इस मुकाबले को बादशाहत का मुकाबला हम इसलिए भी कह रहे हैं, क्योंकि ये वही दौर था, जब वेस्टइंडीज़ के अभेद्य किले की दीवारें दरकने लगी थीं. जबकि पाकिस्तान एक नया सूरज बनकर उभर रहा था. 1980 के बाद भारत ने विश्वकप और वर्ल्ड चैम्पियनशिप जीतकर अपना लोहा मनावाया था. वहीं पाकिस्तान भी इमरान खान, वसीम, अकरम, जावेद मियांदाद, अब्दुल कादिर जैसे खिलाड़ियों की खेप तैयार कर रहा था.

पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक के साथ इमरान खान. फोटो: Twitter
पाकिस्तान के लिए ये मैच इसलिए भी अहम था, क्योंकि 1987 में विश्वकप हारने के बाद, पाकिस्तान को एक नई शुरुआत करनी थी. टीम के कप्तान इमरान खान 1987 विश्वकप की हार के बाद क्रिकेट से संन्यास ले चले थे. इसके बाद पाकिस्तान के उस वक्त के राष्ट्रपति जनरल जिया-उल-हक ने इमरान खान को फिर से मुल्क के लिए वापसी करने को कहा. उन्हें फिर से कप्तान बनाने का ऑफर दिया गया.
इमरान ने जिया-उल-हक का कहना माना और सीधे टीम को लेकर वेस्टइंडीज़ उड़ चले. लेकिन वापसी उतनी शानदार नहीं रही. वेस्टइंडीज़ ने वनडे सीरीज़ में पाकिस्तान को 5-0 से हरा दिया. इसके बाद पाकिस्तान टीम ने वो जज़्बा दिखाया कि 15 साल के वेस्टइंडीज़ के गढ़ में दहशत फैल गई.
पाकिस्तान vs वेस्टइंडीज़ टेस्ट सीरीज़
पाकिस्तान ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज़ के पहले मुकाबले को जॉर्ज टाउन में 9 विकेट से जीत लिया. इस जीत के सबसे बड़े हीरो थे इमरान खान, जिन्होंने मैच में 11 विकेट अपने नाम किए. इसके बाद दूसरा टेस्ट पोर्ट ऑफ स्पेन में खेला गया. पाकिस्तान ने यहां भी जुझारूपन दिखाते हुए इस मैच को ड्रॉ करवा लिया.

इमरान खान और जावेद मियांदाद. फोटो: Javed Miandad FB
हालांकि इन मैचों में एक पाकिस्तानी बल्लेबाज़ और था, जो इमरान का खूब साथ दे रहा था. नाम है जावेद मियांदाद. मियांदाद वो बल्लेबाज़ थे, जिन्हें बल्लेबाज़ी के लिए भेजते हुए कप्तान इमरान खान भी हिचकते थे. क्योंकि उस सीरीज़ से पहले पाकिस्तान ही क्या पूरी दुनिया ये बात जानती थी कि विदेशों में मियांदाद के हाथ-पैर फूल जाते हैं. लेकिन मियांदाद ने वेस्टइंडीज़ के खिलाफ उस सीरीज़ में एक नहीं, बल्कि दो-दो शतक लगाए और सारे आलोचकों के मुंह बंद कर दिए.
सीरीज़ का तीसरा और निर्णायक टेस्ट
पहले दो मैचों में पाकिस्तान के बल्लेबाज़ों ने जो किया, वो वेस्टइंडीज़ के गेंदबाज़ों के लिए असहनीय था. सीरीज़ का तीसरा टेस्ट ब्रिजटाउन के किंगस्टन ओवल में खेला गया. इस दिलचस्प मुकाबले में वेस्टइंडीज़ ने टॉस जीतकर माल्कम, बैल्जमिन, मार्श वाले बोलिंग से अटैक करवाना शुरू किया. रमीज़ राजा ने उस मैच को याद करते हुए बताया है-
''उन्होंने (वेस्टइंडीज़) हमें डराने के लिए कहा था कि वो हरी पिच तैयार करेंगे. जब हम वहां पहुंचे, तो पिच पूरी तरह से हरी थी. हम खेलने उतरे, तो मार्शल ने सीधे मेरे सिर पर दो तेज़ बाउंसर मारी. हम भी उस मैच डिफेंस करने के मूड में नहीं थे. फिर मैंने और शोएब ने अपने शॉट्स खेले.''

दिग्गज गेंदबाज़ मैल्कम मार्शल. फोटो: Windies Cricket
पाकिस्तान इस मैच में कुछ अलगे करने के इरादे से उतरा था. उसमे रमीज़ राजा, शोएब मोहम्मद, आमिर मलिक और सलीफ यूसुफ के छोटे-छोटे स्कोर से 309 रन बना दिए. अब पाकिस्तान के लिए सारा काम इमरान, वसीम, कादिर पर था.
उन्होंने वेस्टइंडीज़ के बैटिंग लाइन को 306 रनों पर ही रोक दिया. मुदस्सर, वसीम और इमरान ने वेस्टइंडीज़ को अपने स्कोर से आगे नहीं जाने दिया. अब मनोवैज्ञानिक ही सही, लेकिन पाकिस्तान को तीन रनों की बढ़त मिल गई. वेस्टइंडीज़ के लिए सिर्फ कप्तान विवियन रिचर्ड्स और कार्ल हूपर ही अर्धशतक बना पाए.
पाकिस्तान दूसरी पारी खेलने उतरा. शोएब मोहम्मद, जावेद मियांदाद और कप्तान इमरान की पारियों से पाकिस्तान 262 रन बनाकर ऑल-आउट हो गया. अब वेस्टइंडीज़ को जीतने के लिए 266 रनों की ज़रूरत थी. क्योंकि तीन रन पिछली पारी की बढ़त के भी जुड़ गए थे.
वसीम और सलीम जाफर ने वेस्टइंडीज़ को टेस्ट के चौथे दिन झटके दिए. लेकिन फिर भी वेस्टइंडीज़ ने संभली हुई शुरुआत की. 100 रन पार करने तक वेस्टइंडीज़ ने सिर्फ दो विकेट ही गंवाए थे. लेकिन 118 रनों पर कार्ल हूपर के रन-आउट होने के बाद तो वेस्टइंडीज़ ने एक के बाद एक छह विकेट 89 रनों के बीच गंवा दिए.

वसीम अकरम
वसीम अकरम और अब्दुल कादिर ने उस पारी में खतरनाक गेंदबाज़ी की और वेस्टइंडीज़ की दवा उन्हें ही पिलानी शुरू कर दी. उन्होंने विवियन रिचर्ड्स, रिची रिचर्ड्सन, एम्ब्रॉस समेत तमाम दिग्गज़ों को वापस पवेलियन भेज दिया.
207 के स्कोर पर 8 विकेट. पाकिस्तान को अब जीतने के लिए सिर्फ 2 विकेट चाहिए थे. जबकि वेस्टइंडीज़ अब भी जीत से 58 रन दूर थी. वेस्टइंडीज़ के उस अभेद्य किले की दिवारें अब हिलने लगने लगीं थी. ब्रिजटाउन के उस मैदान पर मौजूद दर्शक भी इस बात को भांप चुके थे कि अब वेस्टइंडीज़ का किला ज्यादा देर तक नहीं बच सकेगा. मैदान पर मौजूद कई दर्शकों की आंखों में आंसू थें. इस्लामाबाद में बैठे जनरल जिया उल हक को अपने फैसले पर गर्व होने लगा था.
वेस्टइंडीज़ के दो विकेट और अंपायरिंग
पाकिस्तान गेंदबाज़ पूरी तरह से वेस्टइंडीज़ के ऊपर हावी हो चले थे. अब वेस्टइंडीज़ के लिए नौवें विकेट के लिए मैदान पर जेफ डुजो और विंस्टन बेनजमिन थे. बस यहीं से सबकुछ बदल गया. कुछ तो इन दोनों की अच्छी बल्लेबाज़ी और कुछ अंपायरों की खराब अंपायरिंग. इन दो वजहों ने वेस्टइंडीज़ के 15 सालों के उस अभेद्य किले को ठहने से बचा लिया. सीरीज़ 1-1 के ड्रॉ पर खत्म हुई.

पाकिस्तान के दिग्गज स्पिनर अब्दुल कादिर. फोटो: Getty
अब्दुल कादिर बताते हैं कि मैच के आखिरी पलों में अंपायर बेवजह उनकी गेंदों को नो बॉल दिए जा रहे थे. कादिर ने बताया-
''अगर खराब अंपायरिंग नहीं होती, तो मैच हमारा था. मैच के आखिर में अंपायर बेवजह मेरी गेंदों को नो-बॉल दिए जा रहे थे, जिससे की बेंजमिन बड़े शॉट्स खेल सकें.''इन सारी चीज़ों के बीच अब्दुल कादिर इतना भड़क गए कि बाउंड्री लाइन पर उन्होंने एक दर्शक के मुंह पर मुक्का तक जड़ दिया, जिसके बाद उन्हें हर्जाने के तौर पर उस शख़्स को एक हज़ार यूएस डॉलर भी देने पड़े.
जब निकल गए विवियन रिचर्ड्स के आंसू
वेस्टइंडीज़ के लिए भी ये जीत कितनी अहम थी. ये बात विवियन रिचर्ड्स के आंसू बता रहे थे. वेस्टइंडीज़ के लिए आखिरी पलों के उस जीत के हीरो विंस्टन बैंजमिन ने बताया कि उस जीत के बाद वेस्टइंडीज़ के दिग्गज विवियन रिचर्ड्स ड्रेसिंग रूम में रोने लगे. तब जाकर उन्हें ऐहसास हुआ कि वो मैच, वो जीत और क्रिकेट उनके और वेस्टइंडीज़ क्रिकेट के लिए कितने मायने रखते थे.
उस सीरीज़ में न पाकिस्तान जीता, न ही वेस्टइंडीज़. लेकिन फिर भी एक शानदार क्रिकेट दुनिया को देखने के लिए मिला. उस सीरीज़ में वेस्टइंडीज़ ने अपना सम्मान बचाया और पाकिस्तान ने सम्मान बनाया.

इमरान खान और जावेद मियांदाद. फोटो: Javed Miandad FB
भले ही पाकिस्तान उस सीरीज़ को नहीं जीत पाया. लेकिन उन्होंने दुनिया को ये बता दिया कि वेस्टइंडीज़ के उस अभेद्य किले की दीवारों में अब दरार पड़ चुकी है. पाकिस्तान को उस सीरीज़ से बहुत कुछ हासिल हुआ. पहला तो कप्तान इमरान खान का शाही कमबैक. इमरान ने वापसी करते हुए इस दौरे पर 23 विकेट चटकाए, जबकि दूसरा जावेद मियांदाद के रूप में एक शानदार बल्लेबाज़.
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