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गुजरात चुनाव में वो गंध मचनी शुरू हो गई है, जिसका किसी को अंदाजा नहीं था

ओबीसी और पाटीदार नेता बीजेपी-बीजेपी, कांग्रेस-कांग्रेस खेल रहे हैं

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बीजेपी और कांग्रेस स्थानीय नेताओं को अपने-अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है.
राजनीति क्या है? अब तक नहीं समझे हैं, तो एक नजर गुजरात पर डालिए. वहां इस वक्त जो चल रहा है, वो देखने वाला है. वहां अभी चुनावी तारीखों का ऐलान भले ही नहीं हुआ है, लेकिन गर्मी बढ़ी हुई है. एक महीने में चार बार खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात का दौरा कर चुके हैं और राज्य को कई चुनावी तोहफे भेंट कर चुके हैं. वहीं राहुल गांधी भी मंदिरों में माथा टेकते हुए और ट्वीटर पर लगातार सक्रियता दिखाते हुए चुनावी मैदान में सक्रियता बनाए हुए हैं. इन सबके बीच पाटीदार आंदोलन के अगुवा रहे और अनामत आंदोलन समिति के नेता हार्दिक पटेल, नरेंद्र पटेल और निखिल सवानी जैसे लोगों के साथ ही अल्पेश ठाकोर जैसे नेता भी हैं, जो अपनी राजनैतिक गतिविधियों से सरगर्मी बढ़ाए हुए हैं.
Gujrat Patidar Leader feature (1)
(1) अल्पेश ठाकोर, (2) हार्दिक पटेल, (3) नरेंद्र पटेल, (4) निखिल सवानी ने बीजेपी के खिलाफ हमलावर रुख अपनाया है.

हार्दिक पटेल गुजरात में पाटीदार आंदोलन के बड़े नेताओं में शुमार हैं. उनके महत्वपूर्ण सहयोगी निखिल सवानी ने 15 दिन पहले बीजेपी का दामन थाम लिया था. हार्दिक के एक और करीबी और पाटीदार आंदोलन के नेता रहे नरेंद्र पटेल ने 22 अक्टूबर को बीजेपी का दामन थाम लिया था. नरेंद्र ने 22 अक्टूबर को शाम सात बजे बीजेपी जॉइन की थी. चार घंटे के बाद ही उन्हें एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करनी थी. 11 बजते-बजते नरेंद्र ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि बीजेपी ने उन्हें अपने पाले में करने के लिए एक करोड़ रुपये का ऑफर दिया है. नरेंद्र ने मीडिया के सामने 10 लाख रुपये रखे और बताया कि ये पेशगी थी, बाकी की रकम 23 तारीख को मिलनी थी. नरेंद्र पटेल से पहले पाटीदार आंदोलन में उनके सहयोगी रहे वरुण पटेल और रेशमा पटेल ने बीजेपी जॉइन कर ली थी. नरेंद्र ने बताया कि बीजेपी की ओर से वरुण पटेल ही उन्हें एक कमरे में ले गए और उन्हें पैसे ऑफर किए.


इन पाटीदार नेताओं की सक्रियता कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को भी दिख गई. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि गुजरात बेशकीमती है और इसे कभी खरीदा नहीं जा सकता है. वहीं पार्टी जॉइन करने के 15 दिन बाद ही निखिल सवानी का भी बीजेपी से मोहभंग हो गया. नरेंद्र पटेल के पैसे देने के आरोप के बाद 23 अक्टूबर की सुबह निखिल ने भी प्रेस कॉन्फ्रेंस की. निखिल ने कहा कि बीजेपी पाटीदार समाज के साथ वोटबैंक की राजनीति कर रही है. वो पाटिदारों को खरीदने की कोशिश कर रही है, इसलिए मैं बीजेपी से इस्तीफा दे रहा हूं. सवानी ने कहा कि पाटीदारों को खरीदने के लिए बीजेपी करोड़ों रुपये बांट रही है. निखिल ने नरेंद्र पटेल को बधाई देते हुए कहा कि वो एक छोटे से परिवार से आते हैं, फिर भी उन्होंने एक करोड़ रुपये ठुकराकर अपने समाज का साथ दिया है.


जिस दिन निखिल ने बीजेपी छोड़ी है, ठीक उसी दिन यानी 23 अक्टूबर को राहुल गांधी गुजरात में हैं. उन्हें अगले तीन दिन तक गुजरात में ही रहना है. 23 को राहुल को गांधीनगर में रैली करनी है. इस रैली पर सबकी नजर इसलिए भी है कि गुजरात के बड़े ओबीसी नेता अल्पेश ठाकोर राहुल गांधी के साथ मंच साझा करेंगे और औपचारिक तौर पर कांग्रेस में शामिल हो जाएंगे. अल्पेश ठाकोर भी पाटीदार आंदोलन से निकले हुए नेता माने जाते हैं, क्योंकि उन्होंने पाटीदार आंदोलन के खिलाफ ओबीसी, एससी और एसटी एकता मंच बनाया था. अब ठाकोर ने कांग्रेस का दामन थाम लिया है, तो वहीं ठाकोर के विरोधी रहे पाटीदार आंदोलन के मुखिया हार्दिक पटेल ने भी कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान किया है.
अभी गुजरात में चुनावी तारीखों का ऐलान होना बाकी है. ऐसे में चुनाव जब बिल्कुल ही करीब होगा तो और कितने उलटफेर होंगे, सियासत में इसका ठीक-ठीक आंकलन करना किसी के लिए भी संभव नहीं है.


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