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जिस तरह गोविंदा और करिश्मा के बीच करेंट पास हुआ, वैसे ही काम करता है LED

और हां, LED का मतलब बल्ब नहीं होता.

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फोटो - thelallantop
खबर मिली है कि देश का सबसे बड़ा LED स्ट्रीट लाइट अभियान पूरा हो गया है. ये स्ट्रीट लाइट प्रोजेक्ट सोमवार को केन्द्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने देश को डेडीकेट किया. होता ये है कि हम मान लेते हैं कि LED किसी प्रकार का बल्ब होता है. जो कि कतई सच नहीं है. LED होता क्या है, क्यूं होता है और कैसे होता है, बताते हैं.
LED माने Light Emitting Diode. यानी LED असल में एक डायोड होता है. डायोड क्या होता है? साइकिल के टायर में एक छुच्छी लगती है. पढ़े-लिखे लोग उसे वॉल्व कहते हैं. छुच्छी ये काम करती है कि जब पम्प से हवा भरो तो हवा टायर ट्यूब के अंदर चली जाती है. मगर जब पंप वापस भरो तो हवा बाहर नहीं निकल पाती. डायोड भी एक छुच्छी की तरह काम करता है. एक वॉल्व की तरह. डायोड एक इलेक्ट्रॉनिक छुच्छी है. इलेक्ट्रॉनिक वॉल्व. जो एक दिशा में बहने वाले करेंट को तो बहने देता है जबकि दूसरी दिशा में बहने वाले करेंट को रोक लेता है.
ऐसी ही एक डायोड होती है, जिससे रोशनी निकलती है. उसे LED कहते हैं. कैसे निकलती है एक डायोड से रोशनी? डायोड में दो प्लेटें होती हैं. ठीक वैसे जैसे फिल्म में एक हीरो होता है और एक हीरोइन. दोनों के अपने-अपने चार्ज होते हैं. ठीक वैसे जैसे हीरो के अपने हालात होते हैं और हीरोइन के अपने. एक प्लेट पर पॉजिटिव चार्ज होता है. दूसरे पर नेगेटिव. ये दोनों प्लेटें आपस में जुड़ी हुई होती हैं. और ठीक वैसे जैसे फिल्मों में हीरो और हिरोइन के बीच इश्क़ का करेंट पास होता है, इन प्लेट्स में भी करेंट पास कराया जाता है.
सोर्स: यूट्यूब
सोर्स: यूट्यूब

करेंट के बहने से जब प्लेट्स में बैठे नेगेटिव चार्ज पॉजिटिव से टकराते हैं. इस टकराव के दौरान पॉजिटिव चार्ज कम एनर्जी लिए हुए होता है. और नेगेटिव चार्ज ज़्यादा एनर्जी.
सर्किट में बहता करेंट (सोर्स: यूट्यूब)
सर्किट में बहता करेंट (सोर्स: यूट्यूब)

आप इसे ऐसे समझिये जैसे कुली नंबर 1 में राजू बने गोविंदा और मालती बनी करिश्मा कपूर के बीच में एक अंतर था. करिश्मा अमीर बाप की बेटी थी और गोविंदा एक कुली. दोनों मिलते हैं. प्यार करने लगते हैं और साथ रहना चाहते हैं. मगर हाय ये पैसों का अंतर. उस अंतर को कैसे भी पाटना था. या तो गोविंदा अमीर हो जाये या करिश्मा सब रुपिया-पइसा छोड़ दे. कुली के लिए अमीर होना मुश्किल है. करिश्मा के लिए पैसा छोड़ना फिर भी आसान है.  

अब इलेक्ट्रॉन्स के पास रुपिया-पइसा नहीं होता. होती है तो बस एनर्जी. इसलिए मिलन के लिए उनकी भी चाहत होती है कि वो सेम एनर्जी लेवल पर आ जायें. इस मिलन के लिए नेगेटिव चार्ज को अपने अकाउंट से कुछ एनर्जी छोड़नी पड़ेगी. और वो छोड़ भी देता है. एकदम वैसे ही जैसे करिश्मा कपूर ने अपना रुपिया-पइसा छोड़ दिया था और गरीब कुली गोविंदा के साथ एक किराए के मकान में चली आती है. मिलन की चाह ऐसी ही होती है कि सब छुड़वा देती है. इलेक्ट्रॉन ने भी जितनी एक्स्ट्रा एनर्जी थी, वो छोड़ दी.
यही छोड़ी हुई एनर्जी लाइट एनर्जी के रूप में निकलती है. ये हुई एक इलेक्ट्रॉन की बात. ऐसे ही लाखों-करोड़ों होते हैं. जो टकराते ही रहते हैं. और इसी तरह से एक डायोड से लाइट निकलती है. और तब LED यानी Light Emitting Diode बनती है. बल्ब में LED क्यूं फायदेमंद है? LED वाले बल्ब ज़्यादा फ़ायदा देते हैं. क्यूंकि इनको जलाने में कम एनर्जी खर्च करनी पड़ती है. यानी कम एनर्जी बनानी पड़ती है. जिसको बनाने के लिए कम बिजली इस्तेमाल करनी पड़ती है. जो अभी तक बल्ब आते थे, उनसे लाइट पाने के लिए उन्हें गरम करना पड़ता था. और ये अगर ज़्यादा गरम हो जायें तो टूट-फूट जाते थे. जबकि LED में ये सब कुछ नहीं करना पड़ता. न इसमें किसी धातु को गरम करना पड़ता है और न ही इसमें बल्ब में कोई गैस भरी होती है, जो गरम होने पर लाइट को फैलाती है.

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