1: दो रन की कीमत समझो
विरेंदर सहवाग का बड़ा बेटा- आर्यवीर. खेलता है. कई खेल. क्रिकेट भी. फिलहाल टारगेट भी क्रिकेटर बनने का है. एक टारगेट और है. अपनी उमर के और बच्चों-किशोरों की तरह. कि मेरा भी एक मोबाइल फोन हो. फोन होगा. पापा दिलाएंगे. मगर एक शर्त है. बेटे को सेंचुरी मारनी होगी. दो बार नाइंटीज पर आउट हो चुका है. एक मैच में 98 पर आउट हुआ. रोता रोता घर आया. मम्मी से बोला. आज फिर मोबाइल से चूक गया. सिफारिश करने लगा. मैंने कहा, नहीं जब तक सेंचुरी नहीं, मोबाइल नहीं. वीरू के एक किस्से पर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव ने एक टिप्पणी की. ऑडियंस में बैठे थे जनाब. बोले, अरे सर दिलवा दो मोबाइल, सिम मत देना. वीरू ने आगे बढ़कर फुलटॉस बना छक्का मारा. बोले, सर, वाई फाई का जमाना है, बिना सिम भी काम चल जाएगा. सब हंसे. फिर आई मार्के की बात. कि सर, सवाल मोबाइल का नहीं, दो रन की कीमत का है. इन्हीं दो रनों से सेंचुरी हाफ सेंचुरी में बदल जाती है.2: तेंदुलकर से कौन सी बात नहीं मनवा पाए अपनी गलती के चलते वीरू
2009 में श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज की बात. विरेंदर सहवाग पहले दिन 270 के आसपास नॉट आउट लौटे थे. अगले दिन सुबह कोच गैरी कर्स्टन ने वॉर्म अप के लिए कहा. वीरू बोले. वॉर्म अप करूंगा तो थक जाऊंगा, आउट हो जाऊंगा. तुझे वॉर्म अप चाहिए कि ट्रिपल सेंचुरी. फिर वीरू पहुंचे सचिन के पास. बोले पाजी अगर आज मैंने तीसरी ट्रिपल सेंचुरी मार दी, तो आपको मेरी एक विश पूरी करनी होगी. सचिन कुछ देर सोचते रहे. फिर बोले डन है. दूसरे दिन का खेल शुरू हुआ. वीरू कुछ ही मिनटों में 270 से 290 के पार पहुंच चुके थे. उनका स्कोर था 293. मुरलीधरन ने फेंकी गेंद. वीरू ने पुश किया. मुरली ने कैच लिया. और उनकी पारी खत्म. एक अनचाहा रिकॉर्ड भी बन गया. शायद इकलौता ऐसा बैट्समैन जिसके पास तीन तरह की नर्वस नाइंटीज होंगी. जो 90 प्लस, 190 प्लस और 290 प्लस के स्कोर पर आउट हुआ. खैर ट्रिपल सेंचुरी नहीं बनी थी तो वीरू ने अपनी विश, अपनी शर्त भी सचिन को नहीं बताई. क्या थी वो शर्त? विरेंदर सहवाग 2011 वर्ल्ड कप के बाद अपने स्कूल की शुरुआत करना चाहते थे. टेस्ट मैच के दौर में उसका कंस्ट्रक्शन जोर शोर से चल रहा था. वीरू की ख्वाहिश थी कि स्कूल का उदघाटन सचिन करें. मगर तीसरी ट्रिपल सेंचुरी नहीं बनी, तो उन्होंने अपने गॉड जी से कुछ कहा भी नहीं. अभी पिछले हफ्ते वो मौका आया, जब सचिन पहली बार विरेंदर सहवाग के स्कूल पहुंचे. बकौल वीरू आज तक किसी क्रिकेटर, किसी हस्ती के लिए इतनी ताली नहीं बजीं. इतनी प्रेरणा नहीं मिली बच्चों को.3: ओपनिंग का श्रेय गांगुली नहीं, जहीर को
विरेंदर सहवाग विरेंदर सहवाग कैसे बने. ओपनिंग करके. पहले 15 ओवर में मार-मार के भूसा भर देते थे गेंदबाज के. तो अगला सवाल. सेहवाग को मिडल ऑर्डर से ओपनिंग पर कौन लाया? 99.99 फीसदी जनता का जवाब. सौरव गांगुली. टीम के कैप्टन. ओहो. गलत जवाब. सही जवाब के लिए सहवाग की सुनाई सच्ची कहानी ये रही. श्रीलंका का दौरा हो चुका था. टीम के ओपनर बैक टु बैक फेल हो रहे थे. जहीर खान सौरव के पास पहुंचा. बोला. आपने इतने ट्राई किए. मेरे कहने पर एक और ट्राई कर लो. गांगुली ने पूछा कौन. जहीर बोले, वीरू. गांगुली बोले, तू पागल हो गया है. वो मिडल ऑर्डर का लड़का है. जहीर बोले. जो ओपनिंग ऑर्डर के हैं, उन्होंने क्या कर लिया. आप मेरे कहने पर करके तो देखो. गांगुली बोले. अच्छा ट्राई करते हैं. बात सहवाग तक पहुंची. उन्हें लगा कि ऐसा न हो. ओपनिंग पर उतारें. दो चार इनिंग्स में न चलूं. तो बाहर कर दें. उन्होंने रख दी एक शर्त. गांगुली के सामने. कि आप लिखकर दो. अगर बतौर ओपनर फेल हो गया, तो ऐसे ही ड्रॉप नहीं कर दोगे. वापस मिडल ऑर्डर में चांस दोगे. उस वक्त कोच थे जॉन राइट. उन्होंने एक कागज पर लिखकर दिया. तब शुरू हुई विरेंदर सहवाग की ओपनिंग.ये भी पढ़ें: सहवाग के कारण एक किसान का बेटा फिर दौड़ेगा मोदी ने कहा सैनिकों को संदेश दो, सहवाग और अक्षय कुमार ने भेजा वीडियो











