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पूर्व कप्तान ने कहा-अगर सूर्या पाकिस्तान में होते तो उन्हें खेलने का मौका नहीं मिलता!

टैलेंट तो ठीक है, लेकिन पॉलिसी का क्या करें?

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सूर्यकुमार यादव. फोटो: PTI

सूर्यकुमार यादव. इन दिनों क्रिकेट की दुनिया का हॉट-टॉपिक. श्रीलंका के खिलाफ़ तीसरे T20I में सूर्या ने 51 गेंदों पर 112 रन की नाबाद पारी खेल भारत को सीरीज़ जिताने में अहम रोल प्ले किया. सूर्या का T20I क्रिकेट में ये तीसरा शतक है. ये तीनों शतक पिछले छह महीने में आए हैं. जिसकी वजह से उनकी जमकर तारीफ़ हो रही है. सूर्या की कमाल की बैटिंग का ज़िक्र पाकिस्तान तक है.

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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सलमान बट ने कहा है कि अगर सूर्या हमारे (पाकिस्तान) यहां होते तो वो शायद ही कामयाब हो पाते. इसके लिए उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) की 30 से ज़्यादा उम्र वाले खिलाड़ियों की पॉलिसी का हवाला दिया है.

सलमान बट ने अपने यूट्यूब चैनल पर सूर्या के शतक को देख कहा,

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‘मैं हर जगह पढ़ रहा हूं कि वो इंटरनेशनल क्रिकेट में तब आए, जब वो 30 साल से भी ऊपर के थे. मैंने यही सोचा कि वो खुशकिस्मत हैं कि वो भारतीय हैं. अगर वो हमारे यहां पाकिस्तान में होते तो वो 30 साल से ऊपर वाली पॉलिसी का शिकार होते.’

सलमान बट ने आगे कहा, 

‘जो भी खिलाड़ी टीम में हैं उनके लिए ठीक है. लेकिन जो भी टीम में नहीं हैं, उनके पास कोई मौका नहीं है. सूर्यकुमार 30 साल की उम्र में टीम में आए, इसलिए वो एक अपवाद हैं.’

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दरअसल सूर्या ने मार्च 2021 में 30 साल की उम्र में इंग्लैंड के खिलाफ़ अपना इंटरनशनल डेब्यू किया था. उसके बाद से सूर्या ने भारत के लिए 44 T20 मुकाबले खेले हैं, जिसमें उन्होंने 43.1 की शानदार औसत से 1466 रन बनाए हैं. इस दौरान सूर्या का स्ट्राइक रेट तो और भी खतरनाक रहा है. सूर्या ने T20I में भारत के लिए 177.9 के स्ट्राइक रेट से बैटिंग की है.

सलमान बट जिस पॉलिसी का ज़िक्र कर रहे हैं. उसे लेकर रिपोर्ट्स में दावा किया जाता रहा है कि रमीज़ राजा के समय से PCB 30 साल से अधिक उम्र के खिलाड़ियों को नेशनल टीम में मौका नहीं देती. जिसकी वजह से कई बेहतरीन क्रिकेटर्स पाकिस्तान टीम तक नहीं पहुंच पाए.

खैर, अब रमीज़ राजा PCB अध्यक्ष नहीं हैं. शाहिद अफ़रीदी सेलेक्टर्स कमेटी के प्रमुख हैं. उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट टीम में ढेर सारे बदलाव किए हैं. जैसे टीम के सीनियर और 35 साल के विकेटकीपर बल्लेबाज़ सरफ़राज़ अहमद की टेस्ट टीम में वापसी करवाना. ऐसे में उम्मीद है कि वह इस पॉलिसी पर भी सही फैसला लेंगे.

 

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