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बेवकूफों, पाकिस्तानी क्रिकेट टीम पर ये कैसा बैन लगाया है?

पाकिस्तानी टीम ने मैदान पर पुशअप लगा दिए, तो बवाल मच गया.

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फोटो - thelallantop
पाकिस्तानियों, क्रिकेट खेलने ही क्यों भेजते हो? खाली नमाज ही पढ़वा लो. इंग्लैंड में लार्ड्स के मैदान पर पाक क्रिकेट टीम ने पुशअप्स किए और पार्लियामेंट तक बवाल कट गया. पाकिस्तानी कब क्या कदम उठा लें, ये तो उनको भी नहीं पता. इस डायलॉग में 'उनको' की जगह लिखता तो कुछ और ही मगर क्या फायदा, किसी को फतवा जारी करने की जहमत क्यों दूं. पाकिस्तान क्या है, ये तो लोगों की समझ में आता नहीं, अगर उसका नाम 'बेदिमाग' रख दिया जाए, तो लोग जल्दी समझ जाएं. अब ये ही देख लो. जुलाई में पाकिस्तानी क्रिकेट टीम इंग्लैंड से टेस्ट मैच खेलने गई. लॉर्ड्स का मैदान था. जीतने के बाद पाकिस्तानी टीम ने मैदान पर पुशअप लगा दिए. लग गई पाकिस्तानी कट्टरपंथ को मिर्चें. मामला पार्लियामेंट तक पहुंच गया. कहने लगे 'जी पुशअप क्यों लगाए? अगर कामयाबी का जश्न ही मनाना था तो फिर नवाफिल पढ़ लेते.' नवाफिल भी एक तरह की नमाज ही होती है, जिसको पढ़ना वाजिब मतलब जरूरी तो नहीं, लेकिन अगर पढ़ा जाए तो सबाब मिलता है. पाकिस्तान-इंग्लैंड के बीच जुलाई में लॉर्ड्स में टेस्ट मैच खेला गया. मैच में 16 जुलाई को मिस्बाह उल हक ने शानदार शतक पूरा किया और क्रिकेट का 'मक्का' माने जाने वाले ग्राउंड पर 10 पुशअप्स किए थे. मैच खत्म होने के बाद मिस्बाह ने बताया था. 'मैंने एबटाबाद में आर्मी के लोगों को वादा किया था कि जब भी मैं इंग्लैंड में शतक लगाऊंगा तो पूरे 10 पुशअप्स करूंगा.' जब पाकिस्तान ने मैच जीता तो पूरी टीम ने एक साथ पांच पुशअप्स लगाए. और वो ऐसे ही नहीं था. वहां बाकायदे आर्मी की तर्ज पर सावधान होने को कहा गया, पुशअप्स लगाये गए और फिर झंडे को सलामी दी. मामला पाकिस्तान की पार्लियामेंट में पहुंच गया. क्योंकि शांति से कुछ हो जाए, ऐसा पाकिस्तानी भला कैसे होने देंगे. pakistan team बुधवार को जिरह हुई. उसमें ऐसी बातें हुईं कि सुनके भी हंसी आ जाए. पीसीबी की एग्जीक्यूटिव कमिटी के चेयरमैन नजम सेठी ने नेशनल असेंबली कमिटी को बताया कि मिस्बाह उल हक़ ने आर्मी के लिए पुशअप्स किए थे. क्योंकि वो अपनी फिटनेस दिखाना चाहते थे. आर्मी के ट्रेनर्स ने काकोल में पाकिस्तानी टीम को फिटनेस की ट्रेनिंग दी थी. तभी मिस्बाह ने वादा किया था कि अगर वो इंग्लैंड के खिलाफ शतक लगायेंगे तो पुशअप्स मारेंगे.  पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज के मेंबर राणा मुहम्मद अफज़ल ने खिलाड़ियों के पुशअप्स करने पर ऐतराज़ जताया. कहा कि आखिर मिस्बाह उल हक़ और टीम पुशअप्स करके किसको पैगाम देना चाहते थे. खिलाड़ी जीतकर तो पुशअप्स करते हैं, लेकिन हारने पर खामोश क्यों हो जाते हैं. अब मोहम्मद आसिम नजीर की भी सुन लो. ये भी नवाज शरीफ की पार्टी से हैं. डॉन न्यूज़ के मुताबिक, आसिम बोले, 'उछलना कूदना अच्छा है, लेकिन पुशअप्स करने के बजाए खिलाड़ी कामयाबी पर नवाफिल अदा करते तो ज्यादा बेहतर होता.' misbah ये अजीब-ओ-गरीब बातें दिमाग में घुस ही नहीं रही हैं. हारने पर खिलाड़ी खामोश न रहें, तो क्या करें? जश्न मनाएं? फिर तो उन्हें गद्दार ठहरा दिया जायेगा. फिर और फ़तवे जारी होंगे. जीतने पर जश्न मनायें तो दिक्कत. नवाफिल क्यूं नहीं पढ़ा? राणा जी माफ़ करना, नेता बन गए मगर अक्ल बेचकर.  वाह क्या खूबसूरत अल्फाज़ कहे मियां ने. मन कर रहा है एक मस्जिद बनवाकर मियां आसिम को पार्लियामेंट से निकालकर उस मस्जिद का इमाम बना दूं. और फिर मियां अपनी क्रिकेट टीम को मैदान पर खेलते देखने या संसद में ऐसी बकवास करने के बजाए नमाज ही पढ़ाते रहें, क्योंकि ये ज्यादा बेहतर रहेगा. पहले खबर आई कि नजम सेठी ने मामले को तूल पकड़ते देख दो टूक कह दिया कि पीसीबी ने खिलाड़ियों पर पुशअप्स करने पर रोक लगा दी है, अब कोई भी खिलाड़ी मैदान पर पुशअप्स नहीं करेगा. लेकिन बाद में खबर आई कि नजम सेठी ने कहा है कि ऐसा कोई बैन नहीं है और खिलाड़ी सेंचुरी पूरी करने पर 100 पुशअप्स मारे.  वाह! और अल्लाह इन सभी बातों से ख़ुश होंगे? एक देश को रिप्रेज़ेंट करने वाला खिलाड़ी अपने ही देश की आर्मी से एक वादा करके आता है. सेंचुरी मारने पर पुशअप्स मारने का वादा. वो सेंचुरी मारता है तो वादा पूरा भी करता है. टीम मैच जीतती है तो पुशअप्स करती है. और आपने ऐसे वादा पूरे करने वालों पर बैन लगा दिया? ये धर्म के खिलाफ़ है या देश के खिलाफ़ है?  मैदान पर एक खिलाड़ी से नवाफिल पढ़वाना इतना ज़रूरी क्यूं लग रहा है? क्या ये ज़रूरी है कि हर दफ़े कुछ अच्छा घटने पर दुनिया को दिखाते हुए अपने ख़ुदा को शुक्रिया कहा जाए? या उसे पूजा जाये? कल को कोई ये भी कह सकता है कि खिलाड़ी विकेट लेने के बाद एक दूजे को हाई-फाइव क्यूं देते हैं? नवाफिल क्यूं नहीं पढ़ते? बैट्समैन सेंचुरी बनाने के बाद हेलमेट निकाल कर बल्ला उठाकर मैदान में चारों ओर क्यूं देखता है? नवाफिल क्यूं नहीं पढ़ता? या यही क्यूं न कहा जाने लगे कि कोई अल्लाह का बंदा खिलाड़ी क्यूं बनता है? मौलवी क्यूं नहीं बन जाता? घर में रहे और ताउम्र नवाफिल पढ़े. मेरे हिसाब से पाकिस्तान टीम के पुशअप्स लगाने पर बैन लगाने वालों को पॉलिटिशियन बनने की बजाय उम्र भर नवाफिल पढ़ना चाहिए था. अल्लाह करम फरमाता, इंसानियत दुआएं देती, क्रिकेट में चिक-चिक न होती, पाकिस्तान की हंसी न उड़ती. आई फ़ील सॉरी फॉर यू, पाकिस्तान क्रिकेट टीम.

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