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गुस्से में भरे धोनी आउट होने के बाद भी मैदान में घुस आये और अम्पायरों से बहस करने लगे

धोनी को इस बात की कड़ी सज़ा भी मिली है.

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धोनी मैदान में घुस आए और अम्पायरों से बहस करने लगे थे.
आईपीएल 2019. मैच था चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के बीच में. ये मैच चेन्नई सुपर किंग्स ने जीत लिया है और आईपीएल में अभी भी अपनी बढ़त बनाई हुई है. पॉइंट्स टेबल में चेन्नई सबसे ऊपर है और मुंबई के ख़िलाफ़ एक मैच को छोड़कर और कोई भी मैच उसने हारा नहीं है. लेकिन हम बात करेंगे राजस्थान के ख़िलाफ़ खेले इस मैच की जो कि था जयपुर में. और सीधे चलेंगे मैच के आख़िरी ओवर में जिसकी वजह से पूर्व इंडियन कैप्टन और फ़िलहाल चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की आधी मैच फ़ीस काट ली गई है. मुद्दा क्या है, आपको बताते हैं.
आख़िरी ओवर यानी वो ओवर जिसमें चेन्नई को जीतने के लिए 18 रन चाहिए थे. इससे पहले राजस्थान ने पहले बैटिंग की और 156 रन बनाए. ऐसे टारगेट्स थोड़े ट्रिकी होते हैं क्यूंकि आप ठीक से ये नहीं कह सकते कि तेज़ खेलना है या आराम से. ऐसे में अक्सर टीमें बिखरती देखि गई हैं. ऐसा ही कुछ चेन्नई के साथ भी हुआ था. चेन्नई ने अपने पॉवरप्ले में 4 विकेट्स खो दिए थे जिसके बाद अम्बती रायडू और एमएस धोनी ने एक अच्छी पार्टनरशिप, 95 रनों की पार्टनरशिप बनाई. इसी पार्टनरशिप का नतीजा था कि मैच आख़िरी ओवर तक पहुंचा जिसमें चेन्नई को 18 रन चाहिए थे.
क्रीज़ पर धोनी और जडेजा खड़े हुए थे. बॉल बेन स्टोक्स के हाथ में थी और जडेजा ने पहली ही गेंद पर छक्का मारा. ये शॉट भी अपने आप में बड़ा ही अजीब शॉट था क्यूंकि इसे मारने के दौरान जडेजा गिर पड़े थे और उन्होंने पिच पर पड़े-पड़े ही गेंद को हवा में बाउंड्री के पार जाते हुए देखा. अगली गेंद पर एक सिंगल आया और अम्पायर ने नो बॉल का इशारा किया. दूसरी लीगल बॉल पर धोनी ने दो रन लिए. यानी 2 गेंदों में 10 रन बन चुके थे. तीसरी गेंद पर धोनी आउट हो गए. उन्हें स्टोक्स ने बोल्ड किया. इसके बाद बैटिंग करने के लिए आये मिशेल सैंटनर. सारी फ़साद की जड़ यही अगली बॉल ही थी. असल में बेन स्टोक्स ने यॉर्कर मारने के चक्कर में फ़ुल-टॉस गेंद फ़ेंक दी. और वो हाइट में कुछ ज़्यादा ही ऊपर चली गई. गेंद के फ़ेंके जाते ही अम्पायर ने नो बॉल के लिए हाथ उठा दिया. चेन्नई सुपर किंग्स के लिए ये जीवनदान से कम कुछ भी नहीं था. मैदान में नो-बॉल का सायरन भी बज गया. लेकिन फिर अम्पायर उल्हास गांधे ने लेग अम्पायर ब्रूस ऑग्जेनफ़ोर्ड की ओर देखा और उन्होंने कोई भी इशारा नहीं किया.
असल में सारी टेक्नीकेलिटी यहीं है. हाइट की नो बॉल का फ़ैसला लेग अम्पायर के पास से आता है. अगर वो कहेगा तो नॉन-स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े अम्पायर को नो-बॉल देनी ही होगी. अगर वो इशारा नहीं करेगा तो नो बॉल नहीं होगी. नॉन स्ट्राइकिंग एंड पर खड़े अम्पायर के पास हाइट की नो बॉल देने के कोई अधिकार नहीं होते हैं. ऐसे में उल्हास गांधे ने चेन्नई को नो बॉल देने से इनकार कर दिया और अगली बॉल फेंके जाने की तैयारी होने लगी. यहीं एमएस धोनी जागृत हुए और वो बाउंड्री लाइन से खड़े होकर चिल्लाते हुए दिखाई दिए. उन्हें एनिमेटेड होते हुए देख रवीन्द्र जडेजा को भी जोश आया और जब बेन स्टोक्स अपने बॉलिंग मार्क पर पहुंच चुके थे, तक लेग अम्पायर से जाकर बहसबाज़ी में घुस गए. इतनी देर में धोनी भी खुद को रोक नहीं सके और मैदान में घुस आये. वो अम्पायर तक पहुंचे और काफ़ी गुस्से भरे अंदाज़ में अपनी नाराज़गी जताई. वो लगातार ये कह रहे थे कि उल्हास ने नो बॉल का इशारा कर दिया था तो नो बॉल क्यूं नहीं दी जाएगी. ब्रूस ऑग्जेनफ़ोर्ड ने उन्हें ये समझाया कि हाइट की नो बॉल देने का अधिकार सिर्फ़ और सिर्फ़ उन्हीं के पास है और वो नो बॉल नहीं दे रहे हैं. इसके बाद धोनी ने कुछ देर और बहस की और फिर वो वापस चलते बने. फ़ाइनली नो बॉल नहीं दी गई.
अगली गेंद पर सैंटनर ने 2 रन लिए. आख़िरी गेंद पर चेन्नई को जीतने के लिए 4 रन चाहिए थे. स्टोक्स ने क्रीज़ के कोने पर गेंद फ़ेंकी लेकिन बॉल काफ़ी बाहर थी और वाइड करार दी गई. चेन्नई को एक और बॉल मिली और उन्हें जीत के लिए 3 रन चाहिए थे. सैंटनर ने आख़िरी गेंद पर छक्का जड़ दिया. चेन्नई ने ये मैच 4 विकेट्स से जीत लिया.
मैच के बाद धोनी को मैच रेफ़री ने तलब किया और धोनी ने अपनी गलती स्वीकारी. धोनी पर IPL के कोड ऑफ़ कंडक्ट के आर्टिकल 2.20 के तहत लेवल 2 के अपराध का चार्ज लगा था. इसके बाद उन्हें सज़ा सुनाई गई जिसमें उनकी आधी मैच फ़ीस काट ली गई.
आईपीएल 2019. अपने क्रिकेट के साथ साथ कंट्रोवर्सीज़ के लिए जाना जायेगा. जहां कई शानदार परफॉरमेंस दिखाई दे रही हैं वहीं अम्पायरिंग पर भी काफ़ी सवाल उठ रहे हैं. पंजाब और राजस्थान के बीच मैच में अश्विन के बटलर को मांकड़ रन आउट करने पर खूब बवाल उठा था.
IPL की शुरुआत में ही बवाल हो गया है.

इसके बाद बैंगलोर के ख़िलाफ़ मुंबई इंडियन्स के मलिंगा की आख़िरी ओवर की आख़िरी गेंद नो बॉल थी जो कि दी नहीं गई थी और मैच ख़तम होने के मिनट भर के भीतर ही उसे स्क्रीन पर दिखाया गया था. इस पूरे मसले पर विराट कोहली ने जम कर अम्पायर्स की आलोचना की थी और यहां तक कह दिया था कि अम्पायरिंग का लेवल क्लब लेवल जैसा है जबकि यहां आईपीएल खेला जा रहा है. इस particular मसले ने एक बार फिर से अम्पायरिंग और उसके इर्द गिर्द उठ रहे सवालों को फिर से सामने ला दिया है.
आख़िरी गेंद पर मलिंगा की नो बॉल
आख़िरी गेंद पर मलिंगा की नो बॉल

लेकिन अम्पायरिंग के साथ साथ एक बात ये भी ध्यान में रखनी होगी कि किसी भी कप्तान को कोई भी हक़ नहीं है कि वो एक ग़लत फ़ैसले पर बीच मैदान में चला जाये जबकि उसका मैदान में कोई भी काम ही नहीं है. और इसके बाद जाकर वो अम्पायरों से बहस करे या उनपर किसी भी प्रकार का फ़ैसला देने का दबाव बनाए. महेंद्र सिंह धोनी वही क्रिकेटर हैं जो कि क्रिकेट में ह्यूमन एरर के बारे में बात करते रहे हैं और जब तक मशीनें 100% सही फ़ैसला नहीं देतीं, उन्हें खेल में इस्तेमाल करना मुनासिब नहीं समझते हैं. इसी वजह से वो अपनी भारत की कप्तानी के दौरान DRS से हमेशा किनारा भी करते रहे थे. लेकिन इस मौके पर वो अपनी ही बात को काटते दिखे और उनका ऑन-फ़ील्ड बिहेवियर कतई उस महेंद्र सिंह धोनी की तरह नहीं लगा जो कि उन्हें कैप्टन कूल का नाम दिला चुका है.

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