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2003 फ़ाइनल में भारत और सचिन का सपना तोड़ने वाला, कैसे बना 2007 का महारथी?

37 साल के ग्लैन मैक्ग्रा. पहले ही बोल चुके थे, वर्ल्ड कप के बाद रिटायरमेंट ले लेंगे. फिर ऐसी बॉलिंग की, दुनिया ने देखा.

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कहानी ग्लेन मैक्ग्रा की, जिन्होंने तीन वर्ल्ड कप ख़िताब जीते (तस्वीर - ICC)

वर्ल्ड कप के महारथी. द लल्लनटॉप की वो ख़ास सीरीज़, जिसमें हम आपको वनडे वर्ल्ड कप के हीरोज़ के बारे में बता रहे हैं. 2019, 2015 और 2011 कवर करने के बाद, अब बारी है 2007 की. पर इस कहानी की जड़ें छुपी हुई हैं 2003 में. 23 मार्च, 2003. सौरव गांगुली की टीम ने सबको चौंकाते हुए वर्ल्ड कप फ़ाइनल तक का सफ़र तय किया. सामने थी ऑस्ट्रेलिया, जिसने 1999 में वर्ल्ड कप जीता था. रिकी पॉन्टिंग और डेमियन मार्टिन के बीच हुई 234 रन की पार्टनरशिप से ऑस्ट्रेलिया ने बोर्ड पर 359 रन टांग दिए. ये वो दौर था, जब 260 से ज्यादा का कोई भी स्कोर, बहुत बड़ा माना जाता था.

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सचिन तेंडुलकर. वर्ल्ड क्रिकेट के बेताज बादशाह. इंडिया चेज़ करने उतरी, सचिन के कंधे पर 110 करोड़ लोगों की उम्मीद. चौथी बॉल पर सचिन ने चौका जड़ा. जोहानसबर्ग और भारत की हर एक गली में शोर मचा. लेकिन अगली बॉल पर जो सन्नाटा छाया, वो आज भी कई फ़ैन्स को चुभता है. ग्लेन मैक्ग्रा ने सचिन को पेस और बाउंस से बीट किया. तेंडुलकर ने पुल शॉट खेलने की कोशिश की, पर गेंद हवा में ऊंची उठ गई. मैक्ग्रा ने खुद आगे बढ़कर आसान कैच पकड़ा. इंडिया की आधी उम्मीद वहीं ख़त्म हो गई. कंगारुओं ने वो फ़ाइनल जीता. लेकिन मैक्ग्रा तो अभी बोल ही रहे थे,

'पिक्चर अभी बाकी है मेरे दोस्त...'

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फिल्म रिलीज़ हुई 2007 वनडे वर्ल्ड कप में. ऑस्ट्रेलिया के इस तेज़ गेंदबाज़ को 'पिजन' नाम से बुलाया जाता था. स्मूद एक्शन. बेहतरीन सीम पोजीशन, और कंट्रोल ऐसा, सिक्का रख दें तो 10 में से नौ बार बॉल वहीं गिरे. 2003 से जो क़िस्सा शुरू हुआ, वो 2007 तक परवान चढ़ चुका था. 37 साल का ये बॉलर अपने करियर के आखिरी पड़ाव पर था. 1996 में वर्ल्ड कप में डेब्यू करने के बाद मैक्ग्रा ऑस्ट्रेलियाई टीम का अहम हिस्सा बन गए थे. पर अगली पीढ़ी उनकी जगह लेने को तैयार थी. 2007 उनका 'लास्ट डांस' था, और क्या शानदार था वो लास्ट डांस.

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# कैसा रहा था वर्ल्ड कप?

साउथ अफ्रीका से वर्ल्ड कप का कारवां वेस्ट इंडीज़ पहुंचा. 16 टीम्स, चार ग्रुप्स. ऑस्ट्रेलिया के सामने साउथ अफ्रीका का चैलेंज. ग्रुप में स्कॉटलैंड और नीदरलैंड्स भी थे.

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- पहला मैच स्कॉटलैंड से हुआ. छह ओवर, 14 रन, तीन विकेट और एक मेडेन. कमाल की शुरुआत. ऑस्ट्रेलिया ने 203 रन से ये मैच जीता. नीदरलैंड्स के खिलाफ दो विकेट और फिर साउथ अफ्रीका के खिलाफ एक विकेट. ऑस्ट्रेलिया हर मैच जीतकर सुपर 8 में पहुंच गई.

- सुपर 8 के पहले चार मैच वेस्ट इंडीज़, बांग्लादेश, इंग्लैंड और आयरलैंड से थे. हर मैच में तीन विकेट. इंग्लैंड को छोड़कर हर मैच में मैक्ग्रा की इकनॉमी चार रन प्रति ओवर से भी कम की थी.

- श्रीलंका और न्यूज़ीलैंड के खिलाफ भी दो-दो विकेट. ऑस्ट्रेलिया ने अब तक अपना हर मुकाबला जीता था. रिकी पॉन्टिंग और उनके बल्लेबाज़ टीम के लिए लगातार रन्स बना रहे थे, मैक्ग्रा अपनी बॉलिंग से कमाल कर रहे थे.

- सेमीफाइनल में साउथ अफ्रीका से मुकाबला. साल भर पहले ही साउथ अफ्रीका ने 434 का टार्गेट चेज़ किया था. ये मैच ब्लॉकबस्टर होना था. पर शॉन टेट और मैक्ग्रा ने इसे एकतरफा बना दिया. टेट ने चार विकेट झटके. 2.25 की इकनॉमी से पिजन ने आठ ओवर बॉलिंग की. जैक कालिस, एश्वेल प्रिंस और मार्क बाउचर को आउट किया. साउथ अफ्रीका 149 पर ढेर. ऑस्ट्रेलिया ने आसानी से इसे चेज़ कर लिया. सेमीफाइनल में मैन ऑफ द मैच अवार्ड.

- फ़ाइनल में ऑस्ट्रेलिया ने श्रीलंका को 53 रन से हराया. मैक्ग्रा को प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट चुना गया. 11 मैच में 26 विकेट, 4.5 से कम की इकनॉमी. 13.73 की औसत से विकेट्स.

26 दिसंबर, 2006 को इस खिलाड़ी ने घोषणा कर दी थी- इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कहेंगे. पिजन ने कहा था, वर्ल्ड कप में टीम का जो आखिरी मैच होगा, ऑस्ट्रेलिया की जर्सी में उनका भी आखिरी मैच वही होगा. रिटायर कर रहे इस प्लेयर ने अपने आखिरी मैच में अपना तीसरा वर्ल्ड कप जीता. क्रिकेट के इतिहास में ये कमाल करने वाले बहुत कम प्लेयर्स हैं.

ऑस्ट्रेलिया ने पूरा टूर्नामेंट डॉमिनेट किया. तीन शतक लगाते हुए मैथ्यू हेडन ने 659 रन ठोके. ब्रैड हॉज ने भी शतक बनाया. पॉन्टिंग ने भी पहले मैच में कप्तानी पारी खेली. बॉलिंग में नेथन ब्रैकन और शॉन टेट, दोनों ने अच्छा प्रदर्शन किया. पर एक प्लेयर था, जिसने लगभग हर मैच में उस मोड़ पर काम किया, जब टीम को ज़रूरत थी. मैक्ग्रा. सधी हुई लाइन और लेंथ.

नई बॉल से लेकर फर्स्ट-चेंज, पॉन्टिंग ने जब चाहा, पिजन ने अपनी टीम को तब ब्रेकथ्रू दिया. और ये सब, लगभग चार की इकनॉमी से. वर्ल्ड कप जैसे टूर्नामेंट में ये स्टैट्स कमाल हैं. मैक्ग्रा के नाम वनडे वर्ल्ड कप्स में सबसे ज्यादा विकेट्स लेने का रिकॉर्ड है. इस बॉलर ने 39 मैच में 71 विकेट्स लिए हैं. इस दौरान मैक्ग्रा की इकनॉमी चार से भी कम और बेस्ट बॉलिंग 7/15 की रही है.

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इस कहानी की कड़ी 2003 से शुरू हुई थी. सचिन तेंडुलकर के उस विकेट से. सीरीज़ के अगले एपिसोड में आपको उसी टूर्नामेंट की कहानी मिलेगी, जिसमें हम सर्व करेंगे सचिन तेंडुलकर की वो पारियां, जिसमें उन्होंने एंड्रयू कैडिक से लेकर शोएब अख़्तर तक सबको धुना था. वर्ल्ड कप के महारथी आपको कैसे लग रही है, इसपर आप अपने सुझाव हमें दे कॉमेंट कर दे सकते हैं.

वीडियो: सूर्यकुमार यादव 100 बनाते हुए ऐसा शॉट खेला, जिसकी चर्चा सचिन तेंडुलकर ने भी की

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