6 जनवरी. साल 2008. जगह सिडनी. सचिन तेंदुलकर का पसंदीदा मैदान. जिसपर उनका ऐवरेज 100 के भी ऊपर का है. उस मैच में भी सचिन ने पहली इनिंग्स में 154 रन मारे थे. मगर यहां बात सचिन की नहीं होगी. सचिन इस मैच में घटी कई घटनाओं में से एक के चश्मदीद गवाह रहे. एक्सक्लूज़िव गवाह. ये टेस्ट मैच अपने खेल के कारण नहीं खेल के इर्द-गिर्द घट रही घटनाओं की वजह से जाना जायेगा. हमेशा. सचिन की उस 154 रन की इनिंग्स के बारे में शायद ही कभी बात की गयी हो. मगर हर किसी ने उस मैच में हुई अम्पायरिंग और लड़ाइयों को याद रखा. मैच की हाइलाइट्स कुछ यूं थीं:
1. साइमंड्स का आउट

ऑस्ट्रेलिया 193-6. पहली इनिंग्स. इशांत शर्मा गेंद में तेज़ी के साथ साथ गति भी ला रहे थे. आर पी सिंह 4 और हरभजन सिंह 2 विकेट ले चुके थे. इशांत विकेट के बिना थे मगर रन रोके हुए थे. बैट्समैन को जगाये रक्खा था. 47वें ओवर की चौथी गेंद. गेंद सीम पर पड़ी और टप्पे से उछल पड़ी. सीम पर पड़ने के बाद बाहर की ओर निकली. उछाल ने साइमंड्स को चौंका दिया. और साइमंड्स न चाहते हुए भी बल्ला ऊपर ले आये. एक मोटा किनारा लगा. भगत सिंह ने कहा था कि बहरों को सुनाने के लिए धमाके की ज़रुरत पड़ती है. मुझे यकीन है भगत सिंह उस एज से निकली आवाज़ से संतुष्ट होते. मगर दूसरे एंड पर खड़े स्टीव बकनर कुछ और ही सोच रहे थे. इशांत शर्मा दौड़ते हुए धोनी तक पहुंच गए. धोनी भी पूरी तरह आश्वस्त थे कि विकेट आ चुका है. मगर साइमंड्स अपनी ही जगह रुके रहे. स्टीव बकनर मुस्कुराते हुए नॉट आउट कहने लगे. इशांत शर्मा अपने लम्बे बालों से लदे सर को अपने हाथों में थामे आधे फ़ोल्ड हुए खड़े थे. अनिल कुम्बले अपनी कप्तानी की टोपी संभाले हुए, नकारात्मक मुद्रा में सर हिलाते हुए गेंद शाइन करने में लग गए. साइमंड्स उस वक़्त 30 रन पर थे. इनिंग्स खतम होने तक वो आउट नहीं हुए. 162 रन बनाये. मैन ऑफ़ द मैच भी बने. बाद में साइमंड्स ने बताया कि गेंद उनके बल्ले से लगी थी.
2. साइमंड्स को एक और जीवनदान

ऑस्ट्रेलिया 421-7. हरभजन सिंह की गेंद. डाउन द लेग. साइमंड्स फ्रंट फुट पर कमिट हो चुके थे. लेकिन गेंद चूंकि लेग स्टंप पर पड़ कर और भी बाहर हो रही थी, उन्होंने उसे जाने दिया. साइमंड्स का पर्सनल स्कोर था 148 रन. 200 गेंदें खेलने के बाद. गेंद को धोनी ने विकेट के पीछे कलेक्ट किया और गिल्लियां उड़ा दीं. किसी ने भी कोई रिऐक्शन नहीं दिया. मगर धोनी ने अपील की. धोनी की मारक क्षमता हर किसी को मालूम है. और ये बात भी कि धोनी अगर अपील करते हैं तो मामला गड़बड़ ही होता है. मगर बकनर ने इन सभी बातों को किनारे रखते हुए नॉट आउट क़रार दे दिया. आम तौर पर स्टम्पिंग और रन आउट्स के केस में अम्पायर थोड़ा सा भी टाइट मामला होने पर अम्पायर सीधे थर्ड अम्पायर के पास पहुंच जाते हैं. मगर बकनर ने अपने ही लेवल पर मामले को खारिज कर दिया. रीप्ले में मालूम चला कि अगर थर्ड अम्पायर के पास डिसीज़न लेने के लिए भेजा जाता तो साइमंड्स आउट हो जाते.
3. पोंटिंग का आउट जो नॉट आउट दिया गया

ऑस्ट्रेलिया 45-2. पहली इनिंग्स. 14वां ओवर. पहली गेंद. सौरव गांगुली अपने छोटे से रन अप के साथ पूरी ताकत झोंक कर 110.2 किलोमीटर प्रति घंटे की गेंद फेंकते हैं. डाउन द लेग. पोंटिंग बल्ला फेंक देते हैं. रास्ते में एक आवाज़ आती है. ठक! अगली आवाज़ भी वैसी ही. मगर वो गेंद के धोनी के दस्ताने में जाने की आवाज़ थी. सारे प्लेयर्स भाग कर गांगुली की ओर पहुंचते हैं. गांगुली उड़ान भरने को तैयार थे. मगर अम्पायर अपनी जगह खड़े रहे. आउट नहीं दिया. इस बार अम्पायर स्टीव बकनर नहीं मार्क बेंसन थे. पोंटिंग खड़े रहे. मैच आगे बढ़ा. पोंटिंग ने 55 रन बनाये.
4. के आई अब थर्ड अम्पायर की बारी
ऑस्ट्रेलिया 238-6. पहली इनिंग्स. साइमंड्स स्ट्राइक पर. गेंद कुम्बले के हाथ में. कुम्बले की गुड लेंथ गेंद जो साइमंड्स को आगे खींच लाई. मगर बल्ले को मिस कर गयी. धोनी ने अपनी आदतानुसार गिल्लियां बेहद जल्दी में बिखेर दीं. अपील हुई. मामला थर्ड अम्पायर के पास पहुंचा. हर ऐंगल से देख कर मालूम चल रहा था कि साइमंड्स का पैर हवा में था और तब ही धोनी ने गिल्लियां उड़ा दी थीं. हर कोए श्योर था कि साइमंड्स 48 रन पर आउट हो जायेंगे. लेकिन नहीं. स्क्रीन पर लिखा हुआ आया - नॉट आउट.
5. साइमंड्स को एक और फ़ेवर

इंडिया बैटिंग कर रही थी. दूसरी इनिंग्स. 115-3. साइमंड्स गेंद फेंक रहे थे. 34वां ओवर. पहली गेंद. द्रविड़ डिफेंसिव गेम खेल रहे थे. जो उनकी ताकत है. गेंद ऑफ स्टम्प के बाहर पाकर द्रविड़ ने उसे छोड़ने की सोची. मगर स्टंप्स कवर कर लिए और बल्ले को अपने पैड के पीछे छुपा लिया. गेंद उनके पैड को हल्का सा रगड़ते हुए चली गयी. गिलक्रिस्ट ने गेंद पकड़ते ही उछल कर जश्न मनाना शुरू कर दिया. साथ ही साइमंड्स भी शामिल हो गए. स्टीव बकनर ने फिर से डिसीज़न ऑस्ट्रेलिया के फेवर में दे दिया. राहुल द्रविड़ आउट.
6. गांगुली की खराब किस्मत

इंडिया की दूसरी इनिंग्स. 41वां ओवर. 137-5. ब्रेट ली के हाथ में गेंद. ओवर की दूसरी. गांगुली ने गेंद को हलके हाथों से खेलना चाहा मगर गेंद उनके बल्ले का किनारा लेते हुए स्लिप्स में खड़े माइकल क्लार्क के पास पहुंची. क्लार्क ने गिरकर गेंद पकड़ी और कैच क्लेम किया. गांगुली खड़े होकर अम्पायर को देख रहे थे. अम्पायर मार्क बेंसन भी श्योर नहीं थे. उन्होंने क्लार्क से पूछा. क्लार्क ने कहा कि गांगुली आउट हैं. अम्पायर ने आउट दे दिया. ऐसे मसलों में वैसे तो अम्पायर को थर्ड अम्पायर के पास जाना होता है. मगर सीरीज़ से पहले हुए कॉन्ट्रैक्ट में एक बात ये भी थी कि ऐसी सिचुएशन में फील्डर का कहा माना जाएगा. जब ऐसा माना गया था उस वक़्त नहीं सोचा गया था कि कोई स्पिरिट ऑफ़ क्रिकेट के खिलाफ़ जाकर हरकत करेगा. उसी का खामियाजा गांगुली को भुगतना पड़ा. टीवी रीप्ले में साफ़ दिखा कि गांगुली आउट नहीं थे.
7. मंकी-गेट

इंडिया की पहली इनिंग्स में बैटिंग के दौरान हरभजन सिंह और साइमंड्स के बीच कुछ कहा सुनी हो गयी. उस कहा सुनी में बीच बचाव करने सचिन पहुंचे. और साइमंड्स की तरफदारी करते हुए हेडेन खड़े दिख रहे थे. दिन ख़त्म होने पर साइमंड्स ने मैच रेफ़री के पास अपील की कि हरभजन ने उन्हें रेशियली अब्यूज़ किया है. नस्लभेदी टिप्पणी. ये एक घनघोर क्राइम माना जाता है. मैच रेफ़री माइक प्रॉक्टर ने भज्जी को जवाब तलब किया. हरभजन पर 4 मैचों का बैन लगाया गया. बाद में हरभजन ने बताया भी कि उन्होंने असल में साइमंड्स को एक गाली दी थी. जिसकी शुरुआत 'तेरी मां की' से होती है. उस 'मां की' को साइमंड्स ने 'मंकी' यानी बंदर समझ लिया. इसी मामले की सुनवाई के दौरान सचिन एक गवाह के रूप में रेफ़री के सामने आये. क्यूंकि जब ये वाकया हुआ तब सचिन भज्जी और साइमंड्स के साथ मौजूद थे. और शिकायत कर दी. भज्जी पर लगे बैन के बाद खूब बवाल हुआ. अगले दिन इंडियन कैम्प ने ऐसे संदेश दिए जिससे लगने लगा कि टूर बीच में ही बंद हो जायेगा. बीसीसीआई ने आईसीसी से बात की और अपने भौकाल का भरपूर प्रदर्शन किया. हरभजन का चार मैचों का बैन 50% मैच फ़ीस कटने में बदल गया. बुरे डिसीज़न्स की पूरी कहानी यहां: https://www.youtube.com/watch?v=stRgOw2WETg
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