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महिला एथीलट्स के सेक्सुअलाइज्ड फोटोज, वीडियोज अब नहीं निकाल सकेंगे कैमरामैन!

कई खेलों के ब्रॉडकास्टिंग में, खास कैमरा एंगल और एडिटिंग के तरीकों से महिला खिलाड़ियों का sexualisation एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है. इसे लेकर अब बड़ा फैसला किया गया है.

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महिला एथलीट्स के लिए लिया गया बड़ा कदम. (Photo-AP)

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  • यूरोपियन ब्रॉडकास्टिंग यूनियन (EBU) ने महिला एथलीट्स की मीडिया कवरेज के लिए नई गाइडलाइंस 'Raising the Bar' जारी की हैं, जिसमें सेक्सुलाइज़ कैमरा एंगल और अनावश्यक स्लो मोशन वीडियो पर बैन लगाया गया है।
  • महिला एथलीट्स की तस्वीरें और वीडियो अक्सर ऐसे कैमरा एंगल से लिए जाते हैं जो उनके शरीर के कुछ हिस्सों पर अनावश्यक फोकस करते हैं, जिसके कारण वे और दर्शक दोनों असहज महसूस करते हैं।
  • नई गाइडलाइंस 113 देशों के सार्वजनिक मीडिया में लागू होंगी, जिससे महिला एथलीट्स की सुरक्षा बढ़ेगी और आने वाले समय में उनकी ब्रॉडकास्टिंग के तरीके में सुधार होने की उम्मीद है।

महिला एथलीट होना आसान नहीं है. यह बात कई बार कई दिग्गज एथलीट्स ने कही है. और यह वाक्य सिर्फ मैदान पर पीरियड्स पेन, मैटरनिटी ब्रेक तक सीमित नहीं है, यह एक्शन के दौरान खुद के गलत तरीके से कैप्चर होने जैसी चीजों पर भी लागू होता है. अलग-अलग खेलों में कई बार महिला एथलीट्स ने बताया कि जिस तरह उनकी तस्वीरें खिंची जाती हैं, उनके वीडियो स्लो मोशन में दिखाए जाते हैं. इससे वह सहज महसूस नहीं करती हैं. यह मुद्दा उठा तो कई बार, लेकिन इसे लेकर एक्शन पहली बार हुआ है. और पहला कदम उठाया है यूरोपियन ब्रॉडकास्टिंग यूनियन ने.

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EBU की नई गाइडलाइंस 

EBU में 113 देश शामिल हैं. इसे दुनिया का सबसे बड़ा पब्लिक सर्विस मीडिया अलायंस माना जाता है. एथलेटिक्स की कवरेज के लिए नई गाइडलाइंस जारी की है. नई गाइडलाइंस को '“Raising the Bar”, नाम दिया गया है. इस गाइडलाइंस में साफ कहा गया है कि महिला एथलीट्स को सेक्सुलाइज़ कैमरा एंगल से शूट नहीं किया जाएगा. न ही उनके स्लो मोशन वीडियो रीप्ले होंगे. EBU के एक्सिक्यूटिव डायरेक्टर ग्लेन किलेन ने कहा,

कई खेलों के ब्रॉडकास्टिंग में, खास कैमरा एंगल और एडिटिंग के तरीकों से महिला खिलाड़ियों का sexualisation एक बड़ी चिंता का कारण बना हुआ है.  आज कल महिलाओं के एथलेटिक्स इवेंट्स की मीडिया कवरेज में कुछ ऐसी बातें देखने को मिलती हैं को कि गैर जरूरी होती हैं. जैसे कि शरीर पर देर तक टिके रहने वाले शॉट्स, नीचे के एंगल से लिए गए ऐसे शॉट्स जो शरीर के कुछ हिस्सों को साफ़ दिखाते हैं, और ज़रूरत से ज़्यादा स्लो-मोशन रीप्ले जिनका कोई टेक्निकल या स्टोरीटेलिंग  मकसद नहीं होता.

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EBU द्वारा जारी की गई तस्वीर जिसमें बताया गया है कि किस एंगल की इजाजत है और किसकी नहीं. (फोटो- au.com)
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EBU द्वारा जारी की गई तस्वीर जिसमें बताया गया है कि किस एंगल की इजाजत है और किसकी नहीं. (फोटो- au.com)

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महिला एथलीट्स से ली गई सलाह

इन गाइडलाइंस से पहले कई महिला एथलीट्स से बात की गई. इसमें ओलंपिक एथलीट हॉली ब्रैडशॉ, इवाना स्पेनोविक और ब्लांका व्लासिक जैसी एथलीट्स से भी बात की. पोल वॉल्टर ओलंपिक मेडलिस्ट ब्रैडशॉ ने कहा कि जिस तरह उनके इवेंट की लाइव ब्रॉडकास्टिंग की जाती है, वह कई बार ठीक नहीं होती. इससे सिर्फ एथलीट ही नहीं बल्कि देखने वाली महिलाओं पर भी गलत असर पड़ता है. उन्होंने बताया कि वह खुद कई बार सोशल मीडिया पर इस तरह के एब्यूज का शिकार हो चुकी है. उनके वीडियोज को स्लो मोशन में गलत तरीके से इस्तेमाल किया गया है. एथलीट खेलते समय अपने इवेंट को एंजॉय करना चाहते हैं. वह नहीं चाहते हैं कि वह उस दौरान अपनी फुटेज को लेकर असहज या टेंशन में रहें.  

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