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कैसे होता है यो-यो और Dexa टेस्ट, टीम इंडिया में आने के लिए अब क्या करना होगा?

BCCI की रिव्यू मीटिंग में क्या-क्या हुआ?

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योयो और डेक्सा टेस्ट

साल 2023 के पहले दिन BCCI की रिव्यू मीटिंग हुई. इस मीटिंग में BCCI ने कहा है कि नेशनल क्रिकेट एकेडमी (NCA) IPL की टीम्स के साथ तालमेल बनाकर काम करेगी और प्लेयर्स के वर्कलोड को मैनेज करेगी. इस फैसले के साथ BCCI ने ये भी बताया है कि टीम मैनेजमेंट ने उन 20 खिलाड़ियों को शॉर्टलिस्ट कर लिया है, जिनमें से इस साल भारत में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप के लिए टीम चुनी जाएगी.

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इसके साथ अब युवा प्लेयर्स को इंडियन टीम में चुने जाने के लिए पहले डोमेस्टिक क्रिकेट में सीमित मुकाबले खेलने होंगे. BCCI ने जिस मीटिंग में ये बड़े फैसले लिए हैं, उस मीटिंग में BCCI अध्यक्ष रॉजर बिनी, सचिव जय शाह, कैप्टन रोहित शर्मा, कोच राहुल द्रविड़, NCA चीफ वीवीएस लक्षमण और सेलेक्टर चेतन शर्मा मौजूद थे.

ऊपर हमने आपको मोटा-माटी मीटिंग की ज़रूरी बातें बता दीं. लेकिन इस मीटिंग में दो ऐसी चीज़ें भी हुईं जिससे भारतीय क्रिकेट में बड़ा बदलाव आ सकता है. BCCI ने साफ किया है कि सिलेक्शन प्रक्रिया और फिटनेस को ध्यान में रखते हुए एक बार फिर से यो-यो और डेक्सा टेस्ट को लाया जा रहा है. यानी अब टीम में आने वाले खिलाड़ियों को फिटनेस से जुड़े इन टेस्ट से गुज़रना होगा. नए खिलाड़ियों के अलावा प्लेयर्स के सेंट्रल पूल की फिटनेस पर भी ख़ासा ध्यान दिया जाएगा.

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अब ये यो-यो टेस्ट और डेक्सा टेस्ट आखिर होता क्या है? आइये बताते हैं.

#Yo-Yo Test

क्रिकेट पिच की लंबाई 20.12 मीटर होती है. इसी को ध्यान में रखते हुए क्रिकेट में यो-यो टेस्ट की लेंथ 20 मीटर रखी गई है. यो-यो टेस्ट में एक प्लयेर पॉइंट ए से शुरू कर पॉइंट बी तक जाता है, और फिर घूमकर पॉइंट ए पर वापस आता है. यानी एक बार में 40 मीटर कवर करना होता है. इसके बाद एक 5 मीटर का रिकवरी ज़ोन होता है. इसे आराम से दौड़कर प्लेयर वापस पॉइंट ए पर पहुंच जाता है, और अगले लेवल के लिए तैयार होता है.

इस टेस्ट में कई लेवल्स होते हैं. हर लेवल में प्लेयर से स्पीड बढ़ाने को कहा जाता है. हर लेवल का टोटल टाइम देखकर प्लेयर का रिज़ल्ट आंका जाता है. आमतौर पर क्रिकेट में एक प्लेयर इस टेस्ट में 2 किलोमीटर 8 मिनट 30 सेकंड में पूरा कर लेता है, तो उसे फिट माना जाता है. फास्ट बॉलर्स के लिए ये टाइम 8 मिनट 15 सेकंड रखा गया है.

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टेस्ट के रिज़ल्ट के मापदंड पहले से तय होते हैं. बैटिंग करते वक्त आमतौर पर दो रन लेने के बाद प्लेयर्स को सांस लेने का मौका मिलता है. फील्डिंग करते वक्त एक चेज़ के बाद टीम फिर से दूसरी बॉल के लिए तैयार होती है. तो एक ब्रेक वहां भी मिल जाता है. इन सब को देखते हुए इस टेस्ट को डिज़ाइन किया गया है.

#DEXA Test

यो-यो टेस्ट के बारे में शायद आपने सुना हो, पर ये डेक्सा क्या बला है? फिकर नॉट! पहले तो डेक्सा का फुल फॉर्म बता देते हैं. DEXA का फुल फॉर्म है (Dual Energy X-Ray Absorptionmetry Test) डुअल एनर्जी एक्स-रे एबसोर्पशनमेट्री टेस्ट. इस टेस्ट में स्पेक्ट्रल इमेजिंग के जरिए एक प्लेयर की बोन मिनरल डेंसिटी चेक की जाती है. खिलाड़ी के हड्डी की तरफ दो एक्स-रे बीम को साध कर चलाया जाता है. इससे प्लेयर का बोन डेंसिटी और बोन का मिनरल कंटेंट का पता चलता है.

ये टेस्ट सिर्फ उन प्लेयर्स का होगा, जो इंजरी के बाद टीम में वापसी कर रहे होंगे. इसकी क्या ज़रूरत है? अब ये जान लीजिए. जब भी कोई प्लेयर इंजर्ड होता है, तब उसकी बोन डेंसिटी और बोन हेल्थ खराब हो जाती है. इसको ही चेक करने के लिए BCCI इस टेस्ट को लेकर आई है. इससे इंजरी से लौट रहे प्लेयर्स के फिर से इंजर्ड होने के चांसेज़ कम होंगे.

इस रिव्यू मीटिंग से 2023 में टीम इंडिया के प्रदर्शन पर कोई फर्क पड़ेगा या नहीं, ये तो वक्त ही बताएगा. लेकिन रिव्यू मीटिंग में जो कदम उठाए गए हैं, वो इंडियन क्रिकेट टीम को लंबे समय तक फायदा पहुंचाएंगे, इसमें कोई दो-राय नहीं है.

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