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8वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 4.0 हुआ तो सरकारी कर्मचारियों की सैलरी 'भयंकर' हो जाएगी!

फिटमेंट फैक्टर एक गुणक (multiplier) है. इसका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) और पेंशन (Pension) को रिवाइज करने के लिए किया जाता है. इसका सीधा असर सैलरी पर पड़ता है. आइए जानते हैं कि फिटमेंट फैक्टर के कैलकुलेशन का फॉर्मूला क्या है?

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आमतौर पर केन्द्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी हर 10 साल में रिवाइज होती है (फोटो क्रेडिट: Business Today)

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  • आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.28 से 2.86 के बीच रहने का अनुमान है, जो कर्मचारियों के मूल वेतन और पेंशन को संशोधित करेगा।
  • पिछले एक दशक में 56% की रिटेल महंगाई दर और कर्मचारी संगठनों की मांगों के कारण आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर बढ़ाने की आवश्यकता उठी।
  • फिटमेंट फैक्टर में बदलाव से एक करोड़ से अधिक कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन में संशोधन होगा, जिसके लिए सरकारी खजाने पर असर और संतुलन देखना आवश्यक होगा।

आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर (Fitment Factor) कितना होगा? इन दिनों इस बात की चर्चा काफी चल रही है. सातवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 तय किया गया था. 7वां वेतन आयोग साल 2016 में लागू हुआ था. इसी तरह 2006 में लागू हुए छठवें वेतन आयोग के लिए फिटमेंट फैक्टर 1.86 था.

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फिटमेंट फैक्टर क्या है?

मिंट की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि फिटमेंट फैक्टर एक गुणक (multiplier) है. इसका इस्तेमाल सरकारी कर्मचारियों के मूल वेतन (Basic Pay) और पेंशन (Pension) को रिवाइज करने के लिए किया जाता है. इसका सीधा असर सैलरी पर पड़ता है. आइए जानते हैं कि फिटमेंट फैक्टर के कैलकुलेशन का फॉर्मूला क्या है?

संशोधित मूल वेतन = मौजूदा मूल वेतन X फिटमेंट फैक्टर

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उदाहरण के लिए अगर किसी का मूल वेतन 18,000 रुपये है और फिटमेंट फैक्टर 2.57 है तो मल्टीप्लाई करने पर मूल वेतन 46,260 रुपये हो जाता है. वहीं, छठवें वेतन आयोग ने 1.86 फिटमेंट फैक्टर का इस्तेमाल किया था. अब मौजूदा महंगाई और कर्मचारी संगठनों की मांगों को देखते हुए आठवें वेतन आयोग से काफी उम्मीदें हैं.

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8वें वेतन आयोग में कितना रह सकता है फिटमेंट फैक्टर?

बैंकबाजार (Bankbazaar) के सीईओ आदिल शेट्टी कहते हैं कि सातवें वेतन आयोग ने 2016 में 2.57 का फिटमेंट फैक्टर निर्धारित किया था. पिछले एक दशक में भारत में रिटेल महंगाई दर लगभग 56% रही है. इससे सरकारी कर्मचारियों की परचेजिंग पावर (अपनी जरूरत की चीजें खरीदने) में कमी आई है. आठवें वेतन आयोग में किसी तरह का बदलाव करते समय एक करोड़ से ज्यादा कर्मचारियों और पेंशनभोगियों की जरूरतों और सरकारी खजाने पर पड़ने भार के बीच संतुलन बनाना होगा. 

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उन्होंने आगे कहा कि एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि फिटमेंट फैक्टर 2.28 और 2.86 के बीच रहेगा. 2.86 पर मिनिमम बेसिक पे 18,000 रुपये से बढ़कर 51,480 रुपये हो जाएगा. यह साल 2016 से महंगाई के गणित पर फिट बैठती है.

कर्मचारी संगठन फिटमेंट फैक्टर 4 क्यों चाहते हैं?

यह ध्यान रखना जरूरी है कि यूनियनों ने काफी ज्यादा वेतन बढ़ाने की मांग की है. ज्यादातर सरकारी कर्मचारी संगठनों की मांग है कि आठवें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 3 रखा जाए. वहीं कुछ कर्मचारी संगठनों फिटमेंट फैक्टर 4 रखने की भी मांग कर रहे हैं. 

इन कर्मचारी संगठनों का मानना ​​है कि सरकारी कर्मचारियों की बेहतरी, रोजाना की जरूरतों और महंगाई से निपटने के लिए भी बेहतर फिटमेंट फैक्टर बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में करीब हर 10 साल में संशोधन किया जाता है इसलिए वाजिब फिटमेंट फैक्टर बहुत जरूरी है.

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