सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की जोड़ी ने 6 सितंबर को इतिहास रच दिया. पहला गेम एकतरफा अंदाज में हारने के बावजूद उन्होंने जबरदस्त वापसी की और चाइना मास्टर्स खिताब अपने नाम कर लिया. उन्होंने चीन की हे जी टिंग और रेन जियांग यू की होम फेवरेट जोड़ी को 11-21, 21-13, 21-17 से हराया. ये रोमांचक मुकाबला 1 घंटा 10 मिनट तक चला.
पहला गेम हारे, फिर पलटी बाजी! सात्विक-चिराग ने घर में घुसकर चीनी जोड़ी को चटाई धूल
China Masters Final : भारत की स्टार शटलर जोड़ी Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty चाइना मास्टर्स के फाइनल में हार का सिलसिला तोड़ दिया. उन्होंने एक सेट गंवाने के बावजूद वापसी करते हुए He Ji Ting और Ren Xiang Yu की चीनी जोड़ी को फाइनल में हराया.

इस जीत के साथ ही सात्विक-चिराग ने अपना 10वां BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीत लिया. अब हे और रेन के खिलाफ उनका हेड-टू-हेड रिकॉर्ड 3-0 का हो गया है. सिंगापुर ओपन सुपर 750 जीतने के बाद ये इस सीजन का उनका दूसरा खिताब था. इससे पहले, दोनों थाईलैंड ओपन सुपर 500 के फाइनल में भी पहुंचे थे. वहीं, ये तीसरी बार था जब दोनेां चाइना मास्टर्स का फाइनल खेल रहे थे. इससे पहले, 2023 और पिछले साल उन्हें यहां फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था.
पहले गेम में हार को कैसे पीछे छोड़ा?फाइनल मुकाबले की बात करें तो, भारतीय जोड़ी पहले गेम में बिल्कुल लय में नहीं दिखी. उन्होंने शुरुआत में ही होम फेवरेट चीनी जोड़ी के खिलाफ 5 पॉइंट्स की लीड कंसीड कर दी. पूरे गेम के दौरान वो वापसी करने के लिए जूझते दिखे. ऐसा लग रहा था मानो आज उनका दिन ही नहीं हो. ये सेट उन्होंने एकतरफा अंदाज में 21-11 से गंवा दिया.
हालांकि, पहला सेट गंवाने से भारतीय जोड़ी नहीं घबराई. निश्चित तौर पर चीनी जोडी़ को लोकल सपोर्ट का एडवांटेज मिल रहा था. लेकिन, भारतीय जोड़ी ने होश नहीं गंवाया. इसके उलट दूसरे सेट में उन्होंने अपनी स्ट्रैटजी बदल दी. चिराग ने इसकी कमान संभाली. उन्होंने पहले गेम की तरह इस बार हे और रेन को नेट पर गेम स्पीड कंट्रोल नहीं करने दिया. चिराग ने शटल को जल्दी इंटरसेप्ट करना शुरू कर दिया. इससे, चीनी जोड़ी पर प्रेशर ट्रांसफर हो गया. उन्हें कोर्ट के बड़े हिस्से को कवर करने के लिए मजबूर होना पड़ा.
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पहले गेम में चीनी जोड़ी पूरे कोर्ट को कवर नहीं करना पड़ रहा था. अब उन्हें दोनों भारतीय शटलर पूरा कोर्ट कवर करने पर मजबूर कर रहे थे. इसके साथ ही अब भारतीय जोड़ी का डिफेंस भी पहले के मुकाबले मजबूत नज़र आने लगा. दूसरा गेम भारतीय जोड़ी ने 21-13 से जीता और मुकाबले को निर्णायक गेम में धकेल दिया.
डिसाइडिंग गेम में चीनी जोड़ी पर बनाया दबावनिर्णायक गेम काफी रोमांचक रहा. दोनों ही जोड़ी किसी को कोई मौका नहीं दे रही थी. ब्रेक टाइम तक भारतीय जोड़ी 10-़11 से पिछड़ रही थी. ये सिलसिला 17-17 तक चला. इसके बाद भारतीय जोड़ी ने लीड बनाई और मैच का मोमेंटम ही शिफ्ट कर दिया. चीनी जोड़ी के लिए पहले सेट में एडवांटेज बना होम क्राउड अब दबाव का कारण बन रहा था.
वहीं, सात्विक का आत्मविश्वास ज़बरदस्त था. अंत में जब मैच का नतीजा दांव पर था, उन्होंने फ्लिक सर्व से हे-रेन की जोड़ी को चौंका दिया. चीनी जोड़ी का जैसे ही संतुलन बिगड़ा, भारतीय जोड़ी ने इसका फायदा उठाकर पॉइंट अपने नाम कर लिया. अब भारतीय जोड़ी को मैच पॉइंट मिल गया था. उन्होंने फोकस बनाए रखा और पहली बार चाइना मास्टर्स का खिताब जीत लिया.
यह जीत कई मायनों में खास है. क्योंकि इस मुकाबले में भारतीय जोड़ी को दो बार इस टूर्नामेंट के फाइनल में मिली हार को पीछे छोड़ना था. चीनी जोड़ी को उनके घर पर हराना था. मैच में पहले गेम में मिली एकतरफा हार से उबरना था और मैच के बीच में अपनी रणनीति बदलनी थी. कमाल की बात ये है कि भारतीय जोड़ी ने ये सब किया.
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