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प्रेग्नेंसी में क्या खाना है क्या नहीं? सारे डाउट आज ही क्लियर कर लीजिए

Pregnancy Care Guide: अक्सर लोगों को लगता है कि प्रेग्नेंसी में अनानास और पपीता जैसे कुछ फल नहीं खाने चाहिए. इस बात में कितनी सच्चाई है?

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प्रेग्नेंसी में मां का ध्यान रखना यानी होने वाले बच्चे का ख़्याल रखना

किसी भी कपल के लिए प्रेग्नेंसी उनकी ज़िंदगी का एक अहम फेज़ होता है. इस दौरान मां को सिर्फ अपना ही ख़्याल नहीं रखना होता, बल्कि होने वाले बच्चे का भी ध्यान रखना पड़ता है. इसके लिए तीन चीज़ें बहुत ज़रूरी है. डाइट, टेस्ट और संकेत. अगर मां की डाइट अच्छी होगी तो बच्चे को भी पोषण मिलेगा. इसलिए ये पता होना चाहिए कि प्रेग्नेंसी में क्या खाना है और क्या बिल्कुल नहीं? दूसरा है टेस्ट. प्रेग्नेंसी के दौरान कुछ खास टेस्ट करवाना ज़रूरी है, ताकि मां और बच्चे की सेहत पर लगातार नज़र रखी जा सके. 

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तीसरा, संकेत. प्रेग्नेंसी में कुछ ऐसे लक्षण दिख सकते हैं, जिन्हें नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए. आज हम आपको इन्हीं तीन चीज़ों के बारे में विस्तार से बताएंगे. डॉक्टर से समझेंगे कि प्रेग्नेंसी में डाइट और लाइफस्टाइल कैसी होनी चाहिए. प्रेग्नेंसी के दौरान क्या नहीं करना चाहिए. कौन-से टेस्ट्स ज़रूरी हैं और किन लक्षणों के दिखते ही तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए? 

प्रेग्नेंसी में डाइट और लाइफस्टाइल कैसी हो?

ये हमें बताया डॉक्टर सीमा मनुजा ने. 

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डॉ. सीमा मनुजा, डायरेक्टर, गायनेकोलॉजी, सर्वोदय हॉस्पिटल, सेक्टर-8 फरीदाबाद

डॉ. सीमा मनुजा के मुताबिक, फोलिक एसिड एक बहुत ज़रूरी विटामिन है. इसे प्रेग्नेंसी की शुरुआत या उससे पहले लेना शुरू करना चाहिए. इसके बाद किसी अच्छे गायनेकोलॉजिस्ट से मिलें. वो आपको सही सलाह देंगे और प्रेग्नेंसी प्लानिंग में मदद करेंगे. आमतौर पर प्रेग्नेंसी के दौरान डाइट का खास ध्यान रखना होता है. खासकर पहली तिमाही में अच्छी डाइट लेना बहुत ज़रूरी है. इस समय सही डाइट इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि कई दवाएं इस दौरान नहीं दी जा सकतीं. 

डॉक्टर ने बताया कि आप सीज़नल फल और सब्ज़ियां खा सकते हैं. अक्सर लोगों को लगता है कि अनानास, पपीता जैसे कुछ फल नहीं खाने चाहिए, लेकिन ऐसा नहीं है. कोई भी फल बुरा नहीं होता, बस हर चीज़ को संतुलित मात्रा में खाना चाहिए. आप मेवे और बीज भी सीमित मात्रा में खा सकते हैं. साथ ही, शरीर को हाइड्रेटेड रखना भी ज़रूरी है. उबकाई कम करने के लिए कई दवाएं होती हैं. रोज़ की आदतों में बदलाव करके भी इसे कंट्रोल किया जा सकता है. नींद और एक्सरसाइज़ भी ज़रूरी है. 

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प्रेग्नेंसी में कोई भी एक्सरसाइज़ बिना एक्सपर्ट की देखरेख के न करें

डॉक्टर ने बताया कि अगर आप पहले से कोई हल्की एक्सरसाइज़ करते रहे हैं, तो उसे जारी रख सकते हैं लेकिन भारी वज़न उठाने और ज़्यादा स्ट्रेस लेने से बचें. कोई नई या बहुत ज़्यादा भारी एक्सरसाइज अचानक शुरू न करें. हल्की एक्सरसाइज से शरीर फिट रहता है. उबकाई कम होती है और आप ज़्यादा स्वस्थ महसूस करते हैं. पहली तिमाही में थकान, ज़्यादा नींद और कम एनर्जी होना एक सामान्य बात है. इसमें घबराने की ज़रूरत नहीं है, बस रोज 7–8 घंटे की अच्छी नींद ज़रूर लें.

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उन्होंने बताया कि डाइट, एक्सरसाइज़ के अलावा सप्लीमेंट पर भी ध्यान दें. प्रेग्नेंसी में आयरन, कैल्शियम और प्रोटीन सप्लीमेंट लेना ज़रूरी है. इसका एक कारण ये है कि इस समय मां और बच्चे दोनों को पोषण चाहिए. दूसरा कारण ये है कि पारंपरिक इंडियन डाइट में अक्सर इन पोषक तत्वों की कमी होती है इसलिए डॉक्टर की सलाह से ये सप्लीमेंट्स लेना ज़रूरी होता है. इससे मां की सेहत बेहतर रहती है.

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सिगरेट, शराब से भ्रूण के विकास पर बुरा असर पड़ता है 

प्रेग्नेंसी के दौरान क्या नहीं करना है?

- सिगरेट, शराब, बहुत ज़्यादा मेहनत वाली एक्सरसाइज़ और स्ट्रेस से दूरी बनाएं.

- जंक फूड और बाहर का खाना कम से कम खाएं.

- बहुत ज़्यादा कैफीन (चाय, कॉफी) लेना भी इस दौरान सही नहीं है, इसे सीमित रखें.

- कोशिश करें कि पहली तिमाही ट्रैवल न करना पड़े.

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प्रेग्नेंसी में रेगुलरली डॉक्टर से मिलते रहना चाहिए 

प्रेग्नेंसी के दौरान कौन-से टेस्ट्स ज़रूरी?

ज़रूरी जांचों में सबसे पहले ब्लड टेस्ट आते हैं, जिससे मां की सेहत की सही जानकारी मिलती है. इसके अलावा, समय-समय पर अल्ट्रासाउंड भी किए जाते हैं. इससे भ्रूण की सेहत के बारे में पता चलता है. जैसे बच्चे में कोई कमी या समस्या तो नहीं है. ये भी पता चलता है कि बच्चे का विकास, वज़न और आसपास का पानी (एमनियोटिक फ्लूइड) सही है या नहीं. लेवल 1 और लेवल 2 अल्ट्रासाउंड से बच्चे की बनावट के बारे में ज़रूरी जानकारी मिलती है. आगे चलकर ग्रोथ अल्ट्रासाउंड्स से बच्चे की ओवरऑल हेल्थ का पता चलता है. ये सभी जांचें और अल्ट्रासाउंड समय-समय पर आपके डॉक्टर द्वारा बताए जाते हैं.

वैक्सीन लगवाना भी प्रेग्नेंसी का एक अहम हिस्सा होता है. ये वैक्सीन मां और बच्चे की सुरक्षा के लिए ज़रूरी हैं. कौन-सी वैक्सीन कब लगवानी है, ये गायनेकोलॉजिस्ट आपको बताएंगे.

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जिन महिलाओं को पहले से बीपी या शुगर की समस्या है, उनकी रेगुलर मॉनिटरिंग होनी चाहिए

किन लक्षणों के दिखते ही डॉक्टर से मिलें?

डॉक्टर सीमा मनुजा ने बताया कि प्रेग्नेंसी में ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर का नॉर्मल रहना मां और बच्चे दोनों के लिए बहुत ज़रूरी है. इसलिए बीपी और शुगर लेवल का खास ध्यान रखें. जिन महिलाओं को पहले से बीपी या शुगर की समस्या है, उनकी रेगुलर मॉनिटरिंग होनी चाहिए. ऐसे मामलों में डॉक्टर की सलाह से दवाइयां लेना और लगातार चेकअप करवाना ज़रूरी है. 

प्रेग्नेंसी के दौरान किसी भी समय ब्लीडिंग होना, चाहे शुरुआत में हो या बाद में, एक असामान्य लक्षण है. ऐसी स्थिति में तुरंत अपने डॉक्टर को जानकारी देना ज़रूरी है. BP बढ़ना, शुगर बढ़ना या थायरॉइड का असंतुलन होना, ये सभी मां और बच्चे के लिए रिस्की हो सकते हैं. इसके अलावा, पानी जैसा फ्लूइड निकलना. ब्लीडिंग होना. पेट में दर्द होना. बहुत ज़्यादा उल्टी आना. बुखार आना. शरीर पर चकत्ते जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत हॉस्पिटल जाना चाहिए

(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

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