इंडिया वर्सेज़ ऑस्ट्रेलिया. तीसरा वन-डे मैच. रांची में यानी धोनी के घर में. इंडिया ने ये मैच पुलवामा हमले में शहीद हुए CRPF के जवानों को सम्मान देने से शुरुआत की और मैच फंसा के हारने से दिन का अंत किया. ऑस्ट्रेलिया ने एक तगड़ा टार्गेट देकर इंडिया को शुरुआती झटके दिए और दूसरी इनिंग्स शुरू होते ही मैच अपनी जेब में कर लिया. लेकिन फिर एक अच्छे फ़ाइट-बैक के बाद कर चले हम फ़िदा जान-ओ-तन साथियों वाला मामला हो गया. देखते हैं वो फैक्टर्स जो इंडिया की हार के लिए ज़िम्मेदार रहे.
1. फ़ील्डिंग.
एक बात तो तय है - आज सभी इंडियन फील्डर हाथ में मक्खन चुपड़ कर आये थे. शुरुआत हुई शिखर धवन से जिन्होंने रवीन्द्र जडेजा की गेंद पर एरॉन फ़िंच का कैच छोड़ा. कैच आसान था और बैकवर्ड पॉइंट पर खड़े फील्डर के लिए एकदम मुफ़ीद था. लेकिन कैच ज़मीन को नसीब हुआ और फ़िंच को जीवनदान मिला. इसके बाद फ़िंच 100 रनों से मात्र 7 रन दूर ढहे. उन्होंने 99 गेंदों में 93 रन बनाए. शिखर धवन पर भी चीज़ें नहीं रुकीं. रवीन्द्र जडेजा, विजय शंकर, रोहित शर्मा, सभी ने घटिया फ़ील्डिंग में अपनी सामर्थ्यानुसार योगदान दिया.
2. तीसरा पेस बॉलर
हर्षा भोगले ने एक बड़े कायदे की बात कही. हालांकि वो हर बात कायदे की ही कहते हैं लेकिन इसे तो टीम इंडिया को अपने माथे पर गुदवा लेना चाहिए. भोगले ने कहा कि अगर ये मैच वर्ल्ड कप को ध्यान में रखते हुए खेले जा रहे हैं तो इंडिया को ये ज़रूर समझ लेना चाहिए कि मैच में तीसरा सीम बॉलर होना ही चाहिए. क्यूंकि ये बहुत ज़रूरी नहीं है कि दोनों ही अच्छी लय में बॉलिंग कर रहे हों. बैक-अप की ज़रुरत होती ही है. मोहम्मद शमी को चोट लगी और उन्हें बाहर जाना पड़ा. एक एंड से बुमराह बॉलिंग कर रहे थे. लेकिन शमी के जाने के बाद इंडिया के पास उन्हें रीप्लेस करने के लिए कोई भी ऑप्शन नहीं बचा था. ऐसे में शमी के जाने के बाद उनकी जगह बॉलिंग चेंज के तौर पर जडेजा को लाया गया. शमी जब मैदान पर वापस आये तो एक अच्छे बॉलर की इस कदर ज़रुरत थी कि आते ही उन्हें बॉलिंग पर लगा दिया गया. बाद में स्पेल ख़तम कर के वो फिर से बाहर चले गए.
3. ओपनर (पढ़ें शिखर धवन)
इंडिया के साथ ओपनिंग पार्टनरशिप की समस्या अब भी बरकरार है. शिखर धवन 'प्रेज़ेंट मैम' का जयकारा तो ज़रूर लगा रहे हैं लेकिन हर क्लास में होने के बावजूद नंबर नहीं ला पा रहे हैं. ऐसे में वर्ल्ड कप में उन्हें किस मुंह से लिया जाएगा, शोचनीय है. शिखर धवन ने पिछली 6 इनिंग्स में मात्र 3 बार दहाई का आंकड़ा पार किया है. इसमें भी एक भी बार 30 रन के आगे नहीं बढ़े हैं. शिखर धवन के साथ वर्ल्ड कप को देखते हुए सिर्फ़ यही एक बात जाती दिख रही है कि वो आईसीसी टूर्नामेंट्स के खिलाड़ी कहे जाते रहे हैं. इसके अलावा रोहित शर्मा भी पिछले 5 मैचों में रोहित शर्मा ने तीन बार सिंगल डिजिट स्कोर बनाए हैं और बस एक बार 30 रन के आगे बढ़े हैं. उस मैच में भी वो 37 रनों पर निकल लिए थे. सीरीज़ में अभी भी बढ़त इंडिया के पास है लेकिन असली लक्ष्य वर्ल्ड कप होना चाहिए और उसके लिहाज़ से ओपनिंग पार्टनरशिप एक बड़ा कंसर्न है.