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डोपिंग सुधार के बिना 2036 ओलंपिक का सपना अधूरा, ITA चीफ की भारत को चेतावनी

कोहेन के अनुसार, सिर्फ टेस्ट बढ़ाने से काम नहीं चलेगा. पूरे सिस्टम के मैनेजमेंट और गवर्नेंस (प्रबंधन) में सुधार की जरूरत है, ताकि एंटी-डोपिंग व्यवस्था ठीक बने.

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कोहेन ने कहा कि भारत में ITA के साथ पूरा सहयोग करने में अभी भी कुछ हिचकिचाहट है. (फोटो- PTI)

भारत 2036 ओलंपिक गेम्स की मेजबानी करना चाहता है. इसके लिए देश की सरकार भी तैयारी में लगी है. लेकिन इंटरनेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (ITA) के चीफ बेंजामिन कोहेन ने साफ चेतावनी दी है कि पहले देश को अपनी एंटी-डोपिंग व्यवस्था मजबूत करनी होगी. बिना सुधार के ओलंपिक होस्ट करना मुश्किल होगा.

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कोहेन ने हाल ही में 'द एथलेटिक' को दिए इंटरव्यू में कहा कि भारत में डोपिंग की स्थिति चिंताजनक है. ग्राउंड पर कई ऐसी खबरें आ रही हैं जो एंटी-डोपिंग सिस्टम के लिए खतरे की घंटी हैं. सबसे बड़ी समस्या ये है कि कुछ एथलीट डोपिंग टेस्ट करने वाले अधिकारियों से दूर भागते हैं. साथ ही, कुछ खिलाड़ियों को टेस्ट से पहले ही सूचना मिल जाती है, जो पूरी तरह गलत है.

उच्च स्तर पर चर्चा हुई

कोहेन ने बताया कि उन्होंने विंटर ओलंपिक्स के दौरान भारत की नेशनल एंटी-डोपिंग एजेंसी (NADA) और इंडियन ओलंपिक एसोसिएशन (IOA) के अधिकारियों से मुलाकात की थी. इसमें डोपिंग सुधार को मुख्य मुद्दा बनाया गया. उन्होंने साफ कहा कि अगर भारत 2036 ओलंपिक होस्ट करना चाहता है तो इसमें सुधार जरूरी है.

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इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) ने भी भारत को यही संदेश दिया है. कोहेन के अनुसार, सिर्फ टेस्ट बढ़ाने से काम नहीं चलेगा. पूरे सिस्टम के मैनेजमेंट और गवर्नेंस (प्रबंधन) में सुधार की जरूरत है, ताकि एंटी-डोपिंग व्यवस्था ठीक बने.

भारत सहयोग करने से बचता है

कोहेन ने आगे कहा कि भारत में ITA के साथ पूरा सहयोग करने में अभी भी कुछ हिचकिचाहट है. कई लोग इसे बाहरी दखल मानते हैं और सोचते हैं कि इससे ये स्वीकार होता है कि देश खुद अपनी डोपिंग समस्या नहीं संभाल सकता. लेकिन कोहेन का मानना है कि समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है.

अच्छी बात ये है कि भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन और खेल मंत्रालय अब सुधार के लिए तैयार दिख रहे हैं. वो ITA के साथ ज्यादा करीब आकर काम करना चाहते हैं. कोहेन ने कहा कि भारत के पास संसाधन (रिसोर्स) हैं और इच्छाशक्ति भी है. इसलिए सुधार बस समय की बात है.

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क्यों जरूरी है सुधार?

डोपिंग न सिर्फ खिलाड़ियों की सेहत बिगाड़ती है बल्कि खेल की निष्पक्षता को भी खत्म कर देती है. अगर भारत ओलंपिक होस्ट करता है तो दुनिया की नजर उसकी एंटी-डोपिंग व्यवस्था पर होगी. मजबूत सिस्टम के बिना अंतरराष्ट्रीय विश्वास नहीं मिलेगा.

भारत में पिछले कुछ सालों में कई डोपिंग मामले सामने आए हैं, जिससे देश की छवि खराब हुई है. अब समय है कि सरकार, खेल संगठन और एथलीट मिलकर इस पर काम करें. सख्त टेस्टिंग, पारदर्शी प्रक्रिया और खिलाड़ियों को जागरूक करना जरूरी है.

2036 ओलंपिक के लिए बिड करने में स्टेडियम, ट्रांसपोर्ट और बुनियादी ढांचा महत्वपूर्ण हैं, लेकिन असली चुनौती डोपिंग फ्री माहौल बनाना है. ITA चीफ का कहना है कि भारत में सुधार की दिशा सही है, बस इसे तेजी से लागू करना होगा.

अगर भारत समय रहते अपनी एंटी-डोपिंग व्यवस्था को वर्ल्ड लेवल का बना लेता है तो 2036 ओलंपिक न सिर्फ सपना बल्कि हकीकत बन सकता है. अन्यथा, वैश्विक चिंताएं बढ़ सकती हैं.

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