आईपीएल का फायदा कई खिलाड़ियों को मिला.
आईपीएल. दुनिया की सबसे महंगी क्रिकेट लीग. लेकिन इस लीग में सिर्फ पैसा ही नहीं है. इस लीग से कितने ही खिलाड़ी जाने-पहचाने जाते हैं. कितने ही खिलाड़ियों का ये मनरेगा बना हुआ है. उन्हें भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने का मौका नहीं ही मिलेगा, ये सभी को मालूम है, लेकिन अपनी आईपीएल टीम के लिए वो वरदान बने हुए हैं और लगातार खेल रहे हैं. कितने ही नए खिलाड़ी आए और चमके. उन्हें घर-घर में जाना जाने लगा. लेकिन इसके साथ ही ये भी सच है कि सभी खिलाड़ियों के साथ सब कुछ अच्छा नहीं ही होता है. आईपीएल के ग्यारहवें संस्करण में कई खिलाड़ी उभरे. इसके साथ ही कई ऐसे खिलाड़ी भी रहे, जिनकी परफॉरमेंस ने काफ़ी निराश किया. उनसे उम्मीदें थीं. ऐसा लग रहा था जैसे वो अकेले अपने दम पर टीम को टाइटल दिलाएंगे. लेकिन वो ऐसा नहीं कर पाए. बात करते हैं ऐसे ही खिलाड़ियों की, जिनसे इस बार 'न हो पाया...'
1. गौतम गंभीर

इस लिस्ट में सबसे बड़ा नाम. जो आज यानी 22 मार्च, 2019 को भाजपा ज्वाइन कर चुके हैं. हालांकि जिस दाम में उन्हें खरीदा गया, दो बार ट्रॉफी जितवाने वाले कप्तान के हिसाब से वो दाम बहुत कम थे लेकिन ये तय माना जा रहा था कि गंभीर अपनी परफॉर्मेंस के दम पर दोबारा भौकाल टाइट कर लेंगे. ये उनका भारतीय क्रिकेट टीम में वापसी का एक ज़रिया भी बन सकता था, ऐसा भी शोर था. लेकिन सब गुड़-गोबर हो गया. अपने शहर की टीम में वापसी, उसकी कप्तानी, डोमेस्टिक की अच्छी फॉर्म, सब कुछ तैयार था. स्टेज सेट था. लेकिन सड़क कितनी भी मक्खन हो, टायर ही पंक्चर हो तो क्या कीजियेगा. गंभीर ने साल 2018 में कुल 6 आईपीएल मैच खेले जिसमें उन्होंने टोटल 85 रन बनाए. इस दौरान उनका औसत रहा 17 रन प्रति मैच और प्रति 100 गेंदों पर उन्होंने 96.59 की रफ़्तार से रन बनाए. 1 हाफ़ सेंचुरी और सिर्फ 8 चौके, 1 छक्का. वो गौतम गंभीर जिसने वर्ल्ड टी20 के पहले एडीशन के फाइनल में पाकिस्तान के ख़िलाफ़ खूंटा गाड़ दिया था और जब उमर गुल कहर बरपा रहा था, उसकी और अफरीदी की पिटाई की थी, ऐसी हालात में पहुंच गया कि बीच टूर्नामेंट उसे कप्तानी छोड़नी पड़ी और साथ ही प्लेइंग इलेवेन में अपनी जगह भी. दिल्ली की कमान श्रेयस ऐयर ने संभाली और दिल्ली की काया पलट गई. जिस तरह से टीम ने टूर्नामेंट के सेकंड हाफ़ में खेला, अगर दिल्ली शुरुआत से ही ऐसे खेल रही होती तो तस्वीर कुछ और हो सकती थी. भारतीय क्रिकेट में अब मामला कुछ पायदान ऊपर उठ गया है. यहां से, यानी टूर्नामेंट ख़तम होने से 2019 वर्ल्ड कप की तैयारियां ज़ोरों से शुरू होंगी. अगले आईपीएल से पहले ही हम वर्ल्ड कप देखेंगे. वर्ल्ड कप इंग्लैंड में होना है और भारतीय टीम का अगला दौरा भी इंग्लैंड का ही है. गंभीर इस टूर पर कम से कम खिलाड़ी के तौर पर नहीं ही जा पाएंगे. इस एक साल में किसी खिलाड़ी को एक्सपेरिमेंट के तौर पर टीम में लेकर उसपर काम किया जाए, ऐसा हो तो सकता है लेकिन कम से कम गंभीर का नाम उस लिस्ट में टॉप 10 में भी नहीं आता होगा. खासकर तब जब टीम के डिसीज़न लेने वाले दिमाग इस बात पर जोर कसते हैं कि नए खिलाड़ियों को मौका दिया जाए. इस लिहाज़ से ये आईपीएल गंभीर के लिए बहुत बड़ी पनौती साबित हुआ है जिसकी शुरुआत शायद कोलकाता टीम की सीट छोड़ने से हो गई थी.
2. ग्लेन मैक्सवेल

एक और दिल्ली का प्लेयर. दिल्ली की एक मुसीबत हमेशा से रही है, वो जिसपर भी भरोसा दिखाते हैं, दगा दे जाता है. चाहे राजनीति का खेल हो या खेल की राजनीति. खैर, मुद्दे से नहीं भटकते हैं, क्रिकेट पर ही रहते हैं. ग्लेन मैक्सवेल, बेहतरीन टी-20 बैट्समैन. लेकिन 2018 के आईपीएल में नहीं चला. 9 करोड़ में खरीदे गए और पूरे टूर्नामेंट में सिर्फ 9 छक्के मार पाए. मैक्सवेल ने पिछले टूर्नामेंट में 26 बार गेंद को हवा में ही बाउंड्री पार पहुंचाया था. 2017 में किंग्स इलेवेन पंजाब के लिए खेलते हुए मैक्सवेल ने 14 मैचों में 310 रन बनाए थे. पंजाब की कई जीतों में उनका हाथ था. लेकिन 2018 में दिल्ली के लिए उनकी परफॉरमेंस काफ़ी निराशाजनक रही. इस साल उन्होंने 12 मैच खेले जिसमें 169 रन ही बना पाए. 14.08 का एवरेज और 140.83 का स्ट्राइक रेट ग्लेन मैक्सवेल के नाम के आगे कतई ठीक नहीं लगता. गेंदबाज़ी में भी 2017 में साढ़े 6 रन प्रति ओवर से रन देने वाले मैक्सवेल इस बार सवा आठ रन प्रति ओवर की दर से रन दे रहे थे. इस बार उन्होंने 96 गेंदों में 132 रन दिए जबकि पिछले साल 114 गेंदों में 125 रन दिये थे.
3. जयदेव उनडकट

आईपीएल 2018 का दूसरा सबसे महंगा खिलाड़ी. 11.5 करोड़ रुपये में राजस्थान रॉयल्स ने खरीदा. लेकिन फ़ायदा क्या हुआ - निल बटे सन्नाटा. ये वैसा था जैसे वीसीआर आ जाए, पूरा गांव इकठ्ठा हो जाए लेकिन रात भर बिजली ही न आए और अगली सुबह वीसीआर वाला सब कुछ वापस ले जाने को आ जाए. हर मैच में जयदेव के हाथ से गेंद निकली और वो गेंद बाउंड्री पार पहुंची. इसके सिवा कुछ भी नहीं हुआ. उनडकट ने पिछले साल धोनी की कप्तानी में पुणे की टीम से खेला था जिसमें 12 मैचों में 24 विकेट लिए थे. इस दौरान उनकी इकॉनमी मात्र 7 रन प्रति ओवर की थी. मगर 2018 में उन्होंने 15 मैचों में मात्र 11 विकेट लिए जिस दौरान उन्होंने 9.65 रन प्रति ओवर की दर से गेंदबाज़ी की. जयदेव उनडकट एक प्रॉमिसिंग बॉलर थे. थे - भूतकाल में. अब नहीं हैं. इसके पीछे उनकी इस आईपीएल की परफॉरमेंस ही ज़िम्मेदार ठहराई जाएगी.
4. बेन स्टोक्स

आईपीएल का सबसे महंगा खिलाड़ी. एक बार फिर राजस्थान रॉयल्स के खाते में. ऑलराउंडर. 13 मैच खेले, सिर्फ 196 रन बनाए और 8 विकेट लिए. ये इनका दूसरा आईपीएल था. पिछले साल बेन स्टोक्स ने 12 मैचों में 316 रन बनाए थे और 12 विकेट लिए थे. इस बार बेन स्टोक्स का स्ट्राइक रेट मात्र 121.73 रनों का रहा. एक भी बार स्कोर 50 के पार नहीं पहुंचा. बेन स्टोक्स इंग्लैंड के प्लेयर हैं और उनके प्राइम ऑल-राउंडर हैं. हालांकि इंग्लैंड के लिए खेलते हुए भी उन्होंने 18 इनिंग्स में मात्र 192 रन ही बनाए हैं जहां उनका एवरेज सिर्फ 14.76 तक ही पहुंच पाया है. भारतीय पिचें वैसे भी बेन स्टोक्स को बहुत रास नहीं आई हैं. कम से कम टी-20 के मामले में तो कतई नहीं. कोलकाता में ही बेन स्टोक्स को वर्ल्ड कप फाइनल डिफेंड करने के लिए आख़िरी ओवर मिला था. कार्लोस ब्रेथवेट के सामने 19 रन थे और वेस्ट इंडीज़ ने वो विश्व कप जीता था. स्टोक्स ने इंडिया में खेलते हुए 9 टी20 इंटरनेशनल मैचों में मात्र 102 रन बनाए हैं जिस दौरान उनका एवरेज 17 का रहा है. इस दौरान बेन सिर्फ 6 विकेट ले पाए.
5. कीरोन पोलार्ड

जबसे आईपीएल में खेलना शुरू किया है, मुंबई की टीम में ही रहे हैं. एक ज़माना था जब पोलार्ड का आना सामने खड़े बॉलर की कुटाई का पर्याय होता था. लेकिन फिर आया साल 2018. मुंबई इंडियन्स ने कीरोन पोलार्ड को रीटेन किया यानी बाज़ार में उतारा ही नहीं. मुंबई ने उनपर विश्वास दिखाया लेकिन पोलार्ड अपनी परफॉरमेंस से उसकी कीमत नहीं अदा कर सके. साल 2018 में स्थिति ये हो गई कि बीच टूर्नामेंट में उन्हें कुछ मैचों के लिए बेंच पर बिठाया गया. कुल 9 मैच खेले जिसमें उन्होंने 133 रन बनाए. एक बार उनका स्कोर 50 रनों तक पहुंचा. 20 17 में पोलार्ड का एवरेज 29 के पार था जबकि 2018 में वो 19 पर ही रुका रहा. स्ट्राइक रेट के मामले में भी ये साल पोलार्ड के लिए सबसे बुरा साल रहा. पोलार्ड ने प्रति 100 गेंद, 133 रनों की दर से रन जुटाए. मुंबई की टीम मैच में भी वैसे ही खेलती आई है जैसे वो टूर्नामेंट में खेलती है. धीमी शुरुआत लेकिन अंत में जाकर तेज़ खेल. डेथ ओवर्स में मुंबई को पोलार्ड की ज़रूरत पड़ती है जिसमें वो बुरी तरह फ़ेल हुए और ये पॉइंट्स टेबल को देखकर साफ़ मालूम पड़ता है. पिछले साल की चैम्पियन टीम मुंबई इंडियन्स इस साल क्वालिफ़ायर्स तक भी नहीं पहुंच सकी.
ये भी पढ़ें:
ये राशिद हमें दे दे अफगान... पर क्या बोले वहां के ठाकुर?