदद के लिए लिहाज से यह गेम्स काफी अहम होते हैं.
सिर्फ पैसे ही नहीं कॉमनवेल्थ गेम्स को हमेशा से नई प्रतिभाओं के उभरने का मंच माना जाता रहा है. नीरज चोपड़ा, विनेश फोगाट, बजरंग पूनिया, मनु भाकर जैसे कई ऐसे स्टार हैं जिम्होंने सबसे पहले कॉमनवेल्थ गेम्स में ही मेडल जीतकर सुर्खियां बटोरी थी. स्क्वाश के लिए तो कॉमनवेल्थ गेम्स ही सबसे बड़ा टूर्नामेंट होता था. जिसके लिए खिलाड़ी महीनों से तैयारी में लग जाते थे. स्क्वाश के ओलंपिक में शामिल होने से पहले खिलाड़ियों के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स में मेडल जीतना सबसे बड़ा सपना हुआ करता था.
क्यों कम हुए हैं इवेंट्स?अब आते हैं इस वजह पर कि आखिर इस बार इवेंट कम हुए क्यों हैं? पहले कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की मेज़बानी ऑस्ट्रेलिया के विक्टोरिया राज्य को करनी थी. लेकिन, 2024 में विक्टोरिया ने इस फैसले से पीछे हटने का फैसला किया. उन्होंने कारण दिया कि खेलों में लागत बढ़ने के कारण उन्होंने इससे हाथ खींच लिया. उनके पास खेल आयोजित करने के लिए जरूरी फंड नहीं हैं. कॉमनवेल्थ फेडरेशन मुश्किल में पड़ गई. गेम्स के आयोजन से ठीक दो साल पहले एक नया दावेदार लाना उनके लिए आसान नहीं था.
यह भी पढ़ें- कोहली-गिल के बीच लंबी चर्चा हुई, शुभमन ने 2027 वर्ल्ड कप का जिक्र क्यों किया?
उन्होंने तलाश शुरू की और यह तलाश स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आकर खत्म हुई. लेकिन, ग्लासगो ने भी शर्त रखी. आखिरी समय में मेजबान बनने के कारण उनके पास बजट की कमी थी. वह केवल उन ही खेलों को आयोजित कर सकते थे, जिनके लिए वेन्यू उनके पास पहले से ही मौजूद हैं. सिर्फ़ चार जगहों के उपलब्ध होने के कारण, सुविधाओं की कमी की वजह से कई खेलों को इसमें शामिल नहीं किया जा सका. इसी कारण उन्होंने खेलों की संख्या कम कर दी. सिर्फ यही नहीं एथलीट व स्टाफ़ को नए CWG विलेज के बजाय मौजूदा होटलों में ठहराने का भी फैसला किया. हालांकि, भारतीय एथलीट के लिए अच्छी खबर यह है कि अगले कॉमनवेल्थ गेम्स भारत में ही आयोजित होने हैं. भारत 15 से 17 खेलों को शामिल करेगा जिसमें मुख्य रूप से वह खेल होंगे, जिसमें भारत के मेडल की संभावना सबसे ज्यादा होगी.
वीडियो: भारत बनाम इंग्लैंड के मैच में क्या हुआ?











