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आतंकी हाफिज सईद को समन भेजेगी NIA, नहीं आया तो उसका भी 'इलाज' तैयार

Pahalgam Terrorist Attack मामले में NIA की स्पेशल कोर्ट ने Hafiz Saeed को आरोपी बनाया है. Pakistan में मौजूद सईद को विदेश मंत्रालय के जरिए समन भेजने की तैयारी है. पेश नहीं होने पर कानूनी शर्तें पूरी करने के बाद उसके खिलाफ अनुपस्थिति में Trialचलाया जा सकता है.

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हाफिज सईद फिलहाल पाकिस्तानी आर्मी और ISI की प्रोटेक्शन में है (PHOTO - India Today)

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  • नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की अदालत ने पाकिस्तान में मौजूद हाफिज सईद को पहलगाम आतंकी हमले के आरोपी के रूप में समन भेजने की तैयारी कर ली है, जिसे जम्मू में विशेष कोर्ट में पेश होने का निर्देश मिलेगा।
  • इस कार्रवाई के पीछे 2025 में हुई पहलगाम आतंकी घटना है जिसमें 25 पर्यटक और एक स्थानीय व्यक्ति मारे गए, और आरोप है कि इसके मास्टरमाइंड हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा के सदस्य हैं।
  • अगर हाफिज सईद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी उपस्थित नहीं होते हैं, तो अदालत भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 356 के तहत गैरहाजिर मुकदमा चला सकती है।
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अरविंद ओझा

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की एक अदालत पाकिस्तान में मौजूद लश्कर-ए-तैयबा और जमात-उद-दावा के फाउंडर हाफिज सईद को समन भेजने की तैयारी कर रही है. हाफिद सईद को पहलगाम आतंकी हमले का आरोपी बनाया गया है. सईद को ट्रायल के लिए जम्मू में NIA की स्पेशल कोर्ट में पेश होने का निर्देश दिया जाएगा. यह समन विदेश मंत्रालय के जरिए भेजा जाएगा. अदालत पहले ही सईद के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी कर चुकी है. 

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NIA ने हाफिज सईद पर अप्रैल 2025 के हमले के मास्टरमाइंड में से एक होने का आरोप लगाया है. इस हमले में 25 टूरिस्ट्स और एक स्थानीय निवासी मारे गए थे. अगर कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद सईद पेश नहीं होता है तो अदालत 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' की धारा 356 के तहत उसकी अनुपस्थिति में उस पर मुकदमा चला सकती है. यह प्रावधान अदालत को ऐसे घोषित अपराधी के खिलाफ जांच या मुकदमा चलाने और फैसला सुनाने की इजाजत देता है जो कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए भाग गया हो. या जिसके तुरंत अरेस्ट होने की कोई संभावना न हो. वैसे इस बात की उम्मीद भी कम है कि वो पेश होगा. पाकिस्तानी आर्मी और ISI कई सालों से उसे प्रोटेक्ट करती आ रही है. 

गैर मौजूदगी में कैसे चलेगा मुकदमा?

किसी भी आरोपी की अनुपस्थिति में मुकदमा शुरू करने से पहले अदालत को कई जरूरतें पूरी करनी होती हैं. इनमें लगातार दो बार गिरफ्तारी वारंट जारी करना और घोषित अपराधी को पेश होने का निर्देश देने वाला नोटिस शामिल है. इसके बाद आरोप तय होने की तारीख से 90 दिन बीतने तक मुकदमा शुरू नहीं हो सकता. अगर आरोपी का कोई वकील नहीं है तो राज्य को उसके बचाव के लिए एक वकील उपलब्ध कराना होगा.

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NIA ने जुलाई में दायर एक सप्लीमेंट्री चार्जशीट में सईद का नाम शामिल किया था. इसमें उसे व्यक्तिगत तौर पर प्रतिबंधित संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) और उसके प्रॉक्सी संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' के प्रमुख के तौर पर आरोपी बनाया गया. सईद पर 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' और 'गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967' के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं. इन आरोपों में भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ना और हमला करने के लिए पाकिस्तान से साजिश रचना शामिल है.

यह सप्लीमेंट्री चार्जशीट NIA की मूल 1,597 पन्नों की चार्जशीट के सिलसिले में दायर की गई थी. एजेंसी के अनुसार, इसमें पाकिस्तान से रची गई कथित साजिश, सईद की भूमिका और जांच के दौरान इकट्ठा किए गए सबूतों का ब्योरा है. NIA का आरोप है कि यह हमला पाकिस्तानी हैंडलर्स, विदेशी आतंकवादियों और स्थानीय लॉजिस्टिकल सपोर्ट से जुड़ी एक साजिश का हिस्सा था.

पहले वाली चार्जशीट में क्या था?

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक 15 दिसंबर 2025 को दाखिल मूल चार्जशीट में सात आरोपियों के नाम थे. इनमें कथित पाकिस्तानी हैंडलर साजिद जट्ट और प्रतिबंधित संगठन LeT/TRF शामिल थे. इसमें तीन पाकिस्तानी आतंकवादियों; फैसल जट्ट उर्फ ​​सुलेमान शाह, हबीब ताहिर उर्फ ​​जिब्रान और हमजा अफगानी के नाम शामिल थे. ये तीनों जुलाई 2025 में डाचीगाम में 'ऑपरेशन महादेव' के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए थे.

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इसके अलावा आतंकियों को पनाह देने के आरोप में दो लोकल्स, परवेज अहमद और बशीर अहमद जोथार को गिरफ्तार किया गया था. आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट और UAPA के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए. NIA ने भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने जैसे आरोप भी लगाए. एजेंसी के मुताबिक, आतंकियों ने सांप्रदायिक तनाव पैदा करने और कश्मीर के टूरिज्म को नुकसान पहुंचाने के लिए ये किया. यही वजह थी कि पर्यटकों को उनकी धार्मिक पहचान के आधार पर निशाना बनाया गया.

लोकल नेटवर्क और सपोर्ट करने वालों की भी जांच

चार्जशीट में विदेशी आतंकवादियों की मदद के लिए स्थानीय लोगों का इस्तेमाल करने के आरोपों का भी जिक्र है. जांच करने वालों का कहना है कि पहलगाम हमले में पाकिस्तान में बैठे हैंडलर, घुसपैठ करने वाले आतंकवादी और छिपने की जगह, आने-जाने और लॉजिस्टिक्स के लिए स्थानीय लोगों ने मदद की थी. बिना लोकल सपोर्ट के ऐसा हमला करना पॉसिबल नहीं था. इसके साथ ही NIA ने TRF को LeT का प्रॉक्सी बताया है. आरोप है कि इस संगठन का इस्तेमाल पाकिस्तान में मौजूद मुख्य संगठन की भूमिका को छिपाने के लिए किया गया था.

(यह भी पढ़ें: पहलगाम आतंकी हमला: NIA अदालत ने हाफिज सईद को आरोपी बनाया)

आतंकी संगठनों की ये पुरानी टैक्टिक्स है. अक्सर अपने बैंक खाते फ्रीज होने से बचाने, तमाम सैंक्शंस और कार्रवाईयों से बचने के लिए वो नए-नए नामों का प्रयोग करते हैं. ऑपरेशन महादेव के दौरान मूल चार्जशीट में नामजद तीन पाकिस्तानी आतंकवादी मारे गए थे. तब से एजेंसी की जांच उन लोगों की पहचान करने पर केंद्रित है जिन्होंने हमले की योजना बनाई, उसमें मदद की और उसे समर्थन दिया.

वीडियो: कौन है बबलू श्रीवास्तव, जिस पर पाकिस्तान ने हाफिज सईद के घर पर ब्लास्ट का आरोप लगाया है?

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