लॉन बॉल्स्स (Lawn Bowls). हाल ही में संपन्न हुए बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 (Birmingham Commonwealth Games 2022) से पहले बहुत लोगों को इस खेल का नाम तक भी नहीं पता था. लेकिन कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में भारतीय महिला लॉन बॉल्स्स टीम ने इतिहास रच इस खेल को फेमस कर दिया. भारतीय दल के लिए लॉन बॉल्स्स टीम का ऐतिहासिक गोल्ड मेडल एक स्पष्ट आश्चर्य था.
लोग कहते थे हमें शक्ल देखकर चुना गया... चलते इंटरव्यू में रो पड़ीं कॉमनवेल्थ गोल्ड मेडलिस्ट!
दुर्व्यहार और उत्पीड़न का शिकार कॉमनवेल्थ गेम्स की गोल्ड मेडलिस्ट Lawn Ball टीम!


भारतीय दल की सबसे उम्रदराज महिलाओं की टीम लॉन बॉल्स में थी, लेकिन चारों महिलाओं ने उम्र को पीछे छोड़ते हुए फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 17-10 से हराकर गोल्ड मेडल जीत लिया. इससे पहले इंडिया ने लॉन बॉल्स्स का कोई मेडल नहीं जीता था. ये ऐतिहासिक मेडल जिताने वाली प्लेयर्स लवली चौबे, पिंकी, नयनमोनी सैकिया और रूपा रानी तिर्की थीं.
हालांकि विमेन लॉन बॉल्स्स टीम की महिला सदस्यों के लिए ये जीत हासिल करना आसान नहीं था. उनकी इस जीत के पीछे की वास्तविकता और संघर्ष ने उन्हें काफी प्रभावित किया है. इन महिलाओं ने अब अपने तमाम संघर्षों की कहानी सुनाई है. 'टेबल टॉक विद जो' के एक इंटरव्यू में लॉन बॉल्स टीम की तीन महिला खिलाड़ियों में से रूपा रानी तिर्की ने बताया कि उन्हें इस खेल में अपना करियर जारी रखने के लिए कितने संघर्ष और उत्पीड़न से गुजरना पड़ा.
‘हम बहुत डिप्रेस थे क्योंकि हमारे बारे में बहुत सारी चर्चाएं हुईं. यह मनोबल गिराने वाला था.’
वो इस वीडियो इंटरव्यू में ये सब बताते हुए रो पड़ती हैं. अपनी बात आगे रखते हुए वो बताती हैं,
'हम पर बहुत दबाव था. अगर हम कॉमनवेल्थ गेम्स से पदक के साथ नहीं लौटते, तो शायद अगले सीजन में हमारे लिए लॉन बॉल्स का कोई भविष्य नहीं होता.’
इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी बताया कि महिला टीम की खिलाड़ियों को महिला विरोधी और कई तरह के भद्दे कमेंट्स का भी शिकार होना पड़ा था. इस इंटरव्यू के दौरान टीम की दूसरी खिलाड़ी लवली भी ये सब सुनकर रो पड़ी और उन्होंने बताया,
‘हमें यहां तक कहा गया कि हमें टीम में सिर्फ ये देखकर चुना गया है कि हम कैसे दिखते हैं.’
उन्होंने आगे कहा,
‘हमारे अंदर कुछ था इसलिए हमने पदक जीता. क्या कोई भी हमें केवल हमारा चेहरा देखकर पदक देगा?’
भारत के लिए लॉन बॉल्स जैसे खेल में मेडल जीतने वाली इन भारतीय खिलाड़ियों के साथ हुआ भेदभाव और संघर्ष दुःखद है. और पदक विजेता खिलाड़ियों के साथ हुए इस प्रकार के दुर्व्यवहार हमारे देश के खेल जगत और उससे जुड़े लोगो पर तमाम सवाल खड़े करते हैं.
Lawn Bowl, जिस गेम में टीम इंडिया पहली बार फाइनल में पहुंची है वो आखिर खेला कैसे जाता है?




















