खैर, ये तो सब जानते हैं. सबने मिशेल को ग्राउंड पर देखा है. हम ये बता रहे हैं कि क्रिकेट से रिटायरमेंट लेने के बाद मिशेल खलिहर नहीं बैठे. उन्होंने एक किताब लिखी है. अपने ही ऊपर. ऑटोबायोग्राफी. 'मिशेल जॉनसन रेज़िलिएन्ट' नाम से. Resilient शब्द का अर्थ होता है वो चीज़ जिसपर आप दबाव डालें तो वो वापस अपने शेप में आ जाये. और सच, ये मिशेल जॉनसन को कतई परिभाषित करता है. आपने क्रिकेट के मैदान पर जॉनसन से बड़ा फाइटर कम ही देखा होगा. उसकी गेंद पर एक बड़ा शॉट लगाने का मतलब होता था अगली गेंदों में अपने सबसे बुरे सपने को देखना. 24 अक्टूबर को ये बुक रिलीज़ हुई. वैसे तो इस किताब की कीमत लगभग 50 डॉलर है पर अभी सेल में है. इसलिए 40 डॉलर में मिल जाएगी. और हां ये ऑफर केवल 25 दिसंबर तक है. मिशेल ने इसे अपनी वाइफ, बिटिया और बेटे को समर्पित किया है. हम उनकी किताब से चुरा लाए हैं कुछ रोचक किस्से. पसंद आए तो किताब अमेज़न से ऑर्डर कर लीजिएगा.
1. विराट को बाउंसर फेंकने के बाद मिशेल लगभग बीमार पड़ गए थे
साल 2014. इंडियन टीम बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी और कार्लटन मिड त्रिकोणीय सीरीज़ के लिए ऑस्ट्रेलिया गई थी. पहला टेस्ट वैसे तो 4 दिसंबर को ब्रिसबेन में होना शेड्यूल हुआ था पर फिलिप ह्यूज की मौत के चलते वो 9 दिसंबर को एडिलेड में खेला गया. इस मैच में टीम की कमान विराट कोहली के हाथों में थी. टॉस ऑस्ट्रेलिया ने जीता और बैटिंग करने का फैसला लिया. और धो डाला इंडियन बॉलर्स को. 7 विकेट खोकर 517 रन बनाए और पारी घोषित कर दी.अब बारी इंडिया की थी. 111 रन पर दोनों ओपेनर पवेलियन में थे. बैटिंग के लिए पिच पर थे विराट कोहली. सामने थे मिशेल जॉनसन. उन्होंने कोहली का वेलकम बाउंसर से किया. बॉल उनके हेलमेट पर लगी. और वो सिकुड़ गए. दूसरे एंड पर पुजारा थे. उनसे पहले सारे कंगारू विराट की तरफ उनका हाल-चाल लेने दौड़ पड़े. खुद मिशेल उनके पास आए. वो अपने फेंके हुए बाउंसर से खुश नहीं दिख रहे थे.
किताब में वो लिखते हैं, 'फिलिप ह्यूज की मौत के बाद क्रिकेट को लेकर मेरा नजरिया बदल गया. मेरे लिए क्रिकेट को पहले जैसा प्यार करना मुश्किल हो गया था. फिलिप की मौत ने बहुत कुछ बदल दिया. कोहली को बाउंसर फेंकने के बाद मैं बहुत डर गया था. ऐसा लग रहा था कि मैं बीमार हो गया हूं.'उन्होंने लिखा है कि ह्यूज की मौत के बाद वो पहले वाले जॉनसन नहीं रहे. ड्रेसिंग रूम में टंगी ह्यूज की तस्वीर की तरफ वो देख नहीं पाते थे. जॉनसन का वो बाउंसर लिहाजा उस मैच का पहला बाउंसर नहीं था. इंडियन पेसर वरुण आरोन ने डेविड वार्नर को एक बाउंसर फेंका था. जिसे वार्नर ने जाने दिया. स्टेडिम में भरी भीड़ ने वरुण और वार्नर दोनों के लिए तालियां बजाई.
https://www.youtube.com/watch?v=HnEmoelacoE
2. साउथ अफ्रीका में जब डेविड वार्नर ने झाड़ी पुलिसगिरी
साल 2011. ऑस्ट्रेलिया, क्रिकेट के तीनों फॉर्मेट्स में साउथ अफ्रीका से भिड़ने उसके घर पर था. वन डे सीरिज चल रही थी. खेल से फुर्सत पाकर कुछ प्लेयर्स बाहर निकल पड़े. एक चाउमीन-मोमोज की दुकान के सामने कार रोकी. और कार में बैठे-बैठे ऑर्डर दे दिया. इन कुछ प्लेयर में वार्नर और जॉनसन भी थे. खिलाड़ी बाहर निकले और उनकी प्राइवेसी में खलल डालने के लिए बंदूकधारी न हो, ऐसा तो हो नहीं सकता. इनको भी सेक्योरिटी दी गई थी. पुलिसवाले उनके आगे-पीछे घूम रहे थे. मानो किसी अमीर बाप की कुंवारी बिटिया को प्रोटेक्ट कर रहे हों.सारे प्लेयर अपने-अपने चाउमीन-मोमोज का वेट कर रहे थे तभी वार्नर को खुराफात सुझा. उन्होंने सेक्योरिटी वाले पुलिस से उसका बैच मांगा. जिस कार में ये लोग बैठे थे उसके पीछे एक बाइक पर दो लोग बैठे थे. उनपर पुलिसगिरी झाड़नी थी वार्नर को. बैच मिलते ही कार से वो कूद पड़े.

Source : Reuters
जॉनसन लिखते हैं, 'वार्नर कार से निकलने के बाद सीधे उस बाइक वाले के पास गए. और उनसे ड्राइविंग लाइसेंस दिखाने बोला. पहले तो वो दोनों आदमी कंफ्यूज हुए कि एक ऑस्ट्रेलियन यहां पुलिसगिरी कैसे कर रहा है. पर बाद में उन्हें ये फनी लगा. और गुस्सा होने के बजाए वो हंसने लगे.'जॉनसन वार्नर को पहले से ज्यादा समझदार बताते हैं. क्योंकि क्रिकेट में उनकी छवि एक अग्रेसिव प्लेयर की थी. साल 2013 में उन्होंने इंग्लैंड के 'जो रूट' को नाइट क्लब में तमाचा जड़ दिया था. जिसके चलते उन्हें एशेज से बाहर कर दिया गया था.
3. संडास में शेन वॉटसन ने एक बार मिशेल का सर दे मारा था
साल 2000. जॉनसन और वॉटसन दोनों एक दफा 'नेबर्स' सीरियल देख रहे थे. उनके साथ और भी लोग थे. ऐड आया. फिर आया और बार-बार आया. हर ब्रेक में दोनों लड़ते थे. एक लड़ाई में जॉनसन को बाथरूम तक खींच ले गए. और उनमें से किसी एक ने जॉनसन का सर बाथरूम की दीवार पर दे मारा.वो बताते हैं, 'मुझे इससे बहुत गुस्सा आया. चोट वाली जगह लाल हो गई. किसी तरह खड़े होने के लिए मैंने एक की शर्ट पकड़ी. और उस बंदे ने भी मेरी शर्ट पकड़ रखी थी. मैंने मुक्का मारने के लिए अपना दायां हाथ उठाया और उसने भी वही किया. इतना होने के बाद हमने एक-दूसरे को देखा. वो वॉटसन था. मुझे लगता है कि हमने एक-दूसरे को देखा और सोचा, नहीं यार ये मेरा दोस्त है. मैं उसे नहीं मार सकता. और उसी वक्त मुक्का नीचे कर लिया. मैं ठीक से कह नहीं सकता कि मैं गुस्से में नहीं था. लेकिन इसका ख्याल मेरे दिमाग में काफी दिनों तक रहा. बाद में फिर हमने बात करना शुरु किया और हम दोबारा से दोस्त बन गए.'जॉनसन और वॉटसन को सीरियल देखने की आदत थी. रोज डिनर से पहले वो नेबर्स देखते थे. 2013 में ऑस्ट्रेलिया की टीम खेलने के लिए इंडिया आई थी. कोच ने सारे खिलाड़ियों से लिखित में उनका एजेंडा मांगा था. अगले दिन मीटिंग हुई. वॉटसन और जॉनसन को छोड़कर सारे प्लेयर्स ने कोच की बात को सर माथे लिया. कोच ने दोनों को टीम से बाहर कर दिया. इसी के बाद दोनों की दोस्ती और गहराई.
Source : Reuters
4. और एक झड़प इंग्लैंड के केपी के साथ
साल 2013-14. एशेज चल रही थी. मेलबर्न क्रिकेट ग्राउंड में. इंग्लैंड का स्कोर 5 विकेट पर 168 रन था. पीटरसन और बेयरस्टो खेल रहे थे. बॉलिंग की कमान जॉनसन के हाथ में थी. वो अपना रनअप लेकर गेंद फेंकने आए. पर जैसे ही गेंद फेंकने को थे, पीटरसन ने उन्हें रुकने का इशारा किया. लेकिन जॉनसन ने फिर भी गेंद फेंक डाली. मानो केपी को कह रहे हों कि इतनी मेहनत कर मैं बॉल डालने आया और तुमने ऐसे ही उसे खेलने से मना कर दिया. ये लो.इसपर केपी उंगली दिखाकर लगे जॉनसन को सुनाने. भला जॉनसन क्यों चुप रहते. उन्होंने भी सुना दिया. जॉनसन की अगली बॉल पर केपी ने एक रन चुरा लिया. और फिर दोनों के बीच काफी बहसबाजी हुई. बीच-बचाव करने के लिए क्लार्क को इसमें कूदना पड़ा. जॉनसन ने जो कुछ भी केपी को मैच के दौरान कहा उन्होंने अपने किताब में लिखा नहीं है.
कहते हैं, 'केपी ने हदें पार कर दी थी. कुछ ज्यादा ही पर्सनल कमेंट्स कर रहा था. उस वक्त मेरा मन उसको जोर से मारने का कर रहा था.'https://www.youtube.com/watch?v=VT1yZk_fEuY
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