पिछले दो सालों में भारत के कई एथलीट डोपिंग टेस्ट में फेल हुए हैं. इसमें एशियन गेम्स और कॉमनवेल्थ गेम्स खेल चुके खिलाड़ी भी शामिल हैं. आलम यह रहा कि भारत डोपिंग के मामले में नंबर वन बन गया. इसी के कारण अब वर्ल्ड एथलेटिक्स (World Athletics) ने बड़ा फैसला लिया है. इंटरनेशनल फेडरेशन ने भारत को डोपिंग के मामलों में ‘हाई रिस्क’ वाला देश करार दिया. यानी अब खिलाड़ियों पर सख्त एंटी डोपिंग नियम लागू होंगे. इंडियन एथलेटिक्स के लिए अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि इसका असर उनके आगे के प्लान्स पर भी पड़ेगा.
भारत डोपिंग में नंबर 1! वर्ल्ड एथलेटिक्स ने किया शर्मसार करने वाला ऐलान
एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) ने हाल में डोपिंग में दोषी पाए गए प्लेयर्स की लिस्ट जारी की थी. जिसमें भारत केन्या को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुंच गया था. भारत के 148 एथलीट और स्टाफ के सदस्य इस कारण निलंबित भी किए गए हैं.


एथलेटिक्स इंटीग्रिटी यूनिट (AIU) ने हाल में डोपिंग में दोषी पाए गए प्लेयर्स की लिस्ट जारी की थी. जिसमें भारत केन्या को पीछे छोड़कर पहले स्थान पर पहुंच गया था. भारत के 148 एथलीट और स्टाफ के सदस्य इस कारण निलंबित भी किए गए हैं.
AIU ने एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) को एंटी डोपिंग नियम 15 के तहत B कैटेगरी से A कैटेगरी में रख दिया है. AIU के अध्यक्ष डेविड हॉमन ने कहा,
भारत में डोपिंग की स्थिति लंबे समय से हाई रिस्क वाली रही है. डोपिंग को रोकने के लिए जो कोशिशें की जा रही हैं वह डोपिंग के रिस्क के हिसाब से कम हैं.
उन्होंने आगे कहा,
हालांकि, AFI ने भारत में डोपिंग में सुधारों की वकालत की है. लेकिन इसके बावजूद पर्याप्त बदलाव नहीं हुए हैं. AIU अब AFI के साथ मिलकर एथलेटिक्स खेल की अखंडता को बनाए रखने के लिए सुधार करने की दिशा में काम करेगा, जैसा कि हमने कैटेगरी A में शामिल अन्य देशों के साथ किया है.
भारत 2022 और 2025 के बीच एथलेटिक्स में एंटी डोपिंग नियमों के उल्लंघनों (ADRV) के मामले में शीर्ष दो देशों में शामिल रहा है. AIU के अनुसार भारत में 2022 में 48 ADVR (दूसरा स्थान), 2023 में 63 (दूसरा स्थान), 2024 में 71 (पहला स्थान) और 2025 में 30 ADVR (पहला स्थान) दर्ज किए गए.
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वर्ल्ड एथलेटिक्स में डोपिंग को रोकने के लिए AIU सभी देशों को रिस्क के आधार पर कैटेगरी में बांटता है. कैटेगरी A में उन देशों को रखा जाता है, जहां डोपिंग का जोखिम सबसे ज्यादा होता है. इन देशों में डोपिंग के लिए कड़ा रवैया अपनाया जाता है. B कैटेगरी के देशों में डोपिंग का जोखिम मीडियम स्तर का होता है. जबकि C कैटेगरी में शामिल देशों में डोपिंग का जोखिम सबसे कम होता है.
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