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ईंट-गारा जोड़ते हुए धोनी के भाई की इस शायरी का क्या मतलब है?

पब्लिसिटी-सहानुभूति स्टंट या समाजवादी कलह का दुख है?

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फोटो - thelallantop

क्या महेंद्र सिंह धोनी के भाई नाराज़ हैं?

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बहुत सारे लोगों ने नोटिस किया कि धोनी की फिल्म में धोनी की बहन जयंती का किरदार तो है लेकिन उनके भाई का किरदार नहीं है. इस पर कुछ लोगों ने धोनी के भाई नरेंद्र सिंह धोनी से बात भी की.

नरेंद्र सिंह धोनी ने टेलीग्राफ अखबार को इंटरव्यू में बताया, 'मैं फिल्म में शायद इसलिए नहीं हूं क्योंकि मैंने माही के जीवन में कोई ख़ास योगदान नहीं दिया है – चाहे वो बचपन हो या जवानी का संघर्ष हो या फिर माही के दुनिया के लिए एमएसडी बनने के बाद का जीवन हो. फिल्म माही के बारे में है, माही के परिवार के बारे में नहीं.'

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धोनी से 10 साल बड़े नरेंद्र सिंह धोनी को रांची के बाहर लोग उतना नहीं जानते लेकिन वो पिछले 6-7 सालों से रांची की स्थानीय राजनीति में हैं. एनएस धोनी वहीं अपनी पत्नी और 2 बच्चों के साथ रहते हैं. 2009 में ये भाजपा में शामिल हो गए थे. तब दोनों धोनी भाई साथ ही रहते थे. उस वक्त ये पूछे जाने पर कि भाजपा में शामिल होने पर एमएस का क्या कहना है, नरेंद्र सिंह धोनी ने कहा था, 'ये निजी मामला है और निजी बात आपके साथ साझा नहीं कर सकता.' 2013 में नरेंद्र सिंह धोनी समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए.

आज-कल नरेंद्र सिंह धोनी फेसबुक पर मातमी शायरी कर रहे हैं. अब ये समाजवादी पार्टी में आंतरिक कलह के कारण है, पब्लिसिटी स्टंट है, सहानुभूति लेने की कोशिश है या कोई और बात है, जो स्टार भाई से सीधे-सीधे नहीं कह पा रहे, ये उनकी पोस्ट्स से साफ नहीं होता. ऐंवे ही मज़ाकिया मूड की शायरी भी हो सकती है. nsf

नरेंद्र सिंह धोनी फिल्म में अपने किरदार की नामौजूदगी पर तपसरा करते हुए कहते हैं, 'मैं धोनी से 10 साल बड़ा हूं और जब धोनी ने खेलना शुरू किया तब तक मैं जेवीएम-श्यामली से बाहर जा चुका था. मैं 1991 से ही बाहर रहा हूं. मैं उस वक्त अल्मोड़ा में कुमाऊं यूनिवर्सिटी से पढ़ाई कर रहा था और उसके बाद रांची वापस आ गया. धोनी की ज़िंदगी में मेरा थोड़ा-बहुत नैतिक योगदान हो सकता है जिसे फिल्म में दिखाना बहुत मुश्किल था.' धोनी का परिवार मूलत: उत्तराखंड़ से ही है.

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ये पूछे जाने पर कि क्या आपने धोनी को कभी खेलते हुए देखा है, नरेंद्र सिंह धोनी ने कहा, 'छुट्टियों में घर वापसी पर कभी-कभी देखने का मौका मिलता था. रांची डिस्ट्रिक्ट सीनियर में पहले मैच में मैंने धोनी को खेलते हुए देखा था. उसके बाद भी धोनी को एक-दो बार खेलते हुए देखा है. लेकिन धोनी को वो सब याद करने में मुश्किल होगी क्योंकि उस वक्त धोनी बहुत छोटे थे.'

और दोनों में कैसा संबंध है इस प्रश्न पर जवाब देते हैं, ‘बहुत अच्छा, भाइयों जैसा. हम सबको आज धोनी पर गर्व है.’  वैसे नरेंद्र सिंह धोनी खुद भी फुटबॉल के खिलाड़ी रहे हैं.

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