एशियन गेम्स 2026 में भारत ने 85 मेडल जीते. इनमें 21 गोल्ड मेडल शामिल हैं. पिछले एशियन गेम्स की तुलना में मेडल्स की संख्या में गिरावट आई है. गोल्ड की संख्या भी कम हुई. खेल मंत्रालय इस प्रदर्शन से नाखुश है. उसने खराब प्रदर्शन को लेकर सभी नेशनल फेडरेशंस के साथ रिव्यू मीटिंग की. बैठक में खिलाड़ियों की चोट से लेकर उनके प्रदर्शन तक पर चर्चा की गई.
मीराबाई चानू कब तक मेडल लाएंगी? खेल मंत्री ने गलत सवाल नहीं किया
भारत ने आइची नागोया एशियाई खेलों में 21 गोल्ड समेत 85 पदक जीते, जबकि हांगझोउ में भारत को 106 मेडल मिले थे. इसी कारण खेल मंत्रालय ने रिव्यू मीटिंग रखी थी.

यह रिव्यू मीटिंग खेल मंत्री मनसुख मांडविया की अध्यक्षता में हुई. चर्चा में खेल राज्य मंत्री रक्षा खडसे, भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) की अध्यक्ष पीटी उषा, खेल सचिव हरि रंजन राव और नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशंस के प्रतिनिधि मौजूद थे. एशियन गेम्स में एथलेटिक्स और बैडमिंटन जैसे खेलों में भारतीय खिलाड़ी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए. भारत को बैडमिंटन में केवल टीम इवेंट का मेडल हासिल हुआ.
न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक बैठक में खेल मंत्री ने नाराजगी जाहिर की. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि खिलाड़ियों को संसाधनों की कोई कमी नहीं थी. कोई भी स्पोर्ट्स फेडरेशन यह शिकायत नहीं कर सकती कि उसे फंड नहीं मिले. खिलाड़ियों की तैयारियों के लिए काफी पैसा दिया गया था. खेल मंत्री ने कहा कि स्पोर्ट्स फेडरेशंस को सिर्फ प्रेजेंटेशन देने के बजाय मैदान पर परिणाम देने होंगे.
रिपोर्ट के मुताबिक खेल मंत्री ने बैठक में कहा,
मीराबाई चानू कब तक हमारे लिए मेडल जीतेंगी? हमें 10 और मीराबाई बनानी हैं. हर फेडरेशन को यह जिम्मेदारी गंभीरता से लेनी होगी. हमें टैलेंट को पहचानना होगा. उन्हें सही ट्रेनिंग देनी होगी. तभी भारत का प्रदर्शन बेहतर होगा.
मीटिंग में फेडरेशंस ने भी अपना पक्ष रखा. खेल मंत्री ने उन्हें भविष्य के लिए अभी से योजना बनाने को कहा.
एथलेटिक्स फेडरेशन की ओर से आदिल सुमरिवाला मौजूद थे. जब वह एथलीट्स के प्रदर्शन पर बात कर रहे थे, तब उनसे खिलाड़ियों की चोटों को लेकर सवाल पूछे गए.
हर्डल एथलीट ज्योति याराजी और ट्रिपल जंपर प्रवीण चित्रावेल एशियन गेम्स गए थे. हालांकि दोनों चोट के चलते अपने-अपने इवेंट में हिस्सा नहीं ले पाए. पीटी उषा ने भी खिलाड़ियों की चोट को लेकर सवाल उठाए.
एथलेटिक्स में भारत ने पिछले एशियन गेम्स में छह गोल्ड मेडल जीते थे. हालांकि इस बार भारत के खाते में केवल एक ही गोल्ड मेडल आया.
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बैठक में बॉक्सर्स की काफी तारीफ हुई. इस बार भारतीय बॉक्सर्स ने ऐतिहासिक प्रदर्शन किया. इन एशियन गेम्स में भारत ने तीन गोल्ड मेडल हासिल किए. यह एशियाड में भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. भारतीय मुक्केबाजी महासंघ ने कहा कि सहयोग जारी रहने पर प्रदर्शन में सुधार होगा.
खेल मंत्रालय ने दिया था खर्च का ब्योराखेल मंत्रालय ने एशियन गेम्स से पहले ही खर्च का ब्योरा दे दिया था. एशियाड के लिए TAGG (टारगेट एशियन गेम्स ग्रुप) बनाया गया था. इसमें उन खिलाड़ियों को शामिल किया गया जिनसे एशियन गेम्स में मेडल की उम्मीद है. इस ग्रुप के खिलाड़ियों पर मंत्रालय ने काफी पैसा खर्च किया है. एनुअल कॉम्पिटिशन और ट्रेनिंग कैलेंडर के तहत एशियन गेम्स पर कुल मिलाकर 702.89 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे. इसके अलावा TOPS स्कीम के तहत 97.84 करोड़ रुपये भी तैयारी के लिए दिए गए थे.
सबसे ज्यादा 251.4 करोड़ रुपये खिलाड़ियों को इंटरनेशनल एक्सपोजर देने पर खर्च हुए. इसमें खिलाड़ियों के विदेशी कैंप्स, प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर आया खर्च शामिल है. वहीं डोमेस्टिक ट्रेनिंग पर 118.3 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे.
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