पिछले कुछ दिनों से आकाशवाणी और दूरदर्शन पर क्रिकेट मैच नहीं आ रहे. वो लोग जिन्होंने फ्री डिश या एंटीना लगा रखा है, भारत और न्यूज़ीलैंड वनडे सीरिज़ के मैच नहीं देख पाए और आकाशवाणी की जादुई क्रिकेट कॉमेंट्री भी गायब थी. दरअसल अलग-अलग जगह क्रिकेट प्रसारण को लेकर मामला कोर्ट में चलता ही रहता है. और क्रिकेट बोर्ड से अधिकार खरीदने वाले चैनल, दूरदर्शन को फीड नहीं देते हैं. उनका कहना होता है कि हमने इतने महंगे अधिकार खरीदें हैं, इसे दूरदर्शन के साथ कैसे बांट लें. इस पर सरकार ने एक नई अधिसूचना निकाल के मामला एक बार फिर साफ किया है. इस नोटिस में लिखा है कि 2007 के खेलों के प्रसारण कानून के मुताबिक भारत की पुरूष क्रिकेट टीम के सभी वनडे और टी20 मैच दूरदर्शन और आकाशवाणी को देने ज़रूरी हैं. साथ ही आईसीसी टूर्नामेंट्स के के सेमीफाइनल और फाइनल मैच भी आकाशवाणी पर सुनाएं और दूरदर्शन पर दिखाएं जाएं.
अब टेस्ट मैच भी आ सकते हैं दूरदर्शन पर
अगर ऐसा पहले होता तो सचिन का आखिरी टेस्ट भी दूरदर्शन पर आता

यहां तक तो कोई नई बात नहीं है. नई बात ये है कि सरकार को लोकहित में अगर कोई टेस्ट मैच दिखाना ज़रूरी लगे तो वह भी दिखा सकती है. अगर ऐसा पहले होता तो सचिन का आखिरी टेस्ट भी दूरदर्शन पर आता.

तो क्या निजी चैनल मुफ्त में दूरदर्शन को मैच दिखाने देते हैं? जी नहीं. दूरदर्शन विज्ञापन लेता है और उसका 75 फीसदी हिस्सा निजी चैनल और 25 फीसदी हिस्सा दूरदर्शन के पास जाता है. हालांकि ये अधिसूचना सिर्फ क्रिकेट के मैचों के लिए है लेकिन 2007 के खेल प्रसारण संबंधी कानून के मुताबिक राष्ट्रीय महत्व का कोई भी खेल दिखाया जा सकता है. इसमें हॉकी वर्ल्ड कप, हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी, फुटबॉल वर्ल्ड कप, विम्बलडन तक दिखाया जा सकता है. कुछ साल पहले तक विम्बलडन का पहला मैच, सेमीफाइनल और फाइनल दूरदर्शन पर आते भी थे. दूरदर्शन पर मैच दिखाने का एक नियम ये भी है कि दूरदर्शन पर दिखाए जाने वाले खेल की कम से कम 50 फीसदी कॉमेंट्री हिंदी में हो.
अगर आप सोच रहे हैं कि इससे सिर्फ गांवों के लोगों का भला होगा तो आप गलत हैं. डीटीएच आने के साथ गांवों का डिजिटलीकरण शहरों से भी ज्यादा मात्रा में और पहले हो गया था. इससे उन लोगों को क्रिकेट देखने में फायदा होगा जो फ्री डिश और एंटीना चलाते हैं. या वे लोग जिनके पास आज भी रेडियो और आकाशवाणी है, वो चाहें शहरों में हो या गांवों में हों.













