2011 विश्वकप फाइनल जीतने के बाद भारतीय क्रिकेट टीम के साथ हरभजन सिंह. फोटो: Getty Images
हरभजन सिंह. दिग्गज बोलर्स में से एक. भज्जी ने हाल ही में क्रिकेट से रिटायर होने की घोषणा की थी. और इसके बाद उन्होंने एक चौंकाने वाला दावा किया है. भज्जी ने कहा है कि BCCI में कोई जुगाड़ ना होने के चलते वह भारतीय टीम की कप्तानी नहीं कर पाए. भज्जी ने एक बातचीत के दौरान 2011 वर्ल्ड कप टीम के कई खिलाड़ियों को 2015 विश्वकप में मौका ना देने पर भी आश्चर्य जताया.
# भज्जी को कप्तानी क्यों नहीं?
हरभजन सिंह ने cricketnext.com से विस्तार से बात की. हरभजन से सबसे पहले भारतीय टीम की कप्तानी पर सवाल पूछा गया. जिसके जवाब में उन्होंने कहा,
'हां, कप्तानी मेरी वो उपलब्धि है जिसके बारे में कोई बात नहीं करता. मैं BCCI में किसी को भी नहीं जानता था, ऐसा कोई भी मेरा जानकार नहीं था जो मेरे नाम को आगे बढ़ा दे. क्योंकि इसकी ज़रूरत होती है. अगर आप किसी ताकतवर व्यक्ति के फेवरेट नहीं हैं तो आपको ये सम्मान कभी नहीं मिलता.'
उन्होंने इस बातचीत में आगे कहा,
'हालांकि इस चीज़ को छोड़ देना चाहिए. मैं जानता हूं कि मैं कप्तानी करने के काबिल था. क्योंकि हम कई कप्तानों को गाइड करते थे. मैं भारतीय टीम का कप्तान था या नहीं, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता. मैं अपने देश की टीम का कप्तान नहीं बन सका इसका मुझे कोई पछतावा नहीं है. मैं बतौर खिलाड़ी देश की सेवा करने को तैयार था.'
# 2011 विश्व चैम्पियन दोबारा नहीं खेले
भज्जी से यह भी पूछा गया, कि क्या वो अपने पूर्व कप्तान से अब भी निराश हैं. इसके जवाब में हरभजन ने कहा,
'देखिए हर कोई मेरे कोट्स का अलग-अलग तरह से इस्तेमाल करता है. मैं सिर्फ ये कहना चाहता हूं कि 2012 के बाद बहुत सी चीज़ें बेहतर की जा सकती थीं. सहवाग, मैं, युवराज, गंभीर भारत के लिए खेलते हुए रिटायर हो सकते थे. क्योंकि हम सभी IPL खेल रहे थे. ये एक विडंबना ही है कि 2011 की चैम्पियन टीम फिर कभी एकसाथ नहीं खेली. क्यों? उस टीम में से कुछ ही 2015 में खेले, आखिर क्यों?'
इस चीज़ के लिए उन्होंने सेलेक्टर्स को ज़िम्मेदार माना. उन्होंने कहा,
'उस समय के चयनकर्ताओं ने अपने काम के साथ न्याय नहीं किया. वह नहीं चाहते थे कि टीम एक हो. जब महान खिलाड़ी अच्छा कर रहे थे तब नए खिलाड़ियों को लाने की क्या ज़रूरत है? मैंने एक बार चयनकर्ताओं से ये कह दिया था. और उनका जवाब था कि ये उनके हाथ में नहीं है. फिर मैंने उनसे पूछा कि वह फिर चयनकर्ता हैं ही क्यों.'
# धोनी पर भज्जी
हरभजन सिंह ने इस बातचीत में धोनी पर भी बात की. भज्जी से पूछा गया कि क्या वो एमएस धोनी से निराश हैं. उन्होंने कहा,
'नहीं बिल्कुल नहीं, मुझे धोनी से कोई शिकायत नहीं है. वो इतने सालों से मेरे अच्छे दोस्त हैं. मेरी शिकायत BCCI से रही है, उस समय की सरकार. मैं BCCI को सरकार कहता हूं.'
# ऑस्ट्रेलियंस से मिली तारीफ़
भज्जी ने इस बातचीत में ऑस्ट्रेलियन प्लेयर्स से मिली इज्ज़त पर भी बात की. उन्होंने कहा,
'पॉन्टिंग-हेडेन काफी बड़े खिलाड़ी हैं, और जब वो आपके खेल की तारीफ़ करते हैं तो अच्छा महसूस होता है. वे कभी भी बिना कुछ किए आपकी तारीफ़ नहीं करेंगे. मैंने ज़रूर बतौर खिलाड़ी कुछ ना कुछ किया ही होगा. Aussies हमारे वक्त की एक बॉस टीम थी, उन्हें चैलेंज करना और उनके खिलाफ़ खुद को परखना हमेशा बेहद खास होता था.'
# अनिल कुंबले के साथ रिश्ते
इस इंटरव्यू में हरभजन सिंह ने अनिल कुंबले के साथ अपने रिश्ते पर भी बात की. उनसे पूछा गया कि कई बार उन्हें कुंबले से ऊपर रखते हुए प्लेइंग इलेवन में चुना जाता था. उन्होंने कहा,
'अनिल भाई के लिए मेरे मन में सबसे ज़्यादा सम्मान है. जितना मैं क्रिकेट को समझता हूं, उनसे बड़ा कोई भी मैच विनर नहीं है. उनके साथ इतने साल खेलना मेरे लिए और भी बड़े सम्मान की बात है. हां, 2003 विश्वकप के दौरान कई मौकों पर मुझे उनसे ऊपर प्लेइंग इलेवन में चुना गया. लेकिन मैंने ऐसे मुद्दों पर कभी भी उन्हें चिंतित नहीं पाया. उन्हें कभी भी ऐसा नहीं लगा कि वो क्यों नहीं खेल रहे और मैं क्यों खेल रहा हूं. मैं सिर्फ एक ही बात कहना चाहूंगा कि वो जितने बड़े गेंदबाज़ थे. उससे 10 गुना बड़े इंसान हैं. मेरे जीवन में उनका बहुत बड़ा योगदान है. उन्होंने मुझे जीवन में हर पल गाइड किया.'
हरभजन सिंह अब क्रिकेट के मैदान पर नज़र नहीं आते. बीते सीज़न IPL में उन्हें आखिरी बार खेलते देखा गया था. इस बार उम्मीद है कि वो IPL में दिखेंगे लेकिन मैच के लिए रणनीति बनाते.