The Lallantop

भारतीय सेना के जवान ने नीदरलैंड्स में वो कर दिखाया, जो आधी सदी से कोई हिंदुस्तानी नहीं कर पाया था!

भारतीय सेना के हवलदार Sawan Barwal ने नीदरलैंड्स में इतिहास रच दिया. उन्होंने मैराथन में 46 साल पहले बने Shivnath Singh के रिकॉर्ड को तोड़ दिया.

Advertisement
post-main-image
सावन बरवाल ने रोटरडैम में हुए NN मैराथन में इतिहास रच दिया. (फोटो-PTI)

कहते हैं न कि रिकॉर्ड बनते ही हैं टूटने के लिए. लेकिन भारत के एथलेटिक्स इतिहास में एक रिकॉर्ड ऐसा था, जो पिछले 46 सालों से अंगद के पैर की तरह जमा हुआ था. नाम- शिवनाथ सिंह. साल- 1978. मैराथन का समय- 2 घंटे 12 मिनट. दशकों बीत गए, कई धावक आए और गए, लेकिन ये रिकॉर्ड टस से मस नहीं हुआ. लेकिन अब, इस 46 साल पुराने तिलिस्म को तोड़ दिया है भारतीय सेना के एक हवलदार ने. नाम है सावन बरवाल.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
क्या है पूरा मामला?

रविवार को नीदरलैंड्स के रोटरडैम में NN मैराथन (वर्ल्ड एथलेटिक्स गोल्ड लेबल रोड रेस) चल रही थी. हिमाचल प्रदेश के मंडी के रहने वाले 28 साल के सावन बरवाल अपनी जिंदगी की पहली (डेब्यू) मैराथन दौड़ रहे थे. जब वो फिनिश लाइन पर पहुंचे, तो स्टॉपवॉच पर समय था 2 घंटे 11 मिनट और 58 सेकंड.

यानी उन्होंने शिवनाथ सिंह का रिकॉर्ड 2 सेकंड के अंतर से तोड़ दिया. इसके साथ ही उन्होंने इस साल होने वाले एशियन गेम्स के लिए भी क्वालीफाई कर लिया है. रेस में सावन 20वें नंबर पर रहे. इथियोपिया के गुए इदेमो अदोला ने 2:03.54 के समय के साथ रेस जीती. भारत के ही टी. गोपी सावन से तीन पायदान नीचे 23वें स्थान (2:13:16) पर रहे.

Advertisement
आखिरी 20 मीटर कितना मुश्किल था?

सुनने में भले ही रिकॉर्ड शानदार लगे, लेकिन सावन के लिए ये रेस बिल्कुल आसान नहीं थी. रोटरडैम में ठंडी हवाएं चल रही थीं, जिसके वो आदी नहीं थे. मैराथन धावक अक्सर शरीर को ठंडा रखने के लिए सिर पर पानी डालते हैं. सावन ने भी यही किया. लेकिन उन्हें अंदाजा नहीं था कि हवा इतनी सर्द होगी.

सावन ने खुद अपनी इस भयंकर लड़ाई का किस्सा द इंडियन एक्सप्रेस को बताया. उन्होंने कहा,

मेरा टारगेट 2:09:00 का था, इसलिए नेशनल रिकॉर्ड तोड़ना मेरे दिमाग में था. 35 किलोमीटर तक सब ठीक था, कोर्स फ्लैट था. लेकिन फिर ठंडी हवाएं चलने लगीं. आखिरी 2 किलोमीटर में मेरा सिर ऐसा लगा जैसे जम गया हो.

Advertisement

उन्होंने आगे बताया,

रेस खत्म होने में बस 20 मीटर बचे थे और मैं ठंडी हवा के असर से दो बार गिर पड़ा. मैं मिनी-ब्लैकआउट जैसी स्थिति में था. किसी तरह खुद को संभाला और रेस पूरी की. फिनिश लाइन पर एक वॉलंटियर ने मुझे उठने में मदद की.

कौन हैं सावन बरवाल?

सावन एक साधारण बैकग्राउंड से आते हैं. उनके पिता एक कार ड्राइवर हैं. सावन फिलहाल देहरादून में सेना में पोस्टेड हैं और पुणे के आर्मी स्पोर्ट्स इंस्टीट्यूट (ASI) से अटैच हैं. इसके साथ ही वो रिलायंस फाउंडेशन के प्रोजेक्ट 2:09 के अहम सदस्य भी हैं. इस प्रोजेक्ट का नाम ही इसलिए 2:09 है क्योंकि इसका लक्ष्य किसी भारतीय धावक को 2 घंटे 9 मिनट में मैराथन पूरी करते हुए देखना है.

कोच ने क्या बताया?

सावन के कोच अजित मार्कोस बताते हैं कि जब चार साल पहले सावन का VO2 Max टेस्ट (ऑक्सीजन खींचने की क्षमता) किया गया था, तो बिना किसी खास ट्रेनिंग के ही उनका स्कोर 79 ml/kg आया था. एलीट मैराथन रनर्स का स्कोर 80 के पार होता है. मार्कोस समझ गए कि इस लड़के के फेफड़ों में दम है.

कोच का मानना है कि सावन 40 किलोमीटर तक 2:09:14 की पेस से ही दौड़ रहे थे. अगर आखिरी 2 किलोमीटर में ठंडी हवाएं सावन का खेल नहीं बिगाड़तीं, तो वो 2 घंटे 9 मिनट का टारगेट भी छू लेते.

चोट के कारण पहले सावन अपनी डेब्यू मैराथन (वेलेंसिया) में नहीं दौड़ पाए थे. लेकिन अब शानदार वापसी करते हुए उन्होंने इतिहास के पन्नों पर अपना नाम लिखवा लिया है.

सावन कहते हैं,

46 साल पुराने रिकॉर्ड (2:12:00) का जो मेंटल ब्लॉक था, वो अब टूट गया है. मुझे यकीन है कि सिर्फ मैं नहीं, बल्कि भारत के और भी धावक अब इससे प्रेरणा लेंगे.

फौजी सावन ने दिखा दिया कि इरादे अगर फौलादी हों, तो 46 साल पुराना रिकॉर्ड भी घुटने टेक देता है.

वीडियो: IPL 2026 का मैच वेन्यू और शेड्यूल रिलीज़ हुआ, फाइनल कहां होगा?

Advertisement