44 साल से भारत एशियन गेम्स में मेंस मैराथन के मेडल का इंतजार कर रहा था. 26 सितंबर को ये इंतजार नागायो में पूरा हो गया. हिमाचल प्रदेश के मंडी से आने वाले सावन बरवाल ने मेंस मैराथन में सिल्वर मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकेंड में रेस पूरी की. इसी के साथ उन्होंने अपने ही नेशनल रिकॉर्ड को भी बेहतर कर लिया.
Asian Games : सावन ने जीता ऐतिहासिक सिल्वर, 44 साल बाद मैराथन में आया मेडल
Asian Games 2026 : मैराथन रेस में भारतीय धावक Sawan Barwal ने सिल्वर मेडल जीत लिया. उन्होंने 2 घंटे 11 मिनट 37 सेकेंड में रेस पूरी कर अपने ही नेशनल रिकॉर्ड को बेहतर किया.

1982 के बाद ये पहली बार है, जब इस इवेंट में भारत ने एशियाड में पोडियम हासिल की. सावन महज 48 सेकेंड से गोल्ड मेडल से चूक गए. जापान के इचिटाका यामाशिता ने 2 घंटे 10 मिनट 49 सेकेंड का समय निकालकर सुनहरा तमगा अपने नाम किया. वहीं, इस इवेंट में चीन के पेइयू फेंग ने 2:12:13 के समय के साथ ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया.
पहाड़ों से निकले, फौज ने संवारापहाड़ों में दौड़कर अपनी सांसें पक्की करने वाले सावन की कहानी भी एकदम गजब है. जोगिंदरनगर के एक साधारण परिवार में जन्मे सावन के पिता कार चलाते थे. फौज में जाने का सपना था. 2017 में भर्ती के दौरान उनकी स्टैमिना ने अफसरों का ध्यान खींच लिया. फौज में एंट्री मिली और वो पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट पहुंच गए. 2019 में वो भारतीय सेना की इंजीनियरिंग कोर में हवलदार बन गए.
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फिर क्या था? उन्होंने मैराथन रेस को अपनी दुनिया बना ली. अप्रैल 2026 में रॉटरडैम मैराथन में उन्होंने दर्शा दिया कि वो भारत को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के लिए तैयार हैं. अब जापान के नागोया में उन्होंने रजत जीतकर इसे साबित भी कर दिया. साथ ही उन्होंने दिग्गज शिवनाथ सिंह का 48 साल पुराना नेशनल रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिया.
10 किमी तक सबसे आगे निकल चुके थेसावन ने रेस की शुरुआत में ही अपना दम दिखाना शुरू कर दिया था. 5 किमी पर वह 15:28 के समय के साथ दूसरे पोजिशन पर थे. लेकिन, 10 किमी तक पहुंचते-पहुंचते वो सबसे आगे निकल गए. उन्होंने 47 मिनट 35 सेकेंड में 15 किमी की दूरी तय कर ली. तब भी वो लीड ही कर रहे थे. 20 किमी पर भी वो 1:02:35 के समय के साथ लीड में थे. हाफवे यानी 21.1 किमी पर उन्होंने 1:05:54 का समय निकाला और तब भी सबसे आगे थे.
25 किमी तक सावन की बढ़त बनी रही. उन्होंने 1 घंटे 18 मिनट 19 सेकेंड में ये दूरी तय कर ली थी. हालांकि, 30 किमी पर जापान के यामाशिता ने उन्हें पकड़ लिया. सावन उनसे एक सेकेंड पीछे होकर दूसरे स्थान पर आ गए. इसके बाद, 35 किमी पर सावन ने फिर जोर लगाया और लीड ले ली. लेकिन, 40 किमी के बाद यामाशिता ने उन्हें पीछे छोड़ दिया. अंत तक वो इस लीड को कायम रखने में सफल रहे.
भारत ने आखिरी बार मैराथन में 1982 के दिल्ली एशियन गेम्स में मेडल जीता था. उससे पहले, 1951 में छोटा सिंह ने गोल्ड और सूरत सिंह माथुर ने ब्रॉन्ज जीता था. 1982 में एचके सीताराम ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया था. ये तीनों ही मेडल भारत ने घर पर हुए एशियाड में जीता था. लेकिन, यानी नागोया में सावन का सिल्वर भारत का एशियन गेम्स में पहला मैराथन मेडल है जो देश के बाहर आया है.
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