भारतीय पैरा शूटिंग में भारी बवाल मच गया है. पैरा शूटर्स ने आरोप लगाए हैं कि पैरा एशियन गेम्स के सिलेक्शन में पैसों का खेल, जबरन वसूली और हेरफेर हुआ है. उन्होंने इसकी तुरंत और स्वतंत्र जांच की मांग की है. वहीं, दूसरी तरफ पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) ने इन दावों को सिरे से नकार दिया है. उनका कहना है कि टीम एकदम मेरिट के आधार पर चुनी गई है.
'सिलेक्शन के लिए मांगा अवॉर्ड से 20% कमिशन', पैरा शूटर्स ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप
Asian Games Selection : 18 से 24 अक्टूबर तक होने वाले आइची-नागोया पैरा एशियन गेम्स के लिए सिलेक्शन में भारतीय पैरा शूटर्स ने जबरन वसूली करने का आरोप लगाया. हालांकि, PCI ने इन दावों को खारिज कर दिया.

7 अक्टूबर को स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के डायरेक्टर जनरल (DG) को एक शिकायत दी गई. इसमें शूटर्स ने साफ कहा कि 18 से 24 अक्टूबर तक होने वाले आइची-नागोया पैरा एशियन गेम्स के सिलेक्शन में जमकर धांधली हुई है. आरोप है कि PCI के अधिकारियों और उनकी शूटिंग टेक्निकल कमेटी (STC) ने अवैध रूप से पैसे वसूले. उन्होंने खुलेआम भ्रष्टाचार किया और खेल मंत्रालय की गाइडलाइंस की धज्जियां उड़ाईं.
बात यहीं नहीं रुकी. शिकायत में जो दावे किए गए हैं, वो हैरान करने वाले हैं. कहा गया कि एथलीट्स पर दबाव बनाया जा रहा था कि अगर सिलेक्शन चाहिए, तो सरकार से मिलने वाले कैश अवॉर्ड का 20 प्रतिशत हिस्सा कमीशन के तौर पर देना होगा. साथ ही, अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने अपने चहेते शूटर्स को फायदा पहुंचाने के लिए इंटरनेशनल कोटा और क्वालिफाइंग स्कोर के साथ भी खिलवाड़ किया. शिकायत की कॉपी में बाकायदा लिखा गया है,
रैंकिंग नहीं, पैसों से बंटे स्लॉट?नेशनल टीम में चुने जाने की शर्त ही यही बना दी गई थी. एथलीट्स पर भारी दबाव डाला जा रहा है कि वो कमेटी के कुछ खास पदाधिकारियों को अपने मंजूर हुए सरकारी कैश अवॉर्ड का 20 फीसदी हिस्सा अवैध कमीशन के तौर पर दें.
इसके अलावा, शूटर्स का एक और बड़ा दावा है. उनके मुताबिक, इंटरनेशनल वाइल्ड-कार्ड स्लॉट एथलीट की रैंकिंग या परफॉर्मेंस देखकर नहीं, बल्कि पैसों के दम पर बांटे गए. एक बड़ा आरोप ये भी है कि भारत को कुल 15 इंटरनेशनल कोटा मिले थे. लेकिन इनमें से दो सिर्फ इसलिए सरेंडर कर दिए गए क्योंकि एथलीट्स ने अधिकारियों की पैसों की डिमांड पूरी करने से मना कर दिया था.
सिलेक्शन कमेटी पर ये भी इल्जाम है कि उन्होंने खेल मंत्रालय के नियमों को ताक पर रख दिया. क्वालिफाइंग स्कोर में मनमर्जी से बदलाव किए और तो और, बिना कोई लिखित वजह बताए पुराने सिलेक्शन पैनल को ही बदल दिया गया. अपॉइंटमेंट पर भी कड़े सवाल उठे हैं. शूटर्स का कहना है कि एक ऐसे व्यक्ति को टेक्निकल एक्सपर्ट और डायरेक्टर ऑफ ऑपरेशन्स बना दिया गया, जिसका किसी भी आधिकारिक कॉम्पिटिटिव शूटिंग इवेंट में हिस्सा लेने का कोई रिकॉर्ड ही नहीं है.
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इस पूरे बवाल में एक बड़ा नाम सामने आया है- संदीप कुमार का. संदीप एशिया में नंबर तीन के P4 50m फ्री पिस्टल SH1 शूटर हैं. उन्होंने सिलेक्शन में भारी पक्षपात का आरोप लगाया है. संदीप का दावा है कि एशिया में 14वें नंबर पर मौजूद शूटर रुद्राक्ष खंडेलवाल को चुन लिया गया. वहीं, एशिया के नंबर वन शूटर आकाश और खुद उन्हें दरकिनार कर दिया गया. संदीप ने कहा कि वो इन मनमाने फैसलों और नियमों की अनदेखी से बहुत दुखी हैं.
PCI अध्यक्ष ने क्या कहा?हालांकि, अब दूसरे पक्ष पर भी आते हैं. पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया (PCI) के अध्यक्ष और पैरालंपिक्स में दो बार के जैवलिन थ्रो गोल्ड मेडलिस्ट देवेंद्र झाझरिया ने इन सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है.
झाझरिया ने एक न्यूज एजेंसी से बातचीत में कहा,
सिलेक्शन बिल्कुल तय नियमों के हिसाब से हुआ है. किसी के भी साथ कोई भेदभाव नहीं हुआ है. यह सिलेक्शन प्रोसेस 100 प्रतिशत पारदर्शी, निष्पक्ष और खेल मंत्रालय की गाइडलाइंस के मुताबिक है.
संदीप के आरोप पर भी झाझरिया ने सफाई दी. संदीप ने कहा था कि कोच के एक करीबी शूटर को जगह देने के लिए उन्हें बाहर का रास्ता दिखाया गया. झाझरिया ने दो टूक कहा,
ये सभी आरोप पूरी तरह झूठे हैं.
कहानी का अंत अभी नहीं हुआ है. बागी शूटर्स ने चेतावनी दे दी है कि अगर उनकी बात नहीं सुनी गई तो वो कानूनी रास्ता अपनाएंगे. उनका कहना है कि वे संविधान के आर्टिकल 226 के तहत रिट ऑफ मैंडमस और कोर्ट की निगरानी में जांच करवाने के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाने पर विचार कर रहे हैं.
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