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'दुनिया का बदला नक्शा मंजूर, लेकिन...', कश्मीर-लद्दाख पर भारत ने साफ बात समझा दी

भारत के Ministry of External Affairs ने UN के Equal Area World Map के समर्थन को लेकर एक स्टेटमेंट जारी किया है. खास तौर पर भारत के दो राज्यों Jammu Kashmir और Ladakh को लेकर अपना स्टैंड साफ किया है.

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भारत ने UN में वोट के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख को लेकर अपना स्टैंड साफ कर दिया. (इंडिया टुडे)

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  • भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में 'Correct The Map' प्रस्ताव का समर्थन किया, जो दुनिया के नक्शे को संतुलित और समान क्षेत्रफल वाले मैप प्रोजेक्शन के अनुसार दिखाने का उद्देश्य रखता है।
  • यह प्रस्ताव अफ्रीका के असली आकार को सही ढंग से प्रदर्शित करने के लिए टोगो के नेतृत्व में 164 देशों ने प्रस्तुत किया, जबकि अमेरिका ने इसे अस्वीकार किया था।
  • विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारत इस प्रोजेक्ट का समर्थन करता है लेकिन जम्मू-कश्मीर और लद्दाख जैसे संप्रभु क्षेत्रों को भारतीय नक्शे में साफ दिखाया जाना चाहिए।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations) के पारंपरिक नक्शे को ‘बदलने’ के प्रस्ताव का समर्थन किया, लेकिन अब इस मामले पर रविवार, 6 सितंबर को विदेश मंत्रालय की ओर से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को लेकर एक स्टेटमेंट जारी किया गया है. मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत नए नक्शे को समर्थन में है, लेकिन इसमें देश के संप्रभु क्षेत्र को भी साफ तौर पर दिखाया जाना चाहिए. इन क्षेत्रों में जम्मू-कश्मीर और लद्दाख राज्य शामिल हैं. इसलिए इन्हें भारत के आधिकारिक नक्शे की तहत ही दिखाया जाना चाहिए.

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MEA ने स्टेटमेंट जारी किया

मंत्रालय ने अपने स्टेटमेंट यह बात बिल्कुल साफ की है कि भारत किसी भी भ्रामक या गलत तरीके से प्रदर्शित किए गए नक्शे को स्वीकार नहीं करेगा. विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किए गए अपने पोस्ट में लिखा,

‘संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 4 सितंबर 2026 को एक प्रस्ताव को पारित किया, जिसका नाम ‘Correct The Map’ था. इस प्रस्ताव का उद्देश्य दुनिया के नक्शे को संतुलित रूप से बनाना और सभी क्षेत्रों को उनके सही आकार के साथ दिखाना है. खासकर अफ्रीका को. इसका मकसद दुनिया में ऐसे नक्शे के इस्तेमाल को बढ़ाना है, जो महाद्वीपों के असली आकार और सही अनुपात के बारे में बताते हैं.’

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MEA का स्टेटमेंट.

विदेश मंत्रालय की पोस्ट में आगे लिखा गया कि यह प्रस्ताव न तो किसी खास नक्शे को अपनाता है और न ही उसे आधिकारिक तौर पर मान्यता देता है. इसके अलावा यह नक्शा राजनीतिक सीमाओं, विवादित क्षेत्रों या स्थानों के नामों से जुड़ा मामला भी नहीं उठाता है. मंत्रालय ने आगे लिखा कि भारत ने इस प्रस्ताव को पूरा समर्थन दिया और मामले पर अपना रुख साफ रखते हुए इस बात पर जोर दिया कि वो समान क्षेत्रफल वाले नक्शे (Equal Area World Map) के सिद्धांत का समर्थन करता है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वो (भारत) किसी विशेष नक्शे, डिजाइन या देशों की सीमाओं को मान लेगा.  

164 देशों का समर्थन

दरअसल, अफ्रीकी देश टोगो के नेतृत्व में एक ‘Correct The Map’ कैंपेन चलाया गया था. इसके बाद दुनिया के नक्शे को बदलने से जुड़ा प्रस्ताव UN में पास हो गया. भारत समेत 164 देशों ने इस प्रस्ताव को अपना समर्थन दिया. जबकि, एकमात्र देश अमेरिका ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट किया था. प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य अफ्रीका के आकार को वर्ल्ड मैप पर सही ढंग से दिखाना था.वहीं, UN में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले राजनयिक रघु पुरी ने वोट के बारे में एक स्पीच दी. उन्होंने कहा,

‘हमारा मानना है कि इस प्रस्ताव को ‘इक्वल-एरिया मैप प्रोजेक्शन’ के इस्तेमाल और उस पर विचार करने के समर्थन के तौर पर समझा जाना चाहिए. न कि ‘इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन’ या किसी अन्य खास मैप प्रोजेक्शन के तौर पर देखा जाना चाहिए.’

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रघु पुरी ने अपनी स्पीच में भारत की ओर से इस प्रस्ताव को वोट देने का मकसद भी साफ-साफ बताया.

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