रायपुर में पहले खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स में कई अनोखी और प्रेरित करने वाली कहानी सामने आईं. ऐसी कहानियां जो बताती और सिखाती हैं कि अगर ठान लिया जाए तो जिंदगी की कोई भी मुश्किल रोक नहीं सकती. ऐसी ही कहानी है मिजोरम के वेटलिफ्टर इसाक मालसावमटलुआंगा की. 16 साल की उम्र में ही इस खिलाड़ी ने जिंदगी को उस कड़वी सच्चाई को जिया जो कि किसी के लिए भी एक बुरा सपना होता है. इतनी छोटी उम्र में ही उनके सिर से मां और बाप दोनों का साया उठ गया. इसके बावजूद उन्होंने खेलना जारी रखा है और अब गोल्ड मेडलिस्ट बने.
माता-पिता को खोया तो चाचा ने संभाला, इस वेटलिफ्टर की कहानी भावुक कर देगी!
इसाक के पिता हेमिंग मालसावमटलुआंगा की 2018 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. उसी साल इसाक ने अपने वेटलिफ्टिंग करियर की शुरुआत की थी.


इसाक ने खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स 2026 में पुरुषों के 60 किग्रा वर्ग में गोल्ड मेडल जीता. इसाक ने क्लीन एंड जर्क में शानदार प्रदर्शन किया. स्नैच में दूसरे स्थान पर रहने के बाद उन्होंने कुल 235 किग्रा वजन उठाकर गोल्ड मेडल अपने नाम किया. इस जीत का जश्न ने उन्होंने अपने चाचा के साथ मनाया जो कि उनकी जिंदगी की इकलौती सिल्वर लाइनिंग हैं.
पिता का हुआ निधनइसाक के पिता हेमिंग मालसावमटलुआंगा की 2018 में एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. उसी साल इसाक ने अपने वेटलिफ्टिंग करियर की शुरुआत की थी. छोटी उम्र में ही इसाक को एक बड़ा फैसला लेना पड़ा. उनके पास विकल्प था कि वेटलिफ्टिंग जारी रखे या घर में इकलौते बेटे होने की जिम्मेदारी निभाएं. वह समय याद करते हुए इसाक ने एक मीडिया एजेंसी को बताया,
उस समय मेरे बचपन के कोच सोमा ने मुझे बहुत प्रेरित किया और खेल जारी रखने के लिए कहा.
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इसाक ने खेलना जारी रखा. साल 2024 में हिमाचल प्रदेश में आयोजित यूथ नेशनल चैंपियनशिप में उन्होंने सिल्वर मेडल जीता जो कि उनके करियर के लिहाज से बहुत अहम पल था. लेकिन इसी दौरान उनपर फिर मुश्किलों का पहाड़ टूट पड़ा. इसाक की मां को कैंसर हो गया. इसने इसाक को मानिसक और आर्थिक तौर पर तोड़ दिया. इसाक के चाचा-चाची आइजोल के रामह्लुन वेंगथर इलाके में एक छोटे से रेस्टॉरेंट में काम करते थे. वह इसाक की हालत देखकर उसे साथ ले आए. ताकी उनकी पढ़ाई और खेल पर असर न हो. लेकिन, उसी साल कैंसर के चलते इसाक की मां का निधन हो गया. इसाक ने बताया,
टूर्नामेंट से पहले लगी चोटअपने माता-पिता दोनों को खोना. मुझे अंदर से पूरी तरह तोड़ गया था. मैंने लगभग तय कर लिया था कि खेल छोड़ दूंगा. लेकिन, मेरे चाचा और कोच ने एक बार फिर मुझे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स से पहले उनकी तैयारियों में भी चुनौतियां कम नहीं थीं. अभ्यास के दौरान उन्हें पीठ में चोट लग गई थी, जिसके चलते उनके कोच ने उन्हें टूर्नामेंट से दूर रहने की सलाह दी थी. लेकिन, इसाक ने हार नहीं मानी और रायपुर में मंच पर उतरकर अपने जीवन का बेस्ट परफॉर्मेंस किया. उसके साथ हर टूर्नामेंट में जाने वाले चाचा ने इसाक को बाहों में उठा लिया और दोनों ही काफी भावुक नजर आए. इसाक 2024 से इम्फाल स्थित स्पोर्ट्स ऑथोरिटी ऑफ इंडिया के नेशनल सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से ट्रेनिंग ले रहे हैं और साथ ही आइजोल से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विद्यालय के जरिए कक्षा 12 की पढ़ाई भी कर रहे हैं.
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