टीम इंडिया के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) निराश हैं. उनकी ये निराशा मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) को लेकर है. शास्त्री का मानना है कि शमी टेस्ट क्रिकेट को अभी बहुत कुछ दे सकते थे. लेकिन संन्यास के ऐलान से पहले उन्हें एक और मौका ही नहीं मिला. शास्त्री ने शमी की फिटनेस पर बार-बार उठ रहे सवालों पर भी तंज कसा. उन्होंने बंगाल के लिए शमी के वर्कलोड और दमदार प्रदर्शन का हवाला दिया. उन्होंने साफ कहा कि शमी अभी भी टॉप लेवल पर टीम के लिए कमाल कर सकते थे.
शमी के टेस्ट संन्यास पर भड़के रवि शास्त्री! आगरकर और सिलेक्टर्स को गंदा सुनाया
Md Shami Test Retirement : पेसर Md Shami के टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने पर पूर्व भारतीय कोच Ravi Shastri ने निराशा जताई. शास्त्री ने सिलेक्टर्स के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि बंगाल के लिए लगातार Ranji और Duleep Trophy खेल रहे शमी को टेस्ट में एक और मौका मिलना चाहिए था.

मोहम्मद शमी ने 6 नवंबर को टेस्ट क्रिकेट को अलविदा कह दिया. ठीक 13 साल पहले उन्होंने अपना डेब्यू किया था. अपने करियर में शमी ने 64 टेस्ट खेले और 229 विकेट झटके. लेकिन भारत के लिए उनका आखिरी टेस्ट तीन साल से भी पहले आया था. वो मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023 वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल था.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच दूसरे वनडे से पहले शास्त्री ने 'एक्स्ट्रा इनिंग्स' शो में शमी की बात की. उन्होंने कहा कि शमी अपने टेस्ट खाते में 30 से 40 विकेट और जोड़ सकते थे. शास्त्री ने कहा,
फिटनेस के चक्कर में हुआ शमी का नुकसान?यह बेहद दुखद है. जिस खिलाड़ी ने देश के लिए इतना शानदार प्रदर्शन किया, उसे अब विदा लेना पड़ रहा है. मुझे पक्का यकीन था कि वह 30 या 40 विकेट और निकाल सकते थे. उन्हें पिछले 12 महीनों में खेलना चाहिए था. शायद बतौर टेस्ट बॉलर उन्हें टीम में होना ही चाहिए था.
2023 वनडे वर्ल्ड कप के बाद शमी का करियर चोटों से जूझता रहा. फरवरी 2024 में उनके टखने की सर्जरी हुई. बाद में घुटने की दिक्कत भी सामने आ गई. इसी वजह से वह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांच टेस्ट मैचों के दौरे से बाहर हो गए. जनवरी 2025 में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट में वापसी की. इंग्लैंड के खिलाफ T20 और ODI सीरीज खेली. फिर चैंपियंस ट्रॉफी के सभी पांच मैचों में भी मैदान पर उतरे.
लेकिन 2025 में इंग्लैंड टेस्ट दौरे से ठीक पहले फिर पेच फंस गया. एक नई समस्या के चलते वह टीम से बाहर हो गए. चीफ सिलेक्टर अजीत अगरकर ने तब वर्कलोड का हवाला दिया था. उन्होंने कहा था कि शमी का वर्कलोड उस स्तर पर नहीं है, जहां होना चाहिए. मेडिकल स्टाफ ने भी 5 टेस्ट की सीरीज के लिए उन्हें न चुनने की सलाह दी थी.
वहीं, रवि शास्त्री ने जिम वाली फिटनेस पर सवाल खड़े कर दिए. उन्होंने कहा कि शमी तो मैच के दौरान भारी वर्कलोड संभालने का दम पहले ही दिखा चुके थे. शास्त्री बोले,
अगर आप मैच में 10 या 12 ओवर बॉलिंग नहीं कर सकते, तो जिम में फिट रहने का क्या फायदा? यहां आपके पास ऐसा बॉलर है, जो लगातार बॉलिंग कर सकता है. इसलिए मुझे थोड़ी निराशा है कि उसे एक और मौका नहीं मिला.
बवाल तब और बढ़ा जब उसी साल वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट सीरीज आई. शमी को फिर टीम में जगह नहीं मिली. अगरकर ने कहा कि उनके पास शमी की फिटनेस पर कोई साफ जानकारी नहीं है. उन्हें लगा कि शमी ने पर्याप्त प्रतिस्पर्धी क्रिकेट नहीं खेला है. इस पर शमी ने भी पलटवार किया. उन्होंने सीधा कहा कि अगर वह बंगाल के लिए चार दिन का क्रिकेट खेलने के लिए फिट हैं, तो 50 ओवर का क्रिकेट भी खेल सकते हैं.
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घरेलू क्रिकेट के आंकड़े दे रहे हैं शमी की गवाहीटीम इंडिया से बाहर होने के बावजूद शमी रुके नहीं. वह बंगाल के लिए लगातार पसीना बहाते रहे. 2026 दलीप ट्रॉफी में उन्होंने ईस्ट जोन के लिए तीन मैच खेले और 7 विकेट चटकाए. उनकी बदौलत टीम ने खिताब भी जीता. इसके बाद उन्होंने 2026-27 रणजी ट्रॉफी सीजन में भी जबरदस्त बॉलिंग की. पहले तीन मैचों में ही 14.00 के औसत से 14 विकेट उड़ा दिए. इसमें दिल्ली के खिलाफ 59 रन देकर 5 विकेट और महाराष्ट्र के खिलाफ 37 रन देकर 4 विकेट का स्पेल भी शामिल था.
शास्त्री ने शमी की फिटनेस का बचाव करते हुए इन्हीं आंकड़ों को सामने रखा. उन्होंने कहा,
मैंने उनकी फिटनेस को लेकर कई मीडिया रिपोर्ट्स सुनी हैं. लेकिन वह बंगाल के लिए हर मैच खेल रहे थे. वह 15 से 20 ओवर बॉलिंग कर रहे थे. अपनी फिटनेस साबित करने के लिए आप किसी खिलाड़ी से और क्या उम्मीद करते हैं?
पूर्व कोच ने एक और अहम बात कही. उन्होंने बताया कि बॉलर्स को अपनी लय बनाए रखने के लिए नियमित मैचों में बॉलिंग करने की जरूरत होती है. इसके लिए उन्होंने दिग्गज रिचर्ड हैडली और वसीम अकरम का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि कैसे ये दिग्गज पेसर हमेशा खेलने और लगातार बॉलिंग करने को तवज्जो देते थे.
वाइट-बॉल क्रिकेट में होगी शमी की वापसी?टेस्ट से संन्यास का मतलब ये कतई नहीं है कि शमी का इंटरनेशनल करियर खत्म हो गया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि वह वाइट-बॉल क्रिकेट खेलना जारी रखेंगे. यानी 2027 वनडे वर्ल्ड कप से पहले उनकी वापसी की उम्मीदें अभी जिंदा हैं. यह वर्ल्ड कप साउथ अफ्रीका, जिम्बाब्वे और नामीबिया में होना है.
भारत के लिए शमी ने अपना आखिरी मैच 2025 चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में खेला था. यह मुकाबला न्यूजीलैंड के खिलाफ था. उस टूर्नामेंट में शमी ने 5 मैचों में 9 विकेट झटके थे. वह वरुण चक्रवर्ती के साथ भारत के लिए संयुक्त रूप से सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले बॉलर रहे थे.
शास्त्री का मानना है कि शमी को अपना करियर खत्म नहीं मानना चाहिए. बल्कि खुद को पूरी तरह तैयार रखना चाहिए. व्यस्त इंटरनेशनल कैलेंडर में खिलाड़ियों को चोट लगना आम बात है. अगर भारत का कोई मुख्य पेसर बाहर होता है, तो शमी का अनुभव बहुत काम आएगा. शास्त्री ने कहा,
मान लीजिए वह अच्छी फॉर्म में हैं और उनका IPL भी बढ़िया जाता है. तभी अचानक आपका कोई सीनियर बॉलर चोटिल हो जाता है, तो आपको अनुभव की तलाश होगी. ऐसे में आपके पास शमी जैसा खिलाड़ी मौजूद है.
फिलहाल शमी का पूरा फोकस बंगाल और फ्रेंचाइजी क्रिकेट पर है. शास्त्री को लगता है कि शमी में अभी काफी क्रिकेट बाकी है. टेस्ट क्रिकेट का चैप्टर पूरी तरह बंद करने से पहले, शमी को एक आखिरी मौका जरूर मिलना चाहिए था.
वीडियो: मोहम्मद शमी ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास क्यों ले लिया?












