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7 साल पहले जब कैप्टन कूल ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अंपायरों पर गर्म हो गए थे

राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच में भी यही हुआ.

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ब्रिसबेन वन-डे में धोनी अंपायर से बातचीत करते हुए.
आईपीएल 2019. टूर्नामेंट का 25वां मैच जिसे चेन्नई सुपर किंग्स ने राजस्थान के ख़िलाफ़ जीत लिया. लेकिन इस मैच के बारे में चेन्नई की जीत की बात कम और धोनी की बात ज़्यादा हो रही है. इसकी वजह है एक बॉल जो पहले नो-बॉल करार दी गई और फिर उसे लीगल डिलीवरी कह दिया गया. इसके बाद दुनिया को एक अलग किस्म का महेंद्र सिंह धोनी देखने को मिला. गुस्से से तमतमाया महेंद्र सिंह धोनी जो कि आउट हो चुकने के बाद भी मैदान में घुस गया और जाकर अम्पायर्स से बहस करने लगा. और इस पूरे प्रकरण के बाद धोनी को सज़ा मिली है और उनकी 50 फीसदी मैच फ़ीस काट ली गयी है.
मामला आख़िरी ओवर का था जिसमें चेन्नई को जीतने के लिए 18 रन चाहिये थे. ओवर की चौथी गेंद पर बेन स्टोक्स ने एक यॉर्कर फेंकनी चाही लेकिन वो फ़ुल-टॉस बन गई. फ़ुल-टॉस भी ऐसी कि नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े अम्पायर को नो-बॉल लगी. उन्होंने गेंद फेंके जाने के साथ ही नो-बॉल का सिगनल दे दिया. सभी को लगा कि नो-बॉल है. मैदान में नो-बॉल वाला सायरन भी बज गया. लेकिन तभी नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े अम्पायर उल्हास गांधे ने लेग अम्पायर ब्रूस ऑग्ज़ेनफ़ोर्ड की तरफ़ देखा. उन्होंने साफ़ किया कि उनकी ओर से नो-बॉल का कोई सिग्नल नहीं दिया गया है. ऐसे में स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े उल्हास को अपना फ़ैसला बदलना पड़ा. क्यूंकि क्रिकेट के नियमों के मुताबिक़ हाइट की नो-बॉल देने के अधिकार सिर्फ़ लेग-अम्पायर के ही पास है. अगर उसे हाइट की नो-बॉल नहीं लगती है तो स्ट्राइकिंग एंड पर खड़ा अम्पायर नो-बॉल नहीं दे सकता. इस वजह से नो बॉल कैंसिल कर दी गई और उसे लीगल डिलीवरी घोषित किया गया.
धोनी मैदान में घुस आए और अम्पायरों से बहस करने लगे
धोनी मैदान में घुस आए और अम्पायरों से बहस करने लगे

सारे फ़साद की जड़ यही फ़ैसला था. चेन्नई का मैच फंसा हुआ था. उन्हें एक एक्स्ट्रा बॉल और फ्री हिट मिल रही थी. जब आपको 2 गेंदों में 6 रन चाहिए हों और एक फ्री हिट मिल रही हो तो आप इस मौके को हाथों हाथ लेना चाहेंगे. लेकिन यहां चेन्नई को ये मौका हाथ से निकलता हुआ दिखाई दे रहा था. ऐसे में धोनी भी भन्ना गये. वो बाउंड्री पार से खड़े होकर पहले तो चिल्लाये और फिर बीच मैदान में चले आये जहां अम्पायरों से उन्होंने बहस की. अम्पायर ब्रूस ऑग्ज़ेनफ़ोर्ड ने उन्हें नियम बताये और धोनी को चलता किया. चेन्नई ने दो गेंद बाद मैच जीत लिया. इसके बाद धोनी को मैच रेफ़री ने तलब किया और उन्हें आईपीएल के कोड ऑफ़ कंडक्ट के आर्टिकल 2.20 के तहत लेवल 2 के offence का चार्ज लगाया. धोनी ने इसे स्वीकार किया.
खैर, ये बात थी 2019 की. यानी काफ़ी ताज़ी बात. लेकिन एक दफ़ा और ऐसा हुआ है जब कैप्टन कूल कहे जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी अम्पायरिंग की गड़बड़ी के चलते अम्पायरों पर भड़क गए थे. ये वाकया है एक वन-डे इंटरनेशनल के दौरान का जो कि खेला जा रहा था ऑस्ट्रेलिया में. साल 2012. ब्रिसबेन में इंडिया और ऑस्ट्रेलिया का मैच चल रहा था. ऑस्ट्रेलिया ने पहले बैटिंग करनी चुनी और अच्छी बैटिंग कर रही थी. मुद्दा है 29वें ओवर का. सुरेश रैना के हाथ में गेंद थी और ओवर की तीसरी बॉल पर ड्राइव खेलने के चक्कर में हसी थोड़ा सा आगे बढ़े और गेंद कनेक्ट नहीं हुई. उन्होंने तुरंत ही अपना पैर पीछे किया लेकिन धोनी ने तब तक गिल्लियां उड़ा दीं. स्टम्पिंग की अपील हुई और टीवी रीप्ले में हसी के जूते का छोटा सा हिस्सा लाइन के पीछे दिखाई दे रहा था. अम्पायर ने अपना फ़ैसला सुनाया और मैदान में लगी बड़ी सी स्क्रीन पर लिखा था - OUT.
मैदान में मौजूद इंडिया को सपोर्ट करने वाली जनता चीख रही थी. ऑस्ट्रेलिया का विकेट गिर चुका था. लेकिन इतनी देर में अम्पायर स्टीव डेविस उन्हें बुलाने लगे. शोर की वजह से हसी को ठीक से सुनाई नहीं दिया तो अम्पायर बिली बाऊडन उनके पास पहुंचे और उन्हें ख़बर दी कि थर्ड अम्पायर ने असल में ग़लत बटन दबा दिया था. हसी नॉट-आउट थे. अब ऑस्ट्रेलिया की जनता शोर मचा रही थी.
लेकिन इसी दौरान महेंद्र सिंह धोनी का पारा हाई हो गया. वो तुरंत अम्पायरों के पास पहुंचे. उनसे बात की. धोनी जिस लहज़े में बात करते दिख रहे थे, उसे सिर्फ़ बात करना नहीं कहा जाएगा. साफ़ दिखाई दे रहा था कि धोनी अम्पायरों के इस पूरे कार्यक्रम से ख़ुश नहीं थे. लेकिन अम्पायर्स भी उनसे कहते तो क्या. ये एक 'ह्यूमन एरर' थी जो कि किसी से भी हो सकती थी. इस बार थर्ड अम्पायर से हो गई.
उस वाकये का वीडियो देखिए.

2012 की उस घटना और आईपीएल 2019 में हुई दोनों ही घटनाएं इसी 'ह्यूमन एरर' का नतीज़ा हैं. धोनी दोनों ही केस में रिसीविंग एंड पर थे. हालांकि 2012 में उन्होंने मैच हारा था लेकिन आईपीएल में उन्होंने मैच जीत लिया था. दोनों जगह वही कप्तान थे. और दोनों ही जगह उनकी आपत्ति गैर वाजिब मालूम पड़ रही थी. आईपीएल में उनका मैदान में घुस जाना और अम्पायरों से बहस करना काफ़ी भद्दी तस्वीर पेश कर रहा था. एक कप्तान के तौर पर या किसी भी हैसियत से उन्हें कोई भी हक़ नहीं है कि वो मैदान में यूं घुसें और जाकर अम्पायरों से बहसबाज़ी करते हुए उन पर एक पर्टिकुलर फ़ैसला देने का दबाव डालें. अगर उन्हें अपने पक्ष में फ़ैसला नहीं चाहिए था तो वो न जाने क्यूं बीच गेम में घुस गए थे. हालांकि इसके चांसेज़ तो कम ही हैं. खैर, अच्छी बात ये है कि धोनी ने अपनी गलती स्वीकारी है. और अच्छी बात ये भी है कि आदमजात को ये भी मालूम पड़ गया कि 'हीट ऑफ़ द मोमेंट' में धोनी भी गलती कर सकते हैं.


वीडियो- CSK vs RR: आख़िरी ओवर में क्यों एक नो बॉल पर गुस्साए धोनी?

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