'सुनील गावस्कर एक बार किसी से बात कर रहे थे तो आपका और महेन्द्र सिंह धोनी का जिक्र आया. कहा गया, ये लोग इतने कमाल के प्लेयर्स हैं पर इन लोगों को जब टीम में कमबैक करना है तब इनको लॉन्ग फॉर्मेट (टेस्ट मैच) खेलना चाहिए. शिखर धवन के बारे में बार-बार लोगों ने ये कहा कि वो अब लॉन्ग फॉर्मेट नहीं खेल रहे हैं. जबकि दुनिया ने ये नाम रेजिस्टर किया क्योंकि मोहाली में एक टेस्ट मैच होता है, आप डेब्यू करते हैं, और धज्जियां उड़ा देते हैं. आज तक किसी ने हिंदुस्तान में डे वन पर लंच के पहले सेंचुरी कंप्लीट नहीं की. डेब्यू में गुन्डप्पा विश्वनाथ का 137 का रिकॉर्ड था, जिसको आपने बड़े मार्जिन से तोड़ दिया. लेकिन आज की तारीख़ में कहा जाता है कि रणजी चल रहा है, दिल्ली का मैच चल रहा है, शिखर नहीं खेल रहे हैं. आप इस क्रिटिसिज़्म (आलोचना) को कैसे लेते हैं?'
ये सवाल गब्बर यानी शिखर धवन से सौरभ द्विवेदी ने पूछा. धवन ने 2013 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ अपना टेस्ट डेब्यू किया. टेस्ट क्रिकेट में अपनी पहली टेस्ट पारी में गब्बर ने 174 बॉल में 187 रन की शानदार पारी खेली. फ़ैन्स को लगा, भारत को मिल गया एक और ख़ास प्लेयर. पर गब्बर का टेस्ट करियर लंबा नहीं चला. पांच साल बाद, 2018 में उन्होंने आखिरी बार भारत के लिए टेस्ट खेला. द लल्लनटॉप के नए शो 'बैठकी' के दौरान बातचीत में शिखर ने तरह-तरह के सवालों का जवाब दिया. दिल्ली के लिए रणजी ना खेलने पर भी उन्होंने बेबाकी से बात की. धवन ने कहा -






















