महेंद्र सिंह धोनी. गेम को अंत तक ले जाने में विश्वास करने वाले फिनिशर. लेकिन एक बार उनकी ऐसी पारी देख इंडियन टीम के पूर्व हेड कोच रवि शास्त्री को बहुत गुस्सा आया था. और अगले मैच से पहले शास्त्री ने टीम को एक कड़ी स्पीच दी थी, जो कि धोनी को टार्गेट करके दी गई थी. इस बात का खुलासा पूर्व फील्डिंग कोच आर. श्रीधर ने Coaching Beyond- My days with Indian Cricket में किया है.
जब धोनी की 'स्लो बैटिंग' से खौराए शास्त्री ने पूरी टीम को हौंक दिया!
ऐसी पारी मेरे रहते तो मत खेलना!
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ये बात इंडिया के इंग्लैंड दौरे की है. साल 2018 में टीम इंडिया, इंग्लैंड के खिलाफ़ तीन वनडे, तीन T20I और पांच टेस्ट मुकाबले की सीरीज़ खेलने उनके घर पहुंची थी. और 2-1 से T20I सीरीज़ जीतने के बाद टीम ने वनडे मैच का रूख किया था. नॉटिंघम में पहला वनडे जीतने के बाद, लॉर्ड्स में हुए दूसरे मुकाबले को टीम इंडिया 86 रन से हार गई.
इस मैच में धोनी ने 59 गेंदों में 37 रन बनाए. उनकी इस पारी में कुल दो चौके आए. धोनी के इस अप्रोच से रवि शास्त्री काफी नाराज़ हो गए. इस पारी को देख भड़के शास्त्री के बारे में बताते हुए श्रीधर ने लिखा,
‘जब तक विराट कोहली और सुरेश रैना बैटिंग कर रहे थे, हम मैच में थे. लेकिन जैसे ही हमने विकेट गंवाया, आखिरी 10 ओवर में एम.एस के पास कम्पनी देने के लिए सिर्फ गेंदबाज ही बचे थे. अपने स्वभाव से विपरीत, उन्होंने धीमी बल्लेबाजी शुरू कर दी. जब अंत के 10 ओवर में हमको 13 रन प्रति ओवर चाहिए थे. हम अगले छह ओवर में कुछ 20 रन के आस-पास ही बना पाए.
यही वो पारी थी, जब एम.एस ने 10 हजार वनडे रन पूरे किए थे, जो एक बहुत ही बड़ा माइलस्टोन है. हम सभी उसके लिए खुश थे, लेकिन हम यह भी जानना चाहते थे कि उन्होंने लक्ष्य तक पहुंचने की कोशिश क्यों नहीं की.’
अब सीरीज़ 1-1 की बराबरी पर थी. और लीड्स में तीसरा मुकाबला होना था. इस मैच से पहले शास्त्री ने धोनी को टार्गेट करते हुए एक स्पीच दी थी. इस स्पीच के बारे में बताते हुए श्रीधर ने अपनी बुक में लिखा,
‘रवि, इस हार से नाखुश थे. वह इस बात से नाराज नहीं थे कि हम 86 रन से हार गए, लेकिन हम कैसे मैच हार गए, कैसे हम बिना लड़े हार गए. हम लक्ष्य के लिए नहीं गए, हम बस दब गए. हेड कोच इस बात को जाने नहीं दे रहे थे. डिसाइडर मैच हेडिंग्ली में था. और इस मैच से पहले हमारी टीम मीटिंग हुई थी. पूरा स्क्वॉड वहां पर था, सपोर्ट स्टाफ के सभी मेम्बर्स भी.
और मैं जानता था कि रवि एक स्ट्रॉन्ग पॉइंट रखने वाले है. ऊंचे और कड़े शब्दों में उन्होंने कहा, ‘नहीं फर्क पड़ता कि आप क्या है, ऐसा कोई और मौका नहीं होना चाहिए जब हम मैच जीतने की कोशिश ना करते हुए हार जाएं. ये मेरे रहते हुए नहीं होगा. और अगर कोई ऐसा करता है तो मेरे रहते हुए ये उसका आखिरी गेम होगा. आप एक क्रिकेट मैच हार सकते हैं, इसमें शर्म वाली कोई बात नहीं है, लेकिन आप ऐसे नहीं हारेंगे.’
इस पूरी स्पीच के दौरान शास्त्री धोनी को देखते रहे और धोनी चुपचाप शास्त्री की बात सुनते रहे. इस पर आगे श्रीधर ने बताया,
‘एम.एस वहां, आगे बैठे हुए थे. और जबकि रवि के शब्द टीम के लिए थे, उनकी निगाहें एमएस पर टिकी हुई थीं. और पूर्व कप्तान की भी ये खासियत थी कि उन्होंने नज़रें नहीं चुराई. उन्होंने रवि शास्त्री के साथ आंखें मिलाकर रखीं. उन्होंने इधर-उधर नहीं देखा. क्योंकि उनकी काफी अच्छी क्वॉलिटी में से एक ये भी है कि वो आलोचना को झेलना जानते हैं. खास तौर पर जब उन्हें दिल से ये पता होता है कि वो ये डिजर्व करते हैं.’
हेडिंग्ली में हुए तीसरे मुकाबले में धोनी ने 66 गेंदों में 42 रन की पारी खेली थी. और ये मैच टीम इंडिया आठ विकेट से हारी थी.
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